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दवा और जांच बाहर से लिखने पर हंगामा
sant kabir nagar
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:21 PM IST
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हंगामा कर रहे मरीजों को जब सीएचसी अधीक्षक ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र लिखने का आश्वासन दिया तब जाकर लोग माने।
- फोटो : अमर उजाला
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बुखार की मार झेल रहे पिडिया बेलहरा गांव के मरीजों ने बुधवार को सीएचसी नाथनगर पर जमकर हंगामा किया। आरोप है कि ओपीडी में तैनात चिकित्सक ने मरीजों की जांच और दवा बाहर से लिख दी। इससे लोग नाराज हो गए। वहीं जानकारी पर सीएचसी अधीक्षक मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे मरीजों को जब अधीक्षक ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र लिखने का आश्वासन दिया तब जाकर लोग माने।
नाथनगर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पिडिया बेलहरा में बुखार का कहर अभी थमा नहीं है। इस बीमारी से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई बीमार हैं। समाचार पत्रों खबर छपने के बाद सोमवार को टीम गांव पहुंची और कैंप लगाकर लोगों की जांच की। कुछ मरीजों को बेहतर जांच और इलाज के लिए सीएचसी पर बुलाया गया था। बुधवार को गांव निवासी मदन के साथ तेज बुखार से पीड़ित पिंकी (18), अभिनय कुमार (28), इन्द्रावती (16), सुंदरम (03)और अजीत कुमार (03) सीएचसी नाथनगर पहुंचे। इन लोगों का आरोप है कि ओपीडी में मौजूद डॉक्टर टी एन गुप्ता ने मलेरिया जांच कराने के लिए प्राइवेट लैब पर जांच कराने को भेज दिया। जांच के बाद अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए पर्ची लिख दी।
जब मरीजों ने खुद को बुखार प्रभावित गांव का निवासी बताकर डाक्टर द्वारा अस्पताल में मुफ्त जांच और दवा दिए जाने की बात बताई तो उक्त डॉक्टर भड़क गए। कहा कि यदि बीमारी से ठीक होना है तो अस्पताल के बाहर प्राइवेट जांच और मेडिकल स्टोर पर ही दवा लेनी पडे़गी। जिस पर मरीज नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। मरीजों को हंगामा करते देख अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टोर के संचालकों और लैब मालिकों ने पहले उन्हें धमका कर चुप कराने का प्रयास किया, लेकिन मरीज नहीं माने। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे अधीक्षक डॉक्टर रमेश कुमार के सामने मरीजों ने अस्पताल से ली गई पर्ची, प्राईवेट लैब से कराई गई जांच रिपोर्ट और मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्चियां दिखाई।
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अधीक्षक द्वारा आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के आश्वासन पर मरीज शांत हुए। अधीक्षक डॉक्टर रमेश कुमार ने बताया कि यह बेहद गंभीर मामला है, डॉक्टर के खिलाफ सीएमओ को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। वहीं अधीक्षक ने बताया कि सीएचसी में लैब टेक्निशियन न होने से जांच में दिक्कत हो रही है। लेकिन बुखार पीड़ित गांव पिडिया बेलहरा स्थिति भिन्न है। ऐसी स्थिति में मरीजों को एंबुलेंस से भेजकर जांच जिला अस्पताल से कराई जा सकती है। सीएमओ डॉक्टर ए पी श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों ने निशुल्क जांच और दवा दी जाती है। यदि सीएचसी नाथनगर में बाहर से दवा और जांच लिखे जाने की शिकायत की जांच कराई जाएगी। वहीं 12 अगस्त को हैंसर से लैब टेक्निशियन को नाथनगर भेजा गया था। यदि उसने चार्ज नहीं लिया है तो उससे जवाब तलब किया जाएगा।
सीएचसी की हर ओपीडी में बाहरी लोगों का ‘कब्जा’ ः धनघटा। भले शासन द्वारा निशुल्क जांच और दवा वितरण के दावे किए जाते हैं लेकिन नाथनगर की स्थिति इससे इतर है। यहां की हर ओपीडी पर बाहरी लोगों का ‘कब्जा’ रहता है। इन्हीं लोगाें के सहारे प्राइवेट मेडिकल स्टोर और लैब संचालक फलफूल रहे हैं। पिडिया बेलहरा के लोगों ने बुधवार को जब इसका विरोध ऐसे लोगों ने उन्हेें चुप कराने की भी कोशिश की। सीएचसी पहुंचे ग्राम ददरी हरदो निवासी रुद्रेश पांडेय ने बताया कि सीएचसी के बाहर मौजूद मेडिकल स्टोर के संचालकों और लैब मालिकों के एजेंट गेट से लेकर ओपीडी तक फैले रहते हैं। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसे अच्छे डॉक्टर को दिखाने का झांसा देकर अपनी सेटिंग वाली ओपीडी में लेकर पहुंच जाते हैं। यहां बेहतर उपचार के नाम पर बाहर की दवाइयां और जांच लिख दी जाती है। झिंगुरापार निवासी सुनील कुमार, रामबचन यादव ने बताया कि मलेरिया, टायफाइड आदि की जांच भी बाहर के लैब से ही कराने की सलाह दी जाती है।
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नाथनगर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पिडिया बेलहरा में बुखार का कहर अभी थमा नहीं है। इस बीमारी से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई बीमार हैं। समाचार पत्रों खबर छपने के बाद सोमवार को टीम गांव पहुंची और कैंप लगाकर लोगों की जांच की। कुछ मरीजों को बेहतर जांच और इलाज के लिए सीएचसी पर बुलाया गया था। बुधवार को गांव निवासी मदन के साथ तेज बुखार से पीड़ित पिंकी (18), अभिनय कुमार (28), इन्द्रावती (16), सुंदरम (03)और अजीत कुमार (03) सीएचसी नाथनगर पहुंचे। इन लोगों का आरोप है कि ओपीडी में मौजूद डॉक्टर टी एन गुप्ता ने मलेरिया जांच कराने के लिए प्राइवेट लैब पर जांच कराने को भेज दिया। जांच के बाद अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए पर्ची लिख दी।
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जब मरीजों ने खुद को बुखार प्रभावित गांव का निवासी बताकर डाक्टर द्वारा अस्पताल में मुफ्त जांच और दवा दिए जाने की बात बताई तो उक्त डॉक्टर भड़क गए। कहा कि यदि बीमारी से ठीक होना है तो अस्पताल के बाहर प्राइवेट जांच और मेडिकल स्टोर पर ही दवा लेनी पडे़गी। जिस पर मरीज नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। मरीजों को हंगामा करते देख अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टोर के संचालकों और लैब मालिकों ने पहले उन्हें धमका कर चुप कराने का प्रयास किया, लेकिन मरीज नहीं माने। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे अधीक्षक डॉक्टर रमेश कुमार के सामने मरीजों ने अस्पताल से ली गई पर्ची, प्राईवेट लैब से कराई गई जांच रिपोर्ट और मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्चियां दिखाई।
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अधीक्षक द्वारा आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के आश्वासन पर मरीज शांत हुए। अधीक्षक डॉक्टर रमेश कुमार ने बताया कि यह बेहद गंभीर मामला है, डॉक्टर के खिलाफ सीएमओ को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। वहीं अधीक्षक ने बताया कि सीएचसी में लैब टेक्निशियन न होने से जांच में दिक्कत हो रही है। लेकिन बुखार पीड़ित गांव पिडिया बेलहरा स्थिति भिन्न है। ऐसी स्थिति में मरीजों को एंबुलेंस से भेजकर जांच जिला अस्पताल से कराई जा सकती है। सीएमओ डॉक्टर ए पी श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों ने निशुल्क जांच और दवा दी जाती है। यदि सीएचसी नाथनगर में बाहर से दवा और जांच लिखे जाने की शिकायत की जांच कराई जाएगी। वहीं 12 अगस्त को हैंसर से लैब टेक्निशियन को नाथनगर भेजा गया था। यदि उसने चार्ज नहीं लिया है तो उससे जवाब तलब किया जाएगा।
सीएचसी की हर ओपीडी में बाहरी लोगों का ‘कब्जा’ ः धनघटा। भले शासन द्वारा निशुल्क जांच और दवा वितरण के दावे किए जाते हैं लेकिन नाथनगर की स्थिति इससे इतर है। यहां की हर ओपीडी पर बाहरी लोगों का ‘कब्जा’ रहता है। इन्हीं लोगाें के सहारे प्राइवेट मेडिकल स्टोर और लैब संचालक फलफूल रहे हैं। पिडिया बेलहरा के लोगों ने बुधवार को जब इसका विरोध ऐसे लोगों ने उन्हेें चुप कराने की भी कोशिश की। सीएचसी पहुंचे ग्राम ददरी हरदो निवासी रुद्रेश पांडेय ने बताया कि सीएचसी के बाहर मौजूद मेडिकल स्टोर के संचालकों और लैब मालिकों के एजेंट गेट से लेकर ओपीडी तक फैले रहते हैं। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसे अच्छे डॉक्टर को दिखाने का झांसा देकर अपनी सेटिंग वाली ओपीडी में लेकर पहुंच जाते हैं। यहां बेहतर उपचार के नाम पर बाहर की दवाइयां और जांच लिख दी जाती है। झिंगुरापार निवासी सुनील कुमार, रामबचन यादव ने बताया कि मलेरिया, टायफाइड आदि की जांच भी बाहर के लैब से ही कराने की सलाह दी जाती है।