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Sant Kabir Nagar News: नॉन एपिलिप्सी सिंड्रोम की चपेट में आ रहे युवा, प्रतिदिन पहुंच रहे तीन से चार मरीज

Mon, 18 Nov 2024 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Mon, 18 Nov 2024 11:14 PM IST
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Youth are falling prey to non-epilepsy syndrome, three to four patients arriving every day
- जिला अस्पताल में है इलाज की पर्याप्त इंतजाम
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संतकबीरनगर। मिर्गी जो कि बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाती है, अब इसकी चपेट में किशोर, युवा भी तेजी से आते रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार मरीज इलाज के पहुंच रहे हैं। इसमें ज्यादातर को बेहोशी और झटके आने की समस्या हो रही है। चिकित्सकीय भाषा में इस तरह के लक्षण को साइकोलॉजिकल नॉन एपिलेप्सी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय से जांच और इलाज करवाया जाए तो इस बीमारी से निजात मिल सकती है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एपी मिश्र ने कहना है कि मिर्गी का इलाज करवाने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बहुत से लोग इलाज करवाने के बजाय झाड़ फूंक पर विश्वास कर बीमारी को बढ़ा रहे हैं। ओपीडी में आने वाले किशोर, युवाओं की बात करें तो झटके आने, कभी हाथ हिलना तो कभी चेहरा हिलने लगता है। कभी मुंह से झाग आने की समस्या भी मिल रही है।
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मनोवैज्ञानिक दबाव की वजह से भी झटके आते हैं। चिंता की बात यह है कि ओपीडी में आने वाले 30 किशोरों-युवाओं में 10 की उम्र 15 साल से कम रहती है। हालांकि अब जागरूकता के कारण लोग अस्पताल में आ रहे हैं। वहीं, प्रदूषण की वजह से न्यूरो सिस्टि सरकोसिस बीमारी भी बढ़ रही है। ये बीमारी उन जगहों पर रहने वालों को भी हो रही है, जहां नाले बहते हैं, या फिर खेतों में गंदा पानी जा रहा है और लोग उससे सींची गई सब्जी खा रहे हैं।
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मिर्गी आने के लक्षण
- बेहोश होना।
- बोलने में समस्या और भावनाओं में बदलाव।
- बात को समझने में परेशानी।
- बच्चों को एक टक एक ही जगह पर देखना।
- सांस लेने में परेशानी और मांसपेशियों में दर्द।
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कारण
- सिर में गंभीर चोट।
- ब्रेन स्ट्रोक और टयूमर।
- आनुवंशिक सिंड्रोम या जन्मजात असमानताएं।
- प्रसवपूर्व चोट या जन्म से पहले मस्तिष्क क्षति।
- विकास संबंधी विकार।

ये रखें ख्याल
- मिर्गी के मरीज को एक करवट लेटा देना चाहिए।
- मरीज को खाली पेट नहीं रखना चाहिए।
- पानी व आग से मरीज को दूर रखें।
- दांत कटकटाने पर मुंह में चम्मच न डाले, बल्कि रूमाल दें।
- मरीज को तनाव से दूर रखें।
- आठ घंटे की नींद मरीज को लेने दें।
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