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Sant Kabir Nagar News: हरितालिका तीज पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
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पति की दीर्घायु होने की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सोमवार को हरितालिका तीज पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और पति के दीर्घायु होने की कामना की। इस दौरान शिव की पूजा-अर्चना की गई। हरितालिका तीज के दिन भोर में सहरी का सेवन करने के बाद सुहागिनों ने पति के दीर्घायु और कुंआरी कन्याओं ने मन वांछित वर की प्राप्ति के लिए दिनभर निर्जल व्रत रखा। शाम के समय शिव मंदिरों पर जाकर गौरीशंकर का फल फूल और सुहाग के वस्तु चूड़ी, सिंदूर, आलता आदि से पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद ब्राह्मणों को दान दिया गया। ज्वाला प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रखते हुए शिव की उपासना की थी और शिव को वर के रूप में प्राप्त किया था। उसी तरह सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। शिव ने पार्वती को पूर्व जन्म का स्मरण कराने के लिए यह व्रत रखा था। ऐसा विद्वानों का मानना है। व्रती महिलाएं निर्जल व्रत रखकर सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किया। हाथ में मेंहदी और पैरों में आलता लगाकर तामेश्वरनाथ, शहर के गोला बाजार स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, बेलहर स्थित शिव मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। मंगल गीत गाए। तीज व्रत के महिमा का बखान करते हुए घर पहुंची और अपने सास और बड़ों के पैर छूए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सोमवार को हरितालिका तीज पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और पति के दीर्घायु होने की कामना की। इस दौरान शिव की पूजा-अर्चना की गई। हरितालिका तीज के दिन भोर में सहरी का सेवन करने के बाद सुहागिनों ने पति के दीर्घायु और कुंआरी कन्याओं ने मन वांछित वर की प्राप्ति के लिए दिनभर निर्जल व्रत रखा। शाम के समय शिव मंदिरों पर जाकर गौरीशंकर का फल फूल और सुहाग के वस्तु चूड़ी, सिंदूर, आलता आदि से पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद ब्राह्मणों को दान दिया गया। ज्वाला प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रखते हुए शिव की उपासना की थी और शिव को वर के रूप में प्राप्त किया था। उसी तरह सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। शिव ने पार्वती को पूर्व जन्म का स्मरण कराने के लिए यह व्रत रखा था। ऐसा विद्वानों का मानना है। व्रती महिलाएं निर्जल व्रत रखकर सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किया। हाथ में मेंहदी और पैरों में आलता लगाकर तामेश्वरनाथ, शहर के गोला बाजार स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, बेलहर स्थित शिव मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। मंगल गीत गाए। तीज व्रत के महिमा का बखान करते हुए घर पहुंची और अपने सास और बड़ों के पैर छूए।