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Sant Kabir Nagar News: रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है
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इमाम कारी नसीरूद्दीन
सेमरियावां। माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का मंगलवार को शाम इफ्तार तक रहेगा। इसके बाद तीसरा अशरा शुरू हो जाएगा। यह अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। तीसरा अशरा रमजान के 21वें रोजे से शुरू होकर ईद का चांद नजर आने तक जारी रहता है।
इस महीने के तीसरे अशरे में खुदा की इबादत करने से जहन्नुम से निजात मिलती है। इसमें खुदा की इबादत करके राजी करें और जहन्नुम से निजात के लिए अल्लाह से दुआ करते रहना चाहिए। रमजान के तीसरे अशरे को काफी अहम माना गया है। यह रमजान के 21वें दिन से ईद का चांद नजर आने तक होता है। इस अशरे में ताक रातों में शब-ए-कद्र भी है। इसमें रात जागकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना चाहिए।
मननी मस्जिद इस्लामाबाद सेमरियावां के इमाम कारी नसीरूद्दीन ने बताया कि रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। तीसरा अशरा अल्लाह के करीब आने का सुनहरा मौका है। रात में नफिल नमाज और तहज्जुद नमाज ज्यादा से ज्यादा पढ़ें। इंसान अपने पिछले गुनाहों की माफी मांगे और आगे नेक रास्ते पर चलने के लिए दुआएं करें।
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आखिरी अशरा में शब-ए-कद्र तलाश करें
सेमरियावां। कारी नसीरूद्दीन ने बताया रमजान के आखिरी अशरा के ताक रात यानी विषम रातों में से एक रात शब-ए-कद्र (लैलुतलकद्र) है। शब-ए-कद्र रमजान के पवित्र महीने में आने वाली सबसे बरकत वाली रात है, जिसे ''तकदीर की रात'' भी कहा जाता है। इसी मुकद्दस रात में कुरान नाजिल हुआ। यह रात हजारों महीनों से बेहतर है। इस रात की गई इबादत, तौबा और दुआएं कुबूल होती ,हैं और गुनाह माफ होते हैं। रोजेदार पूरी रात जागकर नफिल नमाज (जैसे तहज्जुद), कुरान की तिलावत, जिक्र और दुआ में गुजारते हैं।
शब-ए-कद्र में पूरी रात रहमतों की बारिश होती है। शब-ए-कद्र 21वीं, 23वीं, 25वी, 27वीं या 29वीं रमजान की पांच रातों में से एक रात है। हजरत मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया है कि शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो। शब-ए-कद्र की रात रोजेदारों को खुदा की इबादत, जिक्र, तिलावत, तौबा में गुजारनी चाहिए।
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इस महीने के तीसरे अशरे में खुदा की इबादत करने से जहन्नुम से निजात मिलती है। इसमें खुदा की इबादत करके राजी करें और जहन्नुम से निजात के लिए अल्लाह से दुआ करते रहना चाहिए। रमजान के तीसरे अशरे को काफी अहम माना गया है। यह रमजान के 21वें दिन से ईद का चांद नजर आने तक होता है। इस अशरे में ताक रातों में शब-ए-कद्र भी है। इसमें रात जागकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना चाहिए।
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मननी मस्जिद इस्लामाबाद सेमरियावां के इमाम कारी नसीरूद्दीन ने बताया कि रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। तीसरा अशरा अल्लाह के करीब आने का सुनहरा मौका है। रात में नफिल नमाज और तहज्जुद नमाज ज्यादा से ज्यादा पढ़ें। इंसान अपने पिछले गुनाहों की माफी मांगे और आगे नेक रास्ते पर चलने के लिए दुआएं करें।
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आखिरी अशरा में शब-ए-कद्र तलाश करें
सेमरियावां। कारी नसीरूद्दीन ने बताया रमजान के आखिरी अशरा के ताक रात यानी विषम रातों में से एक रात शब-ए-कद्र (लैलुतलकद्र) है। शब-ए-कद्र रमजान के पवित्र महीने में आने वाली सबसे बरकत वाली रात है, जिसे ''तकदीर की रात'' भी कहा जाता है। इसी मुकद्दस रात में कुरान नाजिल हुआ। यह रात हजारों महीनों से बेहतर है। इस रात की गई इबादत, तौबा और दुआएं कुबूल होती ,हैं और गुनाह माफ होते हैं। रोजेदार पूरी रात जागकर नफिल नमाज (जैसे तहज्जुद), कुरान की तिलावत, जिक्र और दुआ में गुजारते हैं।
शब-ए-कद्र में पूरी रात रहमतों की बारिश होती है। शब-ए-कद्र 21वीं, 23वीं, 25वी, 27वीं या 29वीं रमजान की पांच रातों में से एक रात है। हजरत मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया है कि शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो। शब-ए-कद्र की रात रोजेदारों को खुदा की इबादत, जिक्र, तिलावत, तौबा में गुजारनी चाहिए।