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खुशियां आने से पहले ही परिवार में छाया मातम
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संतकबीरनगर। अश्वनी सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : KHALILABAD
खुशियां आने से पहले ही परिवार में छाया मातम
संतकबीरनगर। इकलौते बेटे अश्वनी की इसी माह होने वाली शादी की खुशी में पूरा परिवार तैयारियां कर रहा था। शाम को खलीलाबाद से मां-बाप बेटे संग सामान खरीद कर घर आए और फिर रात में बेटे की हत्या हो गई। घर में खुशियों के दस्तक देने से पहले ही इकलौता चिराग बुझ गया। पोस्टमार्टम हाउस पर टेंपो में गमगीन बैठे पिता को कुछ लोग संभाल रहे थे। पिता की जुबां से सिर्फ बेटे के खो देने का दर्द निकल रहा था। हत्यारोपियों को वहां मौजूद लोग कोस रहे थे।
नेहिया खुर्द बुजुर्ग गांव के 56 वर्षीय रामसिंह आईटीबीपी में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर छत्तीसगढ़ के रायपुर में तैनात हैं। बड़ी बेटी शशिकला की शादी हो चुकी है और ससुराल में है। इकलौते बेटे अश्वनी सिंह ने बी फार्मा की पढ़ाई की थी। हिमाचल में बेटा नौकरी भी करता था। पिता रामसिंह ने बताया कि बेटे की शादी बखिरा क्षेत्र के सिंहटीकर गांव में तय की थी। 21 नवंबर को तिलक और 28 नवंबर को शादी थी। शादी तय होने के बाद तीन महीने से बेटा घर पर ही रह रहा था। 25 अक्तूबर को वह भी बेटे की शादी की तैयारी के लिए छुट्टी घर आए हैं। पूरा परिवार बेटे की शादी की तैयारी कर रहा था। बेटा तिलक में भोजन बनाने के लिए कुक की बुकिंग के लिए घर से कह कर निकला और शाम को लौटा था। बताया कि कुक की बुकिंग नहीं हो पाई। शुक्रवार को फिर कुक की बुकिंग के लिए खलीलाबाद जाएगा। इधर रात करीब पौने नौ बजे बेटा छत पर मोबाइल से किसी से बातचीत कर रहा था। आरोप है कि उसी दौरान पट्टीदारी की महिला संजू सिंह अपने पति देवेंद्र सिंह और बेटे विशाल सिंह उर्फ मोहन सिंह के साथ मिलकर उसके इकलौते बेटे को मौत के घाट उतार दिया। यदि उसे पहले पता होता कि बेटे को विवाहिता प्रेम में फांस लिया है और फिर पति व बेटे के साथ मिलकर उसके घर के चिराग को बुझा देगी तो शायद वह बेटे के कदम को बहकने से पहले ही उसे संभाल लेता। अब पति-पत्नी के बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा। घटना से दंपती रो-रोकर बेहाल थे।
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संतकबीरनगर। इकलौते बेटे अश्वनी की इसी माह होने वाली शादी की खुशी में पूरा परिवार तैयारियां कर रहा था। शाम को खलीलाबाद से मां-बाप बेटे संग सामान खरीद कर घर आए और फिर रात में बेटे की हत्या हो गई। घर में खुशियों के दस्तक देने से पहले ही इकलौता चिराग बुझ गया। पोस्टमार्टम हाउस पर टेंपो में गमगीन बैठे पिता को कुछ लोग संभाल रहे थे। पिता की जुबां से सिर्फ बेटे के खो देने का दर्द निकल रहा था। हत्यारोपियों को वहां मौजूद लोग कोस रहे थे।
नेहिया खुर्द बुजुर्ग गांव के 56 वर्षीय रामसिंह आईटीबीपी में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर छत्तीसगढ़ के रायपुर में तैनात हैं। बड़ी बेटी शशिकला की शादी हो चुकी है और ससुराल में है। इकलौते बेटे अश्वनी सिंह ने बी फार्मा की पढ़ाई की थी। हिमाचल में बेटा नौकरी भी करता था। पिता रामसिंह ने बताया कि बेटे की शादी बखिरा क्षेत्र के सिंहटीकर गांव में तय की थी। 21 नवंबर को तिलक और 28 नवंबर को शादी थी। शादी तय होने के बाद तीन महीने से बेटा घर पर ही रह रहा था। 25 अक्तूबर को वह भी बेटे की शादी की तैयारी के लिए छुट्टी घर आए हैं। पूरा परिवार बेटे की शादी की तैयारी कर रहा था। बेटा तिलक में भोजन बनाने के लिए कुक की बुकिंग के लिए घर से कह कर निकला और शाम को लौटा था। बताया कि कुक की बुकिंग नहीं हो पाई। शुक्रवार को फिर कुक की बुकिंग के लिए खलीलाबाद जाएगा। इधर रात करीब पौने नौ बजे बेटा छत पर मोबाइल से किसी से बातचीत कर रहा था। आरोप है कि उसी दौरान पट्टीदारी की महिला संजू सिंह अपने पति देवेंद्र सिंह और बेटे विशाल सिंह उर्फ मोहन सिंह के साथ मिलकर उसके इकलौते बेटे को मौत के घाट उतार दिया। यदि उसे पहले पता होता कि बेटे को विवाहिता प्रेम में फांस लिया है और फिर पति व बेटे के साथ मिलकर उसके घर के चिराग को बुझा देगी तो शायद वह बेटे के कदम को बहकने से पहले ही उसे संभाल लेता। अब पति-पत्नी के बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा। घटना से दंपती रो-रोकर बेहाल थे।
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