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एनआईसी ने तैयार किया भूलेख का नया सॉफ्टवेयर
वीरेंद्र यादव/sant kabir nagar
Updated Fri, 26 Aug 2016 11:11 PM IST
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खतौनी प्राप्त करने के लिए अब लोगों को अनावश्यक रूप से भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। इसके लिए एनआईसी एनआईसी ने भूलेख का नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है। जिसमें तहत अब तहसील स्तर पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों एवं लिंक ऑफिसर के डिजिटल हस्ताक्षर ऑनलाइन कर दिए गए हैं। साथ ही मास्टर डाटा की शुद्धता व जंक डाटा का सत्यापन कराकर डाटा कनर्वजन के पश्चात क्लाउड पर अपलोड कर दिया गया है।
जिले के खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के 632, मेंहदावल तहसील क्षेत्र के 522 व धनघटा तहसील क्षेत्र के 579 राजस्व गांवों की खतौनी एनआईसी द्वारा विकसित नए साफ्टवेयर पर लोड की गई है। तहसीलों के कम्प्यूटर केंद्र में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो, सहायक रजिस्ट्रार कानूूनगो के डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणित किए गए है। मास्टर डाटा में जनपद, तहसील, परगना, ग्राम के नाम में अशुद्धियों को ठीक कर लिया गया है। तहसील में जितने भी राजस्व ग्राम है, उनकी मैपिंग जनगणना 2011 कोड के साथ कर ली गई है। नए सॉफ्टवेयर के माध्यम से जो भी जंक डाटा प्राप्त हुआ था, उसका पूर्णरूपेण सत्यापन तहसीलों द्वारा कराया गया है।
तहसील एडमिन, तहसील म्यूटेशन एवं तहसील रिपोर्ट हेतु यूजर किस-किस अधिकारी-कर्मचारी को बनाया गया है, उसे तय कर लिया गया है। सभी के डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिए गए है। तय किए गए अधिकारी व कम्प्यूटर संचालन करने वाले लेखपाल की अनुपस्थिति में आन लाइन भूलेख कार्य में बाधा उत्पन्न न हो, इसलिए लिंक आफीसर नामित कर दिए गए है। सभी नामित लिंक आफीसर के जिला स्तरीय एनआईसी कार्यालय के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर बनवा लिए गए है।
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जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मोहम्मद उमर फारूख ने बताया कि सभी तैयारी पूरी की ली गई है। जबकि जिलाधिकारी डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि अब खतौनी के लिए लोगों को परेशानी नहीं होगी, बल्कि आनलाइन खतौनी उन्हें कहीं से भी उपलब्ध हो सकेगी।
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जिले के खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के 632, मेंहदावल तहसील क्षेत्र के 522 व धनघटा तहसील क्षेत्र के 579 राजस्व गांवों की खतौनी एनआईसी द्वारा विकसित नए साफ्टवेयर पर लोड की गई है। तहसीलों के कम्प्यूटर केंद्र में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो, सहायक रजिस्ट्रार कानूूनगो के डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणित किए गए है। मास्टर डाटा में जनपद, तहसील, परगना, ग्राम के नाम में अशुद्धियों को ठीक कर लिया गया है। तहसील में जितने भी राजस्व ग्राम है, उनकी मैपिंग जनगणना 2011 कोड के साथ कर ली गई है। नए सॉफ्टवेयर के माध्यम से जो भी जंक डाटा प्राप्त हुआ था, उसका पूर्णरूपेण सत्यापन तहसीलों द्वारा कराया गया है।
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तहसील एडमिन, तहसील म्यूटेशन एवं तहसील रिपोर्ट हेतु यूजर किस-किस अधिकारी-कर्मचारी को बनाया गया है, उसे तय कर लिया गया है। सभी के डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिए गए है। तय किए गए अधिकारी व कम्प्यूटर संचालन करने वाले लेखपाल की अनुपस्थिति में आन लाइन भूलेख कार्य में बाधा उत्पन्न न हो, इसलिए लिंक आफीसर नामित कर दिए गए है। सभी नामित लिंक आफीसर के जिला स्तरीय एनआईसी कार्यालय के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर बनवा लिए गए है।
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जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मोहम्मद उमर फारूख ने बताया कि सभी तैयारी पूरी की ली गई है। जबकि जिलाधिकारी डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि अब खतौनी के लिए लोगों को परेशानी नहीं होगी, बल्कि आनलाइन खतौनी उन्हें कहीं से भी उपलब्ध हो सकेगी।