फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   There are no fewer cases of misuse of the act here also, they are facing humiliation

Sant Kabir Nagar News: यहां भी कम नहीं एक्ट के दुरुपयोग के मामले, झेलते रहे जिल्लत

Sat, 12 Aug 2023 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sat, 12 Aug 2023 11:56 PM IST
विज्ञापन
There are no fewer cases of misuse of the act here also, they are facing humiliation
केस की वजह से उठानी पड़ी सामाजिक और आर्थिक क्षति, बेटी-बेटों की शादी में आई रुकावट, कचहरी का चक्कर लगाकर घिस गईं एंड़ियां
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। उच्च न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट एवं एसएसटी एक्ट के केस में टिप्पणी की है। यहां तक कहा कि ये एक्ट वसूली का हथियार बन गए हैं। इन मामलों में आरोपी बनाए लोगों की कचहरी का चक्कर लगाते-लगाते एंड़ियां घिस जाती है और सामाजिक, आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। कोर्ट में सुनवाई होती और बचाव में अपनी बेगुनाही का साक्ष्य प्रस्तुत करने पर दोष मुक्त होते हैं। मॉनीटरिंग सेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सात माह में 43 मामलों में कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसमें 24 मामलों में साक्ष्य के अभाव में आरोपी दोषमुक्त किए गए हैं। दोषमुक्त हुए लोग आपबीती सुनाते दौरान भावुक हो गए। कहा कि केस की वजह से काफी सामाजिक और आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। समय से बेटी-बेटों की शादी तक नहीं कर पाए। बच्चों की पढाई भी प्रभावित हुई।
केस नंबर- 1
जेल गया बेटा तो बहनों की नही हो पाई शादी
धर्मसिंहवा क्षेत्र में वर्ष 2014 में चार वर्ष की बच्ची परिवार के साथ यज्ञ में गई थी। यज्ञ स्थल से ही बच्ची अपने परिजनों से बिछुड़ गई थी। परिजनों ने तलाश की, लेकिन नहीं मिली। दूसरे दिन गेहूं के खेत में बच्ची की लाश मिली। इस मामले में अज्ञात पर दुष्कर्म, हत्या कर शव छिपाने और पॉक्सों एक्ट का केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस मामले में बच्ची के गांव के युवक को आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया था। विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सात साल बाद चार अक्तूबर 2021 को आए कोर्ट फैसले में युवक दोषमुक्त हो गया। पीड़ित पिता ने बताया कि वह ठेला चला कर परिचार का खर्च चलाते हैं। बेटे को आरोपी बना कर पुलिस ने जेल भेजा और बेटा सात साल तक जेल में रहा। इसमें सामाजिक क्षति हुई। लोग तरह-तरह के ताने मारते थे। ठेला चला कर किसी तरह बेटे को छुड़ाने का प्रयत्न किया। इस केस का परिवार पर इतना तगड़ा असर रहा कि बच्चियों की शादी अभी तक नहीं कर पाया। बेटा जेल से छूटने के बाद मुंबई कमाने गया है। घर के नाम पर सिर्फ टिनशेड है। कोर्ट ने उसके बेटे के साथ न्याय किया।
विज्ञापन

केस नंबर- 2
खुद तंग हुए और परिवार को सुनने पड़े समाज के ताने
महुली क्षेत्र के एक गांव में छह जून 2007 को महिला से दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। पीड़ित भतीजे का आरोप था कि उसकी बड़ी मां को शराब पिलाकर आरोपी कहीं लेकर चले गए और दुष्कर्म किए। घटना को छिपाने के लिए महिला की हत्या कर दी। महुली पुलिस ने दुष्कर्म, हत्या के तहत चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। विवेचक ने दुष्कर्म और हत्या की धारा को विलोपित कर अपहरण और एससीएसटी में आरोप पत्र प्रेषित किया। सात जून 2023 को कोर्ट ने फैसला सुनाया और चारों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दियाा। इस मामले में आरोपी बनाए गए लोगों ने कहा कि केस दर्ज होने के बाद सामाजिक क्षति हुई। कचहरी का बार-बार चक्कर लगाना पड़ा। यहां तक की परिवार के लोगों को भी समाज के ताने सुनने पडे। केस लड़ने में काफी धन खर्च हुआ। कोर्ट ने न्याय दिया ,तब जाकर मन को सुकून मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस नंबर: 3
सात साल कैसे गुजरे, बयां करना करना कठिन
बखिरा क्षेत्र के बूढ़ी बेलहर में 13 मई 2016 को विवाहिता की संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। महराजगंज जिले के सिंधवारी हरिवंशपुर निवासी पीड़ित भाई सुनील कचेर ने पति प्रमोद, सास इसलावती, ससुर इंद्राज पर दहेज में एक लाख रुपये, बाइक व सोने की चेन न मिलने के कारण ज़हर देकर बहन वंदना को मार डालने का केस दर्ज कराया था। विवेचक ने दहेज हत्या की धारा हटाते हुए दहेज के लिए आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपपत्र दाखिल किया। करीब सात वर्ष मुकदमा चला। तीन अगस्त 2023 को कोर्ट ने फैसला सुनाया। साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपी दोषमुक्त कर दिए गए। आरोपी बनाए गए लोगों ने कहा कि इस केस में फंसने से पूरा परिवार तबाह हो गया। सामाजिक और आर्थिक क्षति हुई। कोर्ट पर पूरा भरोसा था और परिवार को न्याय मिला।

सात माह में दर्ज हुए 206 केस, 157 में आरोपपत्र प्रेषित
पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, एक जनवरी से 31 जुलाई तक पॉक्सो एक्ट के 42 केस दर्ज हुए। उसमें 36 में आरोपपत्र दाखिल हुआ। जबकि दो मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगी और चार मामलों की विवेचना चल रही है। इसी तरह एससीएसटी एक्ट के 117 मामले दर्ज हुए। उसमें 88 मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुआ। जबकि नौ मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगी और 20 मामलों की विवेचना प्रचलित है। इसी तरह दहेज हत्या के छह मामले दर्ज हुए है। चार मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुआ है। दो मामलों की विवेचना प्रचलित है। दहेज उत्पीड़न के 41 मामले दर्ज हुए। 29 मामले में आरोपपत्र प्रेषित हुआ। एक मामले में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित हुई। जबकि 11 मामले विचाराधीन हैं।

इस साल पॉक्सो एक्ट के 24 मामलों में हुआ फैसला
मानीटरिंग सेल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक जनवरी 2023 से अब तक कोर्ट से पॉक्सो एक्ट के 24 मामलों में फैसला आया। दो मामलों में दोष सिद्ध हुए हैं और 19 केस में आरोपी दोषमुक्त हुए। तीन मामलों में पत्रावली दाखिल दफ्तर हो गई। इसी तरह एससीएसटी एक्ट के नौ मामलों में फैसला आया। छह मामलों में दोष सिद्ध हुआ। जबकि दो मामलों में आरोपी दोष मुक्त हुए। एक फाइल दाखिल दफ्तर हुई। दहेज हत्या के आठ मामलों में निर्णय आया। छह मामले में आरोपी दोष सिद्ध पाए गए हैं। जबकि दो मामलों में आरोपी दोष मुक्त हुए। दहेज उत्पीड़न के दो मामलों में फैसला आया। एक में दोष सिद्ध और एक मामले में आरोपी दोषमुक्त हुए।



दहेज उत्पीड़न हो या एससीएसटी एक्ट या फिर पॉक्सों सभी में आरोपियों पर ही अपनी बेगुनाही साबित करने का भार होता है। इस एक्ट में शासन स्तर पर विचार करने की जरूरत है। जिससे दुरुपयोग न हो सके। वैसे, हाईकोर्ट ने इसको लेकर कड़ी टिप्पणी की और यहां तक कह दिया कि ये एक्ट वसूली का हथियार बन गए हैं। -राणा रविंद्र सिह, वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed