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बारह बेड पर बाइस मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:17 PM IST
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मरीज परेशान।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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सरकारी अस्पतालों पर मरीजों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रमाण प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी के गृह क्षेत्र के सीएचसी मलौली पर गुरुवार को देखने को मिला। जहां उमस भरी गर्मी से बेहाल मरीज और उनके तिमारदार वार्ड में पसीना पोछते रहे। वही एक- एक बेड पर दो से तीन मरीज लिटाए गए थे। इतना ही नही डायरिया से पीड़ित मरीजों के परिजन बाहर से दवा खरीदने को भी मजबूर रहे।
इन दिनों क्षेत्र में डायरिया से पीड़ित होकर लोग अस्पताल पर लाइन लगाए हुए है। डायरिया और अन्य रोग से पीड़ित लोगों से सीएचसी का दोनो वार्ड भरा हुआ है। वार्ड संख्या एक में छह बेड पर जहां अनन्या पुत्री राजेश एक वर्ष, रेनू पत्नी अशोक 26 वर्ष, सीमा पत्नी आलोक 22 वर्ष, कमरुन्निशा पत्नी बरकत अली 32 वर्ष, अंशिका पुत्री संजय दो वर्ष समेत 10 मरीज भर्ती किए गए है। वही वार्ड नंबर दो में छह बेड पर 12 मरीज सुलाए गए थे। मरीजो के तीमारदारो का कहना था कि इस भीषण गर्मी में पंखा भी नही चल रहा है। उपर से एक-एक बेड पर दो से तीन लोगो का उपचार किया जा रहा है। आरोप था कि अस्पताल पर दवा भी नहीं मिल रही है। बाहर से दवा खरीदकर लानी पड रही है। इस संबंध में अधीक्षक वी के शुक्ला का कहना था कि मरीजो की संख्या अचानक बढ़ गई। बेड की अतिरिक्त व्यवस्था न होने के कारण कुछ देर के लिए ऐसा किया गया। अब एक बेड पर एक ही मरीज है। पंखा चल रहा था। लो लाइट जाने के बाद बंद हुआ था।
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इन दिनों क्षेत्र में डायरिया से पीड़ित होकर लोग अस्पताल पर लाइन लगाए हुए है। डायरिया और अन्य रोग से पीड़ित लोगों से सीएचसी का दोनो वार्ड भरा हुआ है। वार्ड संख्या एक में छह बेड पर जहां अनन्या पुत्री राजेश एक वर्ष, रेनू पत्नी अशोक 26 वर्ष, सीमा पत्नी आलोक 22 वर्ष, कमरुन्निशा पत्नी बरकत अली 32 वर्ष, अंशिका पुत्री संजय दो वर्ष समेत 10 मरीज भर्ती किए गए है। वही वार्ड नंबर दो में छह बेड पर 12 मरीज सुलाए गए थे। मरीजो के तीमारदारो का कहना था कि इस भीषण गर्मी में पंखा भी नही चल रहा है। उपर से एक-एक बेड पर दो से तीन लोगो का उपचार किया जा रहा है। आरोप था कि अस्पताल पर दवा भी नहीं मिल रही है। बाहर से दवा खरीदकर लानी पड रही है। इस संबंध में अधीक्षक वी के शुक्ला का कहना था कि मरीजो की संख्या अचानक बढ़ गई। बेड की अतिरिक्त व्यवस्था न होने के कारण कुछ देर के लिए ऐसा किया गया। अब एक बेड पर एक ही मरीज है। पंखा चल रहा था। लो लाइट जाने के बाद बंद हुआ था।
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