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सूअरबाड़ों को मच्छरदानी से ढकें
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सूअरबाड़ों को मच्छरदानी से ढकें
संतकबीरनगर। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण के लिए सूअरबाड़ों को मच्छरदानी से ढकने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। सभी सूअरपालकों से कहा गया है कि वे सूअरबाड़ों और उसके आसपास साफ-सफाई रखें।
जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. मुबारक अली ने बताया कि जेई मच्छरों से लोगों में फैल रहा है। सूअर इसमें मुख्य भूमिका निभाते हैं। बताया कि वैसे यह बीमारी
प्रवासी पक्षियों के द्वारा भारत में आया। जब कोई मच्छर किसी बगुले को काटकर सूअर को काटता है तो वह उससे सूअर में चला जाता है। जेई वायरस से ग्रसित सूअर को काटकर जब कोई मच्छर किसी आदमी को काटता है तो वह आदमी जेई की चपेट में आ जाता है। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति इंसेफेलाइटिस से ग्रसित है और मच्छर उसे काटकर दूसरे किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके अंदर जेई नहीं फैलेगा। इसीलिए सूअरों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सूअरों को आबादी से बाहर रखने रखने के लिए कहा गया है। ताकि, मच्छरों की पहुंच उनके पास तक न रहे। सूअरपालकों की व्यवसाय बदलने के लिए काउंसिंलिंग की जा रही है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और विकास विभाग की ओर से संयुक्त प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूअरपालकों को निर्देश दिए गए है कि सूअरबाड़े को मच्छरदानी से ढक कर रखने के साथ आसपास एंटी लार्वा का छिड़काव करने को कहा गया है। जिले के नौ ब्लाकों में कुल 125 सूअरपालकाें के पास 1486 सूअर हैं।
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सूअरों को किया जा रहा है सुरक्षित: डॉ. मिश्रा
अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीके मिश्रा ने कहा कि सूअरपालकों और उनके पास मौजूद सूअरों की पूरी सूची तैयार की गई है। सूअरबाड़ों को मच्छरदानी लगाकर पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही साथ बाड़ों को आबादी से दूर कराया जा रहा है। वहां पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे कि संक्रामक रोग फैल न सके।
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संतकबीरनगर। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण के लिए सूअरबाड़ों को मच्छरदानी से ढकने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। सभी सूअरपालकों से कहा गया है कि वे सूअरबाड़ों और उसके आसपास साफ-सफाई रखें।
जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. मुबारक अली ने बताया कि जेई मच्छरों से लोगों में फैल रहा है। सूअर इसमें मुख्य भूमिका निभाते हैं। बताया कि वैसे यह बीमारी
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प्रवासी पक्षियों के द्वारा भारत में आया। जब कोई मच्छर किसी बगुले को काटकर सूअर को काटता है तो वह उससे सूअर में चला जाता है। जेई वायरस से ग्रसित सूअर को काटकर जब कोई मच्छर किसी आदमी को काटता है तो वह आदमी जेई की चपेट में आ जाता है। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति इंसेफेलाइटिस से ग्रसित है और मच्छर उसे काटकर दूसरे किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके अंदर जेई नहीं फैलेगा। इसीलिए सूअरों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सूअरों को आबादी से बाहर रखने रखने के लिए कहा गया है। ताकि, मच्छरों की पहुंच उनके पास तक न रहे। सूअरपालकों की व्यवसाय बदलने के लिए काउंसिंलिंग की जा रही है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और विकास विभाग की ओर से संयुक्त प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूअरपालकों को निर्देश दिए गए है कि सूअरबाड़े को मच्छरदानी से ढक कर रखने के साथ आसपास एंटी लार्वा का छिड़काव करने को कहा गया है। जिले के नौ ब्लाकों में कुल 125 सूअरपालकाें के पास 1486 सूअर हैं।
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सूअरों को किया जा रहा है सुरक्षित: डॉ. मिश्रा
अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीके मिश्रा ने कहा कि सूअरपालकों और उनके पास मौजूद सूअरों की पूरी सूची तैयार की गई है। सूअरबाड़ों को मच्छरदानी लगाकर पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही साथ बाड़ों को आबादी से दूर कराया जा रहा है। वहां पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे कि संक्रामक रोग फैल न सके।