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28 फीसदी जीएसटी पर भड़के प्लाईवुड निर्माता

Fri, 14 Jul 2017 06:18 PM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 06:18 PM IST
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28 फीसदी जीएसटी पर भड़के प्लाईवुड निर्माता
शाहजहांपुर। पापुलर और यूकेलिप्टस जैसी सस्ती लकड़ी से बने प्लाईवुड उत्पादों पर 28 फीसदी जीएसटी थोपे जाने और एक कर प्रणाली से जुड़ी विसंगतियों की किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं किए जाने के विरोध में प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए प्लाईवुड निर्माताओं ने प्लाईवुड मैन्युफैक्चर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय आह्वान पर शुक्रवार को अपनी इकाइयां बंद रखकर एक दिवसीय हड़ताल की। उन्होंने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर डीएम नरेंद्र कुमार सिंह को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर जीएसटी को सरलीकृत किए जाने की मांग दोहराई।
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डीएम से वार्ता करते हुए प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/ प्रदेश अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि न सिर्फ गरीब तबके के लोग बल्कि सरकारी सेक्टर के आवास, कार्यालयों आदि के निर्माण में पापुलर, यूकेलिप्टस से बने सस्ते दरवाजों का इस्तेमाल होता है। इन पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाकर सस्ते प्लाईवुड उत्पाद आम आदमी की पहुंच से दूर किए जा रहे हैं।
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ज्ञापन में कहा गया है कि किसान खेत की मेड़ों पर पापुलर, यूकेलिप्टस लगाकर अपनी आय के अतिरिक्त साधन बनाते हैं। इन पेड़ों की लकड़ी के कटान और परिवहन पर प्रदेश में 2.5 प्रतिशत मंडी टैक्स भी लगाया जाता है, जबकि दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत 20 राज्यों में मंडी शुल्क माफ है। दूसरी ओर, सागौन, कोरों, साखों, शीशम आदि के पेड़ तैयार होने में 20 से 50 वर्ष लगते हैं और उनसे बने दरवाजे दस से 50 हजार रुपये कीमत के होने के बावजूद उन पर मात्र 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। इसलिए जीएसटी काउंसिल इस तरह की विसंगतियां दूर कराने पर गंभीरता से विचार करे।
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इस मौके पर बरेली से आए प्रांतीय कोषाध्यक्ष वीरेंद्र प्रकाश अग्रवाल, लखीमपुर खीरी से आए गोपालजी अग्रवाल, सीतापुर से आए प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित अग्रवाल, लीगल सेल संयोजक रमेश अग्रवाल, अशोक गोयल, योगेश अग्रवाल, अजीत अग्रवाल, विकास अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
एक देश-एक कर की बात महज छलावा
शाहजहांपुर। जीएसटी के नाम पर एक देश-एक कर की बात महज छलावा है। राज्यों के स्तर पर मंडी शुल्क में असमानता और प्लाईवुड उत्पादों पर जीएसटी की दोहरी दरें इसका प्रमाण हैं। बिना किसी तैयारी के देश पर थोप दिए गए जीएसटी के सरलीकरण की बात पर केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल मौन साधे हैं। यदि सरकार का यही रवैया रहा तो न केवल देश की 3600 प्लाईवुड इकाइयां स्थायी रूप से ठप हो जाएंगी, बल्कि हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
यह बातें प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीएम को ज्ञापन देने से पहले एक होटल में पत्रकारोें से वार्ता के दौरान कहीं। सस्ती लकड़ी के उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाने की वजह पूछे जाने पर संस्था के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/ प्रदेश अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि इसका जवाब प्रधानमंत्री और प्रदेश-केंद्र के वित्त मंत्री भी नहीं दे रहे, जबकि यह मुद्दा उनके समक्ष कई मीटिंगों में उठाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्लाईवुड निर्माता असंगठित होने के कारण सरकार उनके हितों की उपेक्षा कर रही है। इसीलिए सरकार जीएसटी के मुद्दे पर सरलीकरण के बजाय अपनी जिद पर अड़ी है। प्रांतीय कोषाध्यक्ष वीरेंद्र प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि नई व्यवस्था में एसजीएसटी और सीजीएसटी के दोहरे बिल बनाने होंगे, इसलिए एक कर की बात का प्रचार सरासर झूठा है।

प्रदेश उपाध्यक्ष गोपालजी अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों को दो-दो कर्मचारी सीए के यहां बैठाने पर भी जीएसटी की शर्तें पूरी करना कठिन होगा। यही नहीं, कोई गलती होने पर जेल जाने के एक दर्जन रास्ते खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्लाईवुड ऐसा लाभकारी उद्योग है, जिसमें पेड़ की छाल से लेकर बुरादा तक इस्तेमाल होता है। इसलिए प्लाईवुड को टैक्स फ्री किया जाना चाहिए। वार्ता में योगेश अग्रवाल, रमेश अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, अशोक गोयल आदि शामिल रहे।
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