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बाजार में उपलब्धता नहीं, कैसे लागू हो एनसीईआरटी कोर्स
Updated Sun, 15 Apr 2018 08:27 PM IST
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एनसीईआरटी की किताबों के लिए भटक रहे अभिभावक
बाजार में पुस्तकों की कमी का लाभ उठा रहे निजी प्रकाशक
सिलेबस की सभी पुस्तकें न मिलने से अभिभावकों पर बढ़ा बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। इसके बावजूद बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकों की किल्लत है। एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार में न होने का फायदा निजी प्रकाशक उठा रहे हैं। इतना ही नहीं सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के विद्यालय भी अपने यहां कोर्स लागू नहीं कर पा रहे। अभिभावकों को मजबूरी में निजी प्रकाशकों के सिलेबस खरीदने होते हैं। ओवररेटिंग और महंगे कोर्स से अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ होता है। निजी प्रकाशकों के मुकाबले एनसीईआरटी की पुस्तकों की कीमतें काफी कम हैं। अगर इनकी बाजार में पर्याप्त उपलब्धता हो तो अभिभावकों की जेब पर बोझ कम होगा।
अभिभावकों को कक्षा एक से पांचवीं तक का सिलेबस खरीदने के लिए दो से तीन हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं। स्कूल में एनसीईआरटी का सिलेबस लागू है। प्रबंधन उसी सिलेबस की किताब दूसरे प्रकाशन से खरीदवा रहे है। स्कूल संचालक भी कहते हैं कि अगर एनसीईआरटी की सभी पुस्तकें आसानी से बाजार में उपलब्ध हों तो वह निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को अपने विद्यालय में नहीं लगाएंगे।
कुछ विषयों की हिंदी तो कुछ अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध
बाजार में एनसीईआरटी पुस्तकें खरीदने के लिए होड़ है, लेकिन कुछ विषयों में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें मिल रही हैं तो कुछ विषयों में हिन्दी माध्यम में, नौवीं-दसवीं कक्षा की सभी पुस्तकें बाजार में नहीं है। खासकर इतिहास और भूगोल की पुस्तकें की कमी हैं। इसी तरह 11वीं और 12वीं कक्षाओं की सभी पुस्तकें भी नहीं मिल रही हैं। विज्ञान वर्ग (हिन्दी माध्यम) में भी एनसीईआरटी की सभी पुस्तकें बाजार में सुलभ नहीं है। साइंस विषय की पुस्तकें अंग्रेजी माध्यम में तो है लेकिन हिन्दी माध्यम में नहीं मिल रही हैं। 7वीं और 8वीं कक्षाओं में कई विषयों की पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि छात्रों की जितनी मांगें हैं उतनी पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
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प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों की भी किल्लत
ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाएं मई-जून में होंगी। सिविल सेवा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी उपयोगी होती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को आसानी से बाजार में इतिहास और भूगोल की किताबें नहीं मिल रहीं। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें काफी महंगी हैं। पुस्तकों की किल्लत हिंदी और अंग्रेजी माध्यम दोनों में है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे तमाम विद्यार्थी पुस्तकों की फोटो स्टेट से काम चला रहे हैं।
एनसीईआरटी की पुस्तकों की कमी हर साल बनी रहती है। कक्षा एक से आठ तक की पुस्तकों की उपलब्धता करीब नगण्य रहती है। पुस्तक विक्रेता दिल्ली, मेरठ जैसे बड़े शहरों से साल भर पुस्तकें जुटाने का काम करते हैं। इसके बावजूद कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक की 60 फीसदी किताबों की उपलब्धता हो पाती है। अभिभावकों को जब बाजार में कोर्स नहीं मिलता तो निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदनी होती हैं।
- सचिन बाथम, पुस्तक विक्रेता
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बाजार में पुस्तकों की कमी का लाभ उठा रहे निजी प्रकाशक
सिलेबस की सभी पुस्तकें न मिलने से अभिभावकों पर बढ़ा बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। इसके बावजूद बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकों की किल्लत है। एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार में न होने का फायदा निजी प्रकाशक उठा रहे हैं। इतना ही नहीं सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के विद्यालय भी अपने यहां कोर्स लागू नहीं कर पा रहे। अभिभावकों को मजबूरी में निजी प्रकाशकों के सिलेबस खरीदने होते हैं। ओवररेटिंग और महंगे कोर्स से अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ होता है। निजी प्रकाशकों के मुकाबले एनसीईआरटी की पुस्तकों की कीमतें काफी कम हैं। अगर इनकी बाजार में पर्याप्त उपलब्धता हो तो अभिभावकों की जेब पर बोझ कम होगा।
अभिभावकों को कक्षा एक से पांचवीं तक का सिलेबस खरीदने के लिए दो से तीन हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं। स्कूल में एनसीईआरटी का सिलेबस लागू है। प्रबंधन उसी सिलेबस की किताब दूसरे प्रकाशन से खरीदवा रहे है। स्कूल संचालक भी कहते हैं कि अगर एनसीईआरटी की सभी पुस्तकें आसानी से बाजार में उपलब्ध हों तो वह निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को अपने विद्यालय में नहीं लगाएंगे।
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कुछ विषयों की हिंदी तो कुछ अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध
बाजार में एनसीईआरटी पुस्तकें खरीदने के लिए होड़ है, लेकिन कुछ विषयों में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें मिल रही हैं तो कुछ विषयों में हिन्दी माध्यम में, नौवीं-दसवीं कक्षा की सभी पुस्तकें बाजार में नहीं है। खासकर इतिहास और भूगोल की पुस्तकें की कमी हैं। इसी तरह 11वीं और 12वीं कक्षाओं की सभी पुस्तकें भी नहीं मिल रही हैं। विज्ञान वर्ग (हिन्दी माध्यम) में भी एनसीईआरटी की सभी पुस्तकें बाजार में सुलभ नहीं है। साइंस विषय की पुस्तकें अंग्रेजी माध्यम में तो है लेकिन हिन्दी माध्यम में नहीं मिल रही हैं। 7वीं और 8वीं कक्षाओं में कई विषयों की पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि छात्रों की जितनी मांगें हैं उतनी पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
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प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों की भी किल्लत
ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाएं मई-जून में होंगी। सिविल सेवा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी उपयोगी होती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को आसानी से बाजार में इतिहास और भूगोल की किताबें नहीं मिल रहीं। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें काफी महंगी हैं। पुस्तकों की किल्लत हिंदी और अंग्रेजी माध्यम दोनों में है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे तमाम विद्यार्थी पुस्तकों की फोटो स्टेट से काम चला रहे हैं।
एनसीईआरटी की पुस्तकों की कमी हर साल बनी रहती है। कक्षा एक से आठ तक की पुस्तकों की उपलब्धता करीब नगण्य रहती है। पुस्तक विक्रेता दिल्ली, मेरठ जैसे बड़े शहरों से साल भर पुस्तकें जुटाने का काम करते हैं। इसके बावजूद कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक की 60 फीसदी किताबों की उपलब्धता हो पाती है। अभिभावकों को जब बाजार में कोर्स नहीं मिलता तो निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदनी होती हैं।
- सचिन बाथम, पुस्तक विक्रेता