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जर्जर होने के कारण जानलेवा साबित हो रहीं बिजली की हाईटेंशन लाइनें

Tue, 27 Feb 2018 10:00 AM IST
Updated Tue, 27 Feb 2018 10:00 AM IST
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जर्जर होने के कारण जानलेवा साबित हो रहीं बिजली की हाईटेंशन लाइनें
शाहजहांपुर। पॉवर सब स्टेशनों और विद्युत पोषकों (फीडर) को बिजली सप्लाई करने वाली हाईटेंशन लाइनों के नेटवर्क का नियमित रख रखाव और नवीनीकरण नहीं होने से उनके टॉवर, पोल और जर्जर तार जानलेवा साबित हो रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों के निवास वाले शहरी क्षेत्र में मुख्यमंत्री भ्रमण के मद्देनजर लाइनों को कमोबेश सुधार लिया गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में एचटी लाइनों की खराबी और उनसे प्रवाहित करंट की चपेट में आकर अक्सर लोग जान से हाथ धो बैठते हैं। कहीं इंसुलेटर खराब होने से तो कहीं तारों के बीच फासला बनाए रखने को स्टिक नहीं लगाने से शार्ट सर्किट से फसलों को आग लगना सामान्य बात हो गई है। अक्सर ऐसी घटनाओं में विभाग के अधिकारी पीड़ितों पर सुरक्षागत लापरवाही बरतने का ठीकरा फोड़कर उन्हें मुआवजा देने से बच जाते हैं।
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लो टेंशन लाइनें भी एचटी लाइनों जैसी खतरनाक
11000 वोल्ट, 33000 वोल्ट और 2.20 लाख वोल्ट करंट सप्लाई करने वाली हाईटेंशन लाइनें अक्सर मेन पॉवर स्टेशन से लेकर सब स्टेशनों और फीडर तक सीमित रहती हैं। इन लाइनों की चपेट में आने के बाद किसी का भी बचना मुश्किल है, लेकिन घरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को 220 से 440 वोल्ट की बिजली देने वाली लो टेंशन (एलटी) लाइनें भी मामूली असावधानी बरतने पर जन सामान्य के लिए कम खतरनाक नहीं होतीं। गली-चौराहों के नुक्कड़ों पर लगे ट्रांसफार्मरों से लेकर मोहल्लों तक जाने वाली इन लाइनों को जन जीवन के लिए सुरक्षित रखने को उन्हें बंच केबिल में बदला जा रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह ऐसी लाइनों के ढीले तार करंट से जुड़े हादसों को न्यौता दे रहे हैं।
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6553 किमी एचटी-एलटी लाइनों का जिले में बिछा जाल
जिले में कुल 6543 किमी एचटी और एलटी लाइनों का जाल बिछा है। इनमें शहरी क्षेत्र 80 किमी एचटी लाइनों की सुरक्षा मानक के अनुरूप है, लेकिन 170 किमी एलटी लाइनों के रखरखाव में कई जगह लापरवाही बरती जा रही है। शहर में घनी आबादी वाले मंडी मोड़ इलाके में बाबूराम गोटा वाले के प्रतिष्ठान के पास दो साल से खड़ा जर्जर पोल एक ओर झुक जाने से बारिश के दौरान अक्सर करंट उतर आता है। पोल तिरछा होने से खुलेे तारों का मकड़जाल भी नीचे आ गया है। गत वर्ष डॉन एंड डोना वाली गली के मुहाने पर रखे ट्रांसफार्मर को जोड़ने वाली एलटी लाइन के तार स्कूल बिल्डिंग के बिल्कुल पास निकले होने से एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ गई। अहमदपुर रेती, जलालनगर, हयातपुरा, हुसैनपुरा आदि मोहल्लों में भी एलटी लाइनें खतरनाक हालत में झूल रही हैं।
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बजट की कमी से भंडार गृह में तार का बना रहता है अकाल
जहां एक ओर जिले के पॉवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सब स्टेशनों के निर्माण समेत छूटे हुए गांवों में विद्युतीकरण पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम करोड़ों की धनराशि पानी की तरह बहा रही है। वहीं शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र में लाइनों के रखरखाव को विभाग पूरे साल बजट को तरसता रहा। विभागीय अभियंता भी मानते हैं कि बजट की कमी के कारण स्टोर को भेजी गई तार, इंसुलेटर, कैपेसिटर आदि की डिमांड पर कोई कार्यवाही नहीं होती। अपवाद के तौर पर वीआईपी क्षेत्र के कारण अब्दुल्लागंज से चौक कोतवाली तक 11 केवी वाली तीन किमी अंडरग्राउंड लाइन डाली जा चुकी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के वितरण खंडों की लाइनों को पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा है।
लाइनों की सुरक्षा के मानक: एक नजर
एलटी लाइनें जमीन से 11 मीटर और एचटी लाइनें 13 मीटर ऊंचाई पर हों।
दो खंभों के बीच टूट चुके तारों को तत्काल बदला जाना चाहिए।
लाइनों के इंसुलेटर और कैपेसिटर की नियमित जांच होनी चाहिए।
तारों को आपस में टकराने से रोकने को स्टिक बांधी जानी चाहिए।
छज्जों और छतों के ऊपर से लाइनेें नहीं निकलनी चाहिए।
टॉवरों के आसपास पांच मीटर चौड़ी गैलरी खाली रहनी चाहिए।
टॉवरों के आसपास पौधरोपण और कच्चा-पक्का निर्माण नहीं हो।

22 दुर्घटनाओं में प्रमाणित हो चुकी विभाग की लापरवाही
लाइनों के रखरखाव में कमी के चलते जन हानि, पशुहानि अथवा फसली हानि होने पर पीड़ितों के लिए मुआवजा हासिल करने की प्रक्रिया बेहद दुरूह है। विभाग की लापरवाही से मौत होने की दशा में मृतक आश्रितों को पांच लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन यह तभी संभव है, जब अफसर मान लें कि लापरवाही उनके स्टाफ की रही। विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक रजनीकांत के अनुसार वितरण खंड के अधिकारी इसी प्रयास में रहते हैं कि किसी तरह पीड़ितों को ही दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाए। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में करीब 22 दुर्घटनाओं में विद्युत विभाग की लापरवाही सामने आई और तीन अन्य मामलों की जांच होनी शेष है।


एचटी-एलटी लाइनों का वितरण खंड वार ब्यौरा (किमी)
डिवीजन एचटी एलटी
शहर डिवीजन (सेकेंड) 80 170
ग्रामीण डिवीजन (फर्स्ट) 2100 3225
तिलहर डिवीजन 118 400
जलालाबाद डिवीजन 110 350

शहरी क्षेत्र में पॉवर नेटवर्क को डबल सर्किट सप्लाई देने के लिए लगातार सुधारा जा रहा है। यह काम विशेष बजट से कराया जा रहा है, इसलिए धनाभाव जैसी कोई समस्या नगरीय क्षेत्रों में आड़े नहीं आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र के वितरण खंडों में घर-घर उजाला लाने की सरकार की योजना से वहां के नेटवर्क में भी तेजी से सुधार हो रहा है। मुआवजा उसी दशा में स्वीकृत होता है, जब प्रभावित पक्ष की कोई गलती प्रमाणित नहीं हो। बिजली उपभोग के आत्मघाती तरीके भी बहुधा हादसों का कारण बन जाते हैं।
-विवेक पटेल, एक्सईएन सिटी, पॉवर कारपोरेशन
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