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श्रीराम कथा के रसपान से कई जन्म के पाप होते हैं नष्ट : आचार्य विनय
Mon, 09 Dec 2024 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 09 Dec 2024 11:25 PM IST
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नाथनगर ब्लाॅक के भिटहां में सात दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन
संतकबीरनगर। नाथनगर क्षेत्र के भिटहां में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा में कथावाचक आचार्य विनय ओझा ने कहा कि प्रभु श्रीराम के स्मरण और कथा के रसपान से जन्म-जन्मांतर के विकार नष्ट होते हैं। सभी पापों से मुक्ति मिलती है। कथा वाचक ने कहा कि गंगा में स्नान करने से मन स्वच्छ होता है। संतों का समाज चलता फिरता प्रयागराज है। इनके सत्संग सुनने को मिल जाएं तो सारे कष्ट और दोष दूर हो जाते हैं।
आचार्य विनय ओझा ने मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण कर शिव बरात की कथा सुनाई। कहा कि नारद को जैसे ही पता लगा कि राजा हिमाचल के घर पार्वती का जन्म हुआ है, तो वह राजा के पास पहुंच गए। नारद ने जगतजननी को प्रणाम किया। इसके बाद राजा को बता दिया था कि पार्वती तपस्या करें तो भगवान शंकर प्राप्त हो सकते हैं। राजा चाहते थे कि बेटी के जीवन में कोई कष्ट नहीं आए, वह बेटी की उम्र का वास्ता देकर नारद को मनाने लगे।
कथा व्यास ने शिव और पार्वती के विवाह से जुड़े सभी प्रसंग सुनाए। शिवजी की जटाओं का मुकुट बनाकर सांपों का मौर सजाया गया। शिवजी ने सांपों के ही कुंडल व कंगन पहनें। शरीर व विभूति रमाई और वस्त्र की जगह बाघ का खाल लपेटकर बरात लेकर पहुंचे। भगवान शिव के इस रूप में देखने के लिए अनेक देवी-देवता पहुंचे थे। इस दौरान डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, रत्नेश चतुर्वेदी, मायाराम पाठक, अनिल मिश्रा समेत अन्य मौजूद रहे।
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संतकबीरनगर। नाथनगर क्षेत्र के भिटहां में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा में कथावाचक आचार्य विनय ओझा ने कहा कि प्रभु श्रीराम के स्मरण और कथा के रसपान से जन्म-जन्मांतर के विकार नष्ट होते हैं। सभी पापों से मुक्ति मिलती है। कथा वाचक ने कहा कि गंगा में स्नान करने से मन स्वच्छ होता है। संतों का समाज चलता फिरता प्रयागराज है। इनके सत्संग सुनने को मिल जाएं तो सारे कष्ट और दोष दूर हो जाते हैं।
आचार्य विनय ओझा ने मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण कर शिव बरात की कथा सुनाई। कहा कि नारद को जैसे ही पता लगा कि राजा हिमाचल के घर पार्वती का जन्म हुआ है, तो वह राजा के पास पहुंच गए। नारद ने जगतजननी को प्रणाम किया। इसके बाद राजा को बता दिया था कि पार्वती तपस्या करें तो भगवान शंकर प्राप्त हो सकते हैं। राजा चाहते थे कि बेटी के जीवन में कोई कष्ट नहीं आए, वह बेटी की उम्र का वास्ता देकर नारद को मनाने लगे।
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कथा व्यास ने शिव और पार्वती के विवाह से जुड़े सभी प्रसंग सुनाए। शिवजी की जटाओं का मुकुट बनाकर सांपों का मौर सजाया गया। शिवजी ने सांपों के ही कुंडल व कंगन पहनें। शरीर व विभूति रमाई और वस्त्र की जगह बाघ का खाल लपेटकर बरात लेकर पहुंचे। भगवान शिव के इस रूप में देखने के लिए अनेक देवी-देवता पहुंचे थे। इस दौरान डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, रत्नेश चतुर्वेदी, मायाराम पाठक, अनिल मिश्रा समेत अन्य मौजूद रहे।
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