{"_id":"5c1d2f26bdec2256d4375951","slug":"161545416486-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्रिसमस भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: चिन्मयानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्रिसमस भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: चिन्मयानंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
क्रिसमस भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग : चिन्मयानंद
शाहजहांपुर। नेव तकनीकी संस्थान के हॉलिस्टर हाल में क्रिसमस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि क्रिसमस समावेशी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, इसलिए इस पर्व को सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए।
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं ने भारत की समावेशी संस्कृति को अपनी सेवा और प्रेम के संदेश के माध्यम से और मजबूत करने की भूमिका निभाई है। पिथौरागढ़ से आए उत्तर भारत कांफ्रेंस के अधीक्षक पादरी वाईजे दास ने भी त्योहार के महत्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व पीयूष पॉल प्रसाद के निर्देशन में शिक्षा की ज्योति और उसकी सामर्थ्य को प्रदर्षित करने वाले नाटक का मंचन किया गया। साथ ही अमर शहीद रोशन सिंह के जीवन पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में आरती, मैथ्यू, मंजू सक्सेना आदि के निर्देशन में अविरल दीक्षित, मृदुल, मदन, प्रियांशु, रागिनी, देव, अक्ष, दिव्यांशु, बलजिंदर, परमजीत, रिधिमा, एंड्रिया, पूजा, एकता, अनम, ज्योति आदि ने मनमोहक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष मैसी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ. विकास पांडेय के संचालन में चले कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सपना आशीष ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पादरी अशोक श्रेष्ठा, ईपी सिंह, दारा सिंह, अतुल जैनवियर और सुरेश, मिल्टन ब्लॉसम जोसेफ आदि रहे।
शाहजहांपुर। नेव तकनीकी संस्थान के हॉलिस्टर हाल में क्रिसमस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि क्रिसमस समावेशी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, इसलिए इस पर्व को सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए।
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं ने भारत की समावेशी संस्कृति को अपनी सेवा और प्रेम के संदेश के माध्यम से और मजबूत करने की भूमिका निभाई है। पिथौरागढ़ से आए उत्तर भारत कांफ्रेंस के अधीक्षक पादरी वाईजे दास ने भी त्योहार के महत्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व पीयूष पॉल प्रसाद के निर्देशन में शिक्षा की ज्योति और उसकी सामर्थ्य को प्रदर्षित करने वाले नाटक का मंचन किया गया। साथ ही अमर शहीद रोशन सिंह के जीवन पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में आरती, मैथ्यू, मंजू सक्सेना आदि के निर्देशन में अविरल दीक्षित, मृदुल, मदन, प्रियांशु, रागिनी, देव, अक्ष, दिव्यांशु, बलजिंदर, परमजीत, रिधिमा, एंड्रिया, पूजा, एकता, अनम, ज्योति आदि ने मनमोहक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष मैसी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ. विकास पांडेय के संचालन में चले कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सपना आशीष ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पादरी अशोक श्रेष्ठा, ईपी सिंह, दारा सिंह, अतुल जैनवियर और सुरेश, मिल्टन ब्लॉसम जोसेफ आदि रहे।
विज्ञापन