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Sant Kabir Nagar News: ग्वालियर से शुरू हुई थी निवेश के नाम पर ठगी करने वाले प्रेमी युगल की प्रेम कहानी
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हिमाचल से धनंजय ने शुरू किया था फर्जी निवेश का खेल
कुशीनगर में करोड़ों की ठगी के बाद ग्वालियर बना ठिकाना
प्रेम संबंध का विरोध होने पर सहजनवा पहुंचे, महुली में दफ्तर खोलकर 250 से अधिक लोगों को बनाया शिकार
दिवाकर शुक्ल
संतकबीरनगर। शेयर ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में जेल भेजे गए धनंजय शुक्ला और रजनी प्रजापति की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों की मुलाकात के बाद शुरू हुई प्रेम कहानी धीरे-धीरे कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क में बदल गई, जिसने कई जिलों में लोगों को ऊंचे मुनाफे का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये जुटाए।
जांच में सामने आया है कि धनंजय शुक्ला बचपन से ही काफी शातिर था। उसके सपने काफी ऊंचे थे। उसने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में निवेश संबंधी गतिविधियों के जरिये लोगों को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद पटना में ठिकाना बनाया। वहां से वह अपने गांव नीली बत्ती की गाड़ी में आने लगा। कुशीनगर में नौकरी के नाम पर एवं जाली नियुक्ति पत्र देकर करीब 15 करोड़ रुपये ठगे। इसके बाद उसने अपना ठिकाना मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बनाया।
इसी दौरान दसवीं कक्षा पास धनंजय की मुलाकात एमएससी पोस्ट ग्रेजुएट रजनी प्रजापति से हुई। धनंजय के शौक काफी ऊंचे थे और वह लग्जरी लाइफ जी रहा था। इसी बीच दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम संबंध हो गए। बताया जा रहा है कि जब रजनी के परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध किया। इसके बाद दोनों ने गोरखपुर के सहजनवां क्षेत्र में डेरा जमाया।
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सहजनवां से महुली तक फैलाया नेटवर्क
सहजनवां में दोनों ने अपना जाल फैलाना शुरू किया। इसमें कुछ लोगों ने उनकी मदद की। वहां कुछ समय बाद गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे। स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने और लोगों की निगाहें उन पर टिकने लगीं तो उन्होंने नया ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया। इसके बाद संतकबीरनगर के महुली क्षेत्र को अपने धंधे का केंद्र बनाया।
महुली में कार्यालय खोलकर निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग, ऑनलाइन निवेश और उच्च रिटर्न का सपना दिखाया। लोगों को बताया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित कंपनियों और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में लगाया जा रहा है। निवेशकों को मोबाइल एप और वर्चुअल वॉलेट के माध्यम से बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाकर भरोसा दिलाया।
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ऊंचे मुनाफे के लालच में फंसते गए लोग
जांच में सामने आया है कि निवेशकों को छह से 40 प्रतिशत तक रिटर्न और नए सदस्य जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन का लालच दिया जाता था। शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान कर विश्वास बनाया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी, जमीन बेचकर मिले रुपये और उधार लेकर भी निवेश कर दिया।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिये 250 से अधिक लोगों से 22 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई। जब निवेशकों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया तो कथित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने लगा।
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संपत्तियों और खातों को खंगाल रही पुलिस
मामले में मुख्य आरोपी दंपती जेल में हैं। पुलिस अब उनके सहयोगियों, बैंक खातों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन-किन खातों में भेजी गईं और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं। पुलिस ने अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में स्थित एक मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी संपत्तियां ठगी की रकम से खरीदी गई मिलेंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अभी और खुलासों की उम्मीद
जांच अधिकारियों का मानना है कि नेटवर्क का दायरा शुरुआती अनुमान से बड़ा हो सकता है। बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड की जांच से कई और नाम सामने आने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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कुशीनगर में करोड़ों की ठगी के बाद ग्वालियर बना ठिकाना
प्रेम संबंध का विरोध होने पर सहजनवा पहुंचे, महुली में दफ्तर खोलकर 250 से अधिक लोगों को बनाया शिकार
दिवाकर शुक्ल
संतकबीरनगर। शेयर ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में जेल भेजे गए धनंजय शुक्ला और रजनी प्रजापति की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों की मुलाकात के बाद शुरू हुई प्रेम कहानी धीरे-धीरे कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क में बदल गई, जिसने कई जिलों में लोगों को ऊंचे मुनाफे का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये जुटाए।
जांच में सामने आया है कि धनंजय शुक्ला बचपन से ही काफी शातिर था। उसके सपने काफी ऊंचे थे। उसने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में निवेश संबंधी गतिविधियों के जरिये लोगों को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद पटना में ठिकाना बनाया। वहां से वह अपने गांव नीली बत्ती की गाड़ी में आने लगा। कुशीनगर में नौकरी के नाम पर एवं जाली नियुक्ति पत्र देकर करीब 15 करोड़ रुपये ठगे। इसके बाद उसने अपना ठिकाना मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बनाया।
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इसी दौरान दसवीं कक्षा पास धनंजय की मुलाकात एमएससी पोस्ट ग्रेजुएट रजनी प्रजापति से हुई। धनंजय के शौक काफी ऊंचे थे और वह लग्जरी लाइफ जी रहा था। इसी बीच दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम संबंध हो गए। बताया जा रहा है कि जब रजनी के परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध किया। इसके बाद दोनों ने गोरखपुर के सहजनवां क्षेत्र में डेरा जमाया।
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सहजनवां से महुली तक फैलाया नेटवर्क
सहजनवां में दोनों ने अपना जाल फैलाना शुरू किया। इसमें कुछ लोगों ने उनकी मदद की। वहां कुछ समय बाद गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे। स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने और लोगों की निगाहें उन पर टिकने लगीं तो उन्होंने नया ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया। इसके बाद संतकबीरनगर के महुली क्षेत्र को अपने धंधे का केंद्र बनाया।
महुली में कार्यालय खोलकर निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग, ऑनलाइन निवेश और उच्च रिटर्न का सपना दिखाया। लोगों को बताया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित कंपनियों और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में लगाया जा रहा है। निवेशकों को मोबाइल एप और वर्चुअल वॉलेट के माध्यम से बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाकर भरोसा दिलाया।
ऊंचे मुनाफे के लालच में फंसते गए लोग
जांच में सामने आया है कि निवेशकों को छह से 40 प्रतिशत तक रिटर्न और नए सदस्य जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन का लालच दिया जाता था। शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान कर विश्वास बनाया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी, जमीन बेचकर मिले रुपये और उधार लेकर भी निवेश कर दिया।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिये 250 से अधिक लोगों से 22 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई। जब निवेशकों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया तो कथित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने लगा।
संपत्तियों और खातों को खंगाल रही पुलिस
मामले में मुख्य आरोपी दंपती जेल में हैं। पुलिस अब उनके सहयोगियों, बैंक खातों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन-किन खातों में भेजी गईं और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं। पुलिस ने अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में स्थित एक मकान को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी संपत्तियां ठगी की रकम से खरीदी गई मिलेंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अभी और खुलासों की उम्मीद
जांच अधिकारियों का मानना है कि नेटवर्क का दायरा शुरुआती अनुमान से बड़ा हो सकता है। बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड की जांच से कई और नाम सामने आने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।