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परमदानी को प्राप्त होता है शिवलोक: प्रशांत
Updated Fri, 14 Jul 2017 08:46 PM IST
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शाहजहांपुर। खिरनीबाग रामलीला मैदान में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में संत प्रशांत प्रभु ने कहा कि भगवान भोलेनाथ का भक्त परमदानी होता है और उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है।
उन्होंने सुनाया कि एक बार दैत्यों ने व्रतासुर के साथ मिलकर समस्त लोकों को पराजित कर इंद्र का पद छीन लिया और स्वर्ग पर शासन करने लगा। इससे दुखी होकर देवतागण ब्रह्मा जी के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई। ब्रह्मा जी नेे देवताओं को बताया कि महर्षि दधीचि भगवान शिव के परम भक्त हैं। उन्होंने घोर तप किया है। वह समस्या का समाधान कर सकते हैं। यदि महर्षि अपनी अस्थियों का बज्र बनाकर दे दें तो व्रतासुर का वध किया जा सकता है। बाद में ऐसा ही हुआ और महर्षि दधीचि की अस्थियों से बने बज्र से व्रतासुर का अंत किया गया। महाराज ने कहा कि भगवान शिव के भक्त की सभी समस्याओं का खुद ही निदान हो जाता है।
इससे पूर्व आचार्य विवेकानंद ने यजमान उद्योगपति अशोक कुमार गुप्ता और रीता गुप्ता से व्यास पीठ का पूजन कराकर विधिवत कथा का शुभारंभ किया। आरती के बाद कथा को विश्राम दिया गया। आयोजन में हरिशरण वाजपेयी, नीरज वाजपेयी, रितेश शुक्ला, विद्या प्रकाश अवस्थी, रमेश चंद्र, चाहत मिश्रा, अभिषेक वाजपेयी, पिंकी वाजपेयी, शैफाली वाजपेयी, रेनू मिश्रा, निर्मला देवी आदि का योगदान रहा।
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सावन में शिव पुराण कथा का महत्व समझते हुए बड़ी संख्या में भोले बाबा के भक्त पहुंच रहे हैं।
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उन्होंने सुनाया कि एक बार दैत्यों ने व्रतासुर के साथ मिलकर समस्त लोकों को पराजित कर इंद्र का पद छीन लिया और स्वर्ग पर शासन करने लगा। इससे दुखी होकर देवतागण ब्रह्मा जी के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई। ब्रह्मा जी नेे देवताओं को बताया कि महर्षि दधीचि भगवान शिव के परम भक्त हैं। उन्होंने घोर तप किया है। वह समस्या का समाधान कर सकते हैं। यदि महर्षि अपनी अस्थियों का बज्र बनाकर दे दें तो व्रतासुर का वध किया जा सकता है। बाद में ऐसा ही हुआ और महर्षि दधीचि की अस्थियों से बने बज्र से व्रतासुर का अंत किया गया। महाराज ने कहा कि भगवान शिव के भक्त की सभी समस्याओं का खुद ही निदान हो जाता है।
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इससे पूर्व आचार्य विवेकानंद ने यजमान उद्योगपति अशोक कुमार गुप्ता और रीता गुप्ता से व्यास पीठ का पूजन कराकर विधिवत कथा का शुभारंभ किया। आरती के बाद कथा को विश्राम दिया गया। आयोजन में हरिशरण वाजपेयी, नीरज वाजपेयी, रितेश शुक्ला, विद्या प्रकाश अवस्थी, रमेश चंद्र, चाहत मिश्रा, अभिषेक वाजपेयी, पिंकी वाजपेयी, शैफाली वाजपेयी, रेनू मिश्रा, निर्मला देवी आदि का योगदान रहा।
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