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आंसुओं से भीगी शहादत की गौरवगाथा
sant kabir nagar
Updated Tue, 20 Sep 2016 12:11 AM IST
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शहीद गणेश शंकर यादव के घरवाले रो-रोकर बेहाल हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के 12 ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमले में रविवार को शहीद हुए जवानों में क्षेत्र के घूरापाली गांव निवासी गणेश शंकर यादव भी हैं। गणेश की शहादत से क्षेत्र के लोग खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं लेकिन उनके बलिदान को लेकर घरवालों के साथ ही गांव के लोगों की आंखों में दर्द साफ दिख रहा है। सोमवार को डीएम सुरेश कुमार और एसपी शैलेश कुमार पांडेय भी शहीद के घर पहुंचे और सांत्वना दी।
गणेश शंकर यादव पुत्र दिवंगत देवीदीन यादव 1982 में पैदा हुए थे। दो भाइयों में वे दूसरे नंबर के थे। बचपन से वे सेना में जाकर देशसेवा के इच्छुक थे। इसी कारण इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर मार्च 2003 में वे बिहार रेजीमेंट में कुक के पद पर भर्ती हुए। 2013 में उसे आर्मी के सिपाही पद पर प्रोन्नति मिली। शहीद गणेश के बड़े भाई सुरेशचंद्र यादव ने बताया कि पिता और चाचा की मौत के बाद वह पहले फरवरी में और इसके बाद जुलाई में दस दिन के अवकाश पर घर आए थे। इस दौरान उनकी पोस्टिंग प. बंगाल में थी।
उन्हें क्या पता था कि भाई से उनकी यह आखिरी भेंट होगी। अभी 22 अगस्त को ही जम्मू कश्मीर के उड़ी में भाई की पोस्टिंग हुई थी। एक सप्ताह पूर्व काफी समय तक फोन पर बातचीत हुई थी। छोटी बहन रिंकू की शादी तय होने की सूचना देने के साथ ही उन्होंने कहा था कि जब वह घर आएगा, तभी शादी की तिथि तय होगी। भाई ने भी पूरा आश्वासन दिया था कि जल्द ही घर आएगा। इधर पांच दिनों से भाई से फोन पर बातचीत करने का काफी प्रयास किया गया लेकिन बात नही हो पाई। सोमवार को जब घर पर अफसर और मीडिया के लोग पहुंचे तो पर भाई के शहीद होने की सूचना मिली। जहां एक तरफ भाई की शहादत पर फख्र है, वहीं अपने कलेजे के टुकड़े छोटे भाई को खोने का गम भी है। पत्नी गुड़िया का रो-रो कर बेहाल हैं, जबकि वृद्ध मां कलावती देवी सदमे में हैं। शहीद के तीनों बच्चे मां को बिलखता देख गमगीन थे। गांव और क्षेत्र के लोग मौके पर जुटे थे।
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लोग शहीद की शहादत पर नाज तो कर रहे थे कि देश की इस सबसे बड़े आतंकी घटना की निंदा भी करते नहीं थक रहे थे। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि शहीद हुए गणेश शंकर यादव का सोमवार शाम शव वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचने की सूचना मिली है। मंगलवार सुबह पांच बजे वहां से आर्मी के अफसरों की देखरेख में शव शहीद के पैतृक गांव घूरापाली पहुंचेगा।
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गणेश शंकर यादव पुत्र दिवंगत देवीदीन यादव 1982 में पैदा हुए थे। दो भाइयों में वे दूसरे नंबर के थे। बचपन से वे सेना में जाकर देशसेवा के इच्छुक थे। इसी कारण इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर मार्च 2003 में वे बिहार रेजीमेंट में कुक के पद पर भर्ती हुए। 2013 में उसे आर्मी के सिपाही पद पर प्रोन्नति मिली। शहीद गणेश के बड़े भाई सुरेशचंद्र यादव ने बताया कि पिता और चाचा की मौत के बाद वह पहले फरवरी में और इसके बाद जुलाई में दस दिन के अवकाश पर घर आए थे। इस दौरान उनकी पोस्टिंग प. बंगाल में थी।
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उन्हें क्या पता था कि भाई से उनकी यह आखिरी भेंट होगी। अभी 22 अगस्त को ही जम्मू कश्मीर के उड़ी में भाई की पोस्टिंग हुई थी। एक सप्ताह पूर्व काफी समय तक फोन पर बातचीत हुई थी। छोटी बहन रिंकू की शादी तय होने की सूचना देने के साथ ही उन्होंने कहा था कि जब वह घर आएगा, तभी शादी की तिथि तय होगी। भाई ने भी पूरा आश्वासन दिया था कि जल्द ही घर आएगा। इधर पांच दिनों से भाई से फोन पर बातचीत करने का काफी प्रयास किया गया लेकिन बात नही हो पाई। सोमवार को जब घर पर अफसर और मीडिया के लोग पहुंचे तो पर भाई के शहीद होने की सूचना मिली। जहां एक तरफ भाई की शहादत पर फख्र है, वहीं अपने कलेजे के टुकड़े छोटे भाई को खोने का गम भी है। पत्नी गुड़िया का रो-रो कर बेहाल हैं, जबकि वृद्ध मां कलावती देवी सदमे में हैं। शहीद के तीनों बच्चे मां को बिलखता देख गमगीन थे। गांव और क्षेत्र के लोग मौके पर जुटे थे।
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लोग शहीद की शहादत पर नाज तो कर रहे थे कि देश की इस सबसे बड़े आतंकी घटना की निंदा भी करते नहीं थक रहे थे। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि शहीद हुए गणेश शंकर यादव का सोमवार शाम शव वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचने की सूचना मिली है। मंगलवार सुबह पांच बजे वहां से आर्मी के अफसरों की देखरेख में शव शहीद के पैतृक गांव घूरापाली पहुंचेगा।