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उपभोक्ता आयोग में चल रहे 1274 मुकदमे
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जिला उपभोक्ता फोरम शाहजहांपुर का भवन
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। उपभोक्ता अक्सर जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, घटतौली, मनमाने दाम वसूलने, ठगी, गारंटी अथवा वारंटी के बावजूद सेवा प्रदान नहीं करने जैसी समस्याओं जूझते हैं। इन समस्याओं से उन्हें निजात दिलाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। वास्तव में यह उपभोक्ताओं को उनकी शक्तियों और अधिकारों के बारे में जागरूक करने का महत्वपूर्व अवसर है। स्थानीय उपभोक्ता फोरम में 1274 वाद विचाराधीन हैं।
जिला स्तर पर उपभोक्ता आयोग का गठन होने के बाद 12 हजार 912 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 11,638 मुकदमों का निस्तारण करवाया जा चुका है। साल 2021 में ही 245 दर्ज दर्ज हुए थे। इनमें बीमा, बैंक, बिजली, रेलवे, मेडिकल लापरवाही, पोस्ट ऑफिस आदि से जुड़े मामले हैं। इनकी सुनवाई चल रही है। जिला उपभोक्ता आयोग के पूर्व सदस्य व अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह बताते हैं कि ग्राहकों के साथ आए दिन होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और उपभोक्ता अधिकारों को ज्यादा मजबूती प्रदान करने के लिए देश में 20 जुलाई, 2020 को ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019’ (कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019) लागू किया गया। इसमें उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की ठगी और धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई प्रावधान हैं। यह कानून अब साढ़े तीन दशक पुराने ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986’ का स्थान ले चुका है।
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाए जाने का मूल उद्देश्य यही है कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए। अगर वे धोखाधड़ी, कालाबाजारी, घटतौली इत्यादि के शिकार होते हैं तो इसकी शिकायत उपभोक्ता अदालत में कर सकें। साथ ही सरकारी संस्थाओं में रोडवेज, रेलवे, बैंक, फाइनेंस कंपनी की सेवाओं में कमी होने पर भी उपभोक्ता अदालत में शिकायत की जा सकती है। बताया कि वह वाद जो कहीं नहीं सुलझ सकते वे उपभोक्ता फोरम में निपटाए जाते हैं। इससे लगातार लोगों को राहत मिल रही है। लेकिन, ऐसे सिर्फ दो प्रतिशत उपभोक्ता ही हैं, जोकि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। बहुत से लोगों में जागरूकता की कमी है, वह सोचते हैं कि समय के साथ पैसा खर्चा होगा, जबकि ऐसा नहीं है। उपभोक्ता अदालत में देर है, लेकिन अंधेर नहीं है। समय जरूर लगता है और न्यूनतम खर्चा होता है। लेकिन सफलता भी मिलती है।
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50 लाख तक के मामलों की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम में
अभी बहुत से मामले विचाराधीन हैं। सरकार की ओर से अधिनियम में कुछ संशोधन भी किए हैं। पहले जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए किए भुगतान का मूल्य 20 लाख रुपये तक होता था, उन्हीं शिकायतों का निस्तारण किया जाता था। फिर एक करोड़ और अब 50 लाख रुपये भुगतान तक के मामलों की सुनवाई होती है। 50 लाख रुपये ऊपर के भुगतान के मामलों की सुनवाई राज्य आयोग और दो करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग में सुने जाते हैं।
सहारा कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें, आयोग ने दिलाया भुगतान
अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सहारा कंपनी को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। इसके खिलाफ तमाम लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है। इनकी सुनवाई उपभोक्ता आयोग में चल रही है। बहुत से लोगों को मुआवजा दिलाया गया है। बैंकों से जुड़े भी कई मामले हैं। डॉक्टरों की सेवाओं में कमी होने की शिकायतें, रेलवे बुकिंग, कोच के अंदर सुविधा न मिलना, किराया अधिक लेने जैसी समस्याएं हैं। लोकल स्तर पर किसानों को बीज, खाद, पेस्टीसाइड, कृषि उपकरण की खरीदारी के दौरान अगर कोई कमी मिलती है, तो वह उपभोक्ता फोरम की शरण लेकर मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
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जिला स्तर पर उपभोक्ता आयोग का गठन होने के बाद 12 हजार 912 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 11,638 मुकदमों का निस्तारण करवाया जा चुका है। साल 2021 में ही 245 दर्ज दर्ज हुए थे। इनमें बीमा, बैंक, बिजली, रेलवे, मेडिकल लापरवाही, पोस्ट ऑफिस आदि से जुड़े मामले हैं। इनकी सुनवाई चल रही है। जिला उपभोक्ता आयोग के पूर्व सदस्य व अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह बताते हैं कि ग्राहकों के साथ आए दिन होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और उपभोक्ता अधिकारों को ज्यादा मजबूती प्रदान करने के लिए देश में 20 जुलाई, 2020 को ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019’ (कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019) लागू किया गया। इसमें उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की ठगी और धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई प्रावधान हैं। यह कानून अब साढ़े तीन दशक पुराने ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986’ का स्थान ले चुका है।
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विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाए जाने का मूल उद्देश्य यही है कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए। अगर वे धोखाधड़ी, कालाबाजारी, घटतौली इत्यादि के शिकार होते हैं तो इसकी शिकायत उपभोक्ता अदालत में कर सकें। साथ ही सरकारी संस्थाओं में रोडवेज, रेलवे, बैंक, फाइनेंस कंपनी की सेवाओं में कमी होने पर भी उपभोक्ता अदालत में शिकायत की जा सकती है। बताया कि वह वाद जो कहीं नहीं सुलझ सकते वे उपभोक्ता फोरम में निपटाए जाते हैं। इससे लगातार लोगों को राहत मिल रही है। लेकिन, ऐसे सिर्फ दो प्रतिशत उपभोक्ता ही हैं, जोकि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। बहुत से लोगों में जागरूकता की कमी है, वह सोचते हैं कि समय के साथ पैसा खर्चा होगा, जबकि ऐसा नहीं है। उपभोक्ता अदालत में देर है, लेकिन अंधेर नहीं है। समय जरूर लगता है और न्यूनतम खर्चा होता है। लेकिन सफलता भी मिलती है।
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50 लाख तक के मामलों की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम में
अभी बहुत से मामले विचाराधीन हैं। सरकार की ओर से अधिनियम में कुछ संशोधन भी किए हैं। पहले जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए किए भुगतान का मूल्य 20 लाख रुपये तक होता था, उन्हीं शिकायतों का निस्तारण किया जाता था। फिर एक करोड़ और अब 50 लाख रुपये भुगतान तक के मामलों की सुनवाई होती है। 50 लाख रुपये ऊपर के भुगतान के मामलों की सुनवाई राज्य आयोग और दो करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग में सुने जाते हैं।
सहारा कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें, आयोग ने दिलाया भुगतान
अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सहारा कंपनी को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। इसके खिलाफ तमाम लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है। इनकी सुनवाई उपभोक्ता आयोग में चल रही है। बहुत से लोगों को मुआवजा दिलाया गया है। बैंकों से जुड़े भी कई मामले हैं। डॉक्टरों की सेवाओं में कमी होने की शिकायतें, रेलवे बुकिंग, कोच के अंदर सुविधा न मिलना, किराया अधिक लेने जैसी समस्याएं हैं। लोकल स्तर पर किसानों को बीज, खाद, पेस्टीसाइड, कृषि उपकरण की खरीदारी के दौरान अगर कोई कमी मिलती है, तो वह उपभोक्ता फोरम की शरण लेकर मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।