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Sant Kabir Nagar News: शब्द ही हार है, शब्द ही जीत है, शब्द ही प्यार है और शब्द ही प्रीत
Sun, 31 Aug 2025 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:59 PM IST
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संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल सभागार में 150वीं मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। बतौर मुख्य अतिथि पवन श्रीवास्तव ने अपनी रचना ''शब्द ही हार है, शब्द ही जीत है, शब्द ही प्यार है और शब्द ही प्रीत है'' के जरिए गोष्ठी की शुरुआत की।
कवि ओम प्रकाश गौतम ने अपनी रचाना ''कहो बुजदिल हमें गद्दार बना दो मुझको, कौन है कौम का गमखार बना दो मुझको...'' सुनाकर वाहवाही लूटी। राधेश्याम मिश्र श्याम ने ''धरती की हरियाली को मत खत्म करो, श्याम हरे पेड़ों को काटना ठीक नहीं...'' सुनाकर धरती पर पेड़ों के महत्व को समझाया। हामिद खलीलाबादी ने मुझको चाहेगा दिल से कब कोई, मेरा अपना नहीं है जब कोई... सुनाकर जीवन की तन्हाई की ओर इशारा किया। कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने मतलबी खुद परस्ती से किनारा कर लिया हमने, अकेले ही निकलने का इरादा कर लिया हमने... सुनाकर स्वार्थी लोगों से बचकर रहने की सलाह दी।
मंच के उपाध्यक्ष सरदार हरिभजन सिंह ने रहनुमाएं वक्त फिर तेरी जरूरत आज है, सो चुकी इंसानियत वेदार दहशत आज है... सुनाया। वरिष्ठ कवि सूरज कुंवर सरस ने खप रहे पल विपल पारंपरिक भुगतान में, ऋतु कलाओं के मरूतमान है सुरीली तान में... सुनाया। इस अवसर पर गोष्ठी में शायर महजर खलीलाबादी, अवधेश पांडेय बादल, नरसिंह नारायण कमल, मुहम्मद अली, शिवा पांडेय, देवानंद बच्चन व अन्य ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
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कवि ओम प्रकाश गौतम ने अपनी रचाना ''कहो बुजदिल हमें गद्दार बना दो मुझको, कौन है कौम का गमखार बना दो मुझको...'' सुनाकर वाहवाही लूटी। राधेश्याम मिश्र श्याम ने ''धरती की हरियाली को मत खत्म करो, श्याम हरे पेड़ों को काटना ठीक नहीं...'' सुनाकर धरती पर पेड़ों के महत्व को समझाया। हामिद खलीलाबादी ने मुझको चाहेगा दिल से कब कोई, मेरा अपना नहीं है जब कोई... सुनाकर जीवन की तन्हाई की ओर इशारा किया। कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने मतलबी खुद परस्ती से किनारा कर लिया हमने, अकेले ही निकलने का इरादा कर लिया हमने... सुनाकर स्वार्थी लोगों से बचकर रहने की सलाह दी।
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मंच के उपाध्यक्ष सरदार हरिभजन सिंह ने रहनुमाएं वक्त फिर तेरी जरूरत आज है, सो चुकी इंसानियत वेदार दहशत आज है... सुनाया। वरिष्ठ कवि सूरज कुंवर सरस ने खप रहे पल विपल पारंपरिक भुगतान में, ऋतु कलाओं के मरूतमान है सुरीली तान में... सुनाया। इस अवसर पर गोष्ठी में शायर महजर खलीलाबादी, अवधेश पांडेय बादल, नरसिंह नारायण कमल, मुहम्मद अली, शिवा पांडेय, देवानंद बच्चन व अन्य ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
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