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1087 गन्ना किसानों के सट्टे जांच में अवैध पाए जाने पर निरस्त
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शाहजहांपुर। गन्ना सर्वे सट्टा प्रदर्शन की तीन चरणों में प्रक्रिया होने के बाद गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों ने जांच कराई तो 1087 किसानों के सर्वे सट्टा अवैध पाए गए। इनमें 552 मृतकों और 63 भूमिहीनों के सट्टे भी शामिल हैं। यही नहीं, 464 ऐसे किसान पाए गए, जिन्होंने गन्ना आपूर्ति में फर्जीवाड़ा करने के लिए दोहरे सट्टे बनवा लिए थे। विभाग ने मृतकों के सट्टे उनके वारिसों के नाम स्थानांतरित करने केे साथ दोहरे सट्टों के मामलों में संबंधित किसानों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अपर मुख्य सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूस रेड्डी के निर्देश पर जिले के सभी 1.63 लाख गन्ना किसानों के सर्वे सट्टा की ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों के स्तर से जांच कराने पर यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से सभी सट्टे बंद कर दिए गए हैं। सर्वे सट्टा की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। अब उन किसानों के अभिलेखों की जांच कराई जा रही है, जिन्होंने सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 सितंबर तक नजदीकी समितियों की सदस्यता ली है।
उन्होंने बताया कि चीनी मिलों के चलने से पहले तक सर्वे के आंकड़ों को अंतिम रूप दिया जाना है। मिल चलने के बाद जिन किसानों का डबल सट्टा पाया गया तो संबंधित सर्किल के गन्ना पर्यवेक्षक को जवाबदेह मानते हुए उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीसीओ के अनुसार मृतक किसानों के सट्टों पर नया नाम दर्ज कराने के लिए वारिसों को समिति की सदस्यता के लिए आवेदन करना होगा। मृतक किसान के एक से अधिक वारिस होने पर जमीन, गन्ना रकबा और बेसिक कोटा वारिसों के नाम समान रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गत वर्ष की तरह इस बार भी गन्ना पर्ची ईआरपी पोर्टल से एसएमएस के जरिए भेजी जाएंगी। किसानों को सीधे डिजिटल पर्ची मिलने से मिलों को गन्ना आपूर्ति में बिचौलियों का हस्तक्षेप रोका जा सकेगा।
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अपर मुख्य सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूस रेड्डी के निर्देश पर जिले के सभी 1.63 लाख गन्ना किसानों के सर्वे सट्टा की ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों के स्तर से जांच कराने पर यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से सभी सट्टे बंद कर दिए गए हैं। सर्वे सट्टा की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। अब उन किसानों के अभिलेखों की जांच कराई जा रही है, जिन्होंने सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 सितंबर तक नजदीकी समितियों की सदस्यता ली है।
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उन्होंने बताया कि चीनी मिलों के चलने से पहले तक सर्वे के आंकड़ों को अंतिम रूप दिया जाना है। मिल चलने के बाद जिन किसानों का डबल सट्टा पाया गया तो संबंधित सर्किल के गन्ना पर्यवेक्षक को जवाबदेह मानते हुए उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीसीओ के अनुसार मृतक किसानों के सट्टों पर नया नाम दर्ज कराने के लिए वारिसों को समिति की सदस्यता के लिए आवेदन करना होगा। मृतक किसान के एक से अधिक वारिस होने पर जमीन, गन्ना रकबा और बेसिक कोटा वारिसों के नाम समान रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गत वर्ष की तरह इस बार भी गन्ना पर्ची ईआरपी पोर्टल से एसएमएस के जरिए भेजी जाएंगी। किसानों को सीधे डिजिटल पर्ची मिलने से मिलों को गन्ना आपूर्ति में बिचौलियों का हस्तक्षेप रोका जा सकेगा।
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