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Sant Kabir Nagar News: झांकी में बालकृष्ण की छवि देख सम्मोहित हुए श्रद्धालु
Sun, 02 Nov 2025 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:27 PM IST
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हरदी गांव मेें कथा कहते हुए आचार्य चन्द्रशेखर पाठक । संवाद
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तिघरा। कथावाचक आचार्य चन्द्रशेखर पाठक में बघौली क्षेत्र के हरदी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बाल कृष्ण की झांकी के साथ ही भगवान कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग प्रस्तुत किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने बालकृष्ण की छवि देखी तो मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके।
कथा के मुख्य यजमान सुरेश चन्द्र त्रिपाठी, अद्या प्रसाद त्रिपाठी व घनश्याम मणि त्रिपाठी को सपत्नीक कथा रस का पान कराते हुए आचार्य पाठक ने कहा कि कहा गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। इसके लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धज कर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। उनकी बांसुरी की सुरीली धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं।
उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। श्रीकृष्ण ने अपने हजारों रूप धारण कर वहां मौजूद सभी गोपियों के साथ महारास रचाया, लेकिन एक क्षण के लिए भी उनके मन में वासना का प्रवेश नहीं हुआ। वहीं रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सब राजाओं को जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया।
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उस समय द्वारकापुरी के घर-घर उत्सव मनाया जाने लगा। जहां-तहां रुक्मिणी हरण की गाथा गाई जाने लगी। उसे सुनकर राजा और राज कन्याएं अत्यंत विस्मित हो गई। महाराज भगवती लक्ष्मी को रुक्मिणी के रूप में साक्षात लक्ष्मी पति भगवान श्रीकृष्ण के साथ देखकर द्वारकावासी परम आनंदित हो उठे।
इस दौरान सुधीर मणि त्रिपाठी, दिवाकर, सुरेश के साथ ही अन्य लोग उपस्थित रहे।
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कथा के मुख्य यजमान सुरेश चन्द्र त्रिपाठी, अद्या प्रसाद त्रिपाठी व घनश्याम मणि त्रिपाठी को सपत्नीक कथा रस का पान कराते हुए आचार्य पाठक ने कहा कि कहा गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। इसके लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धज कर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। उनकी बांसुरी की सुरीली धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं।
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उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। श्रीकृष्ण ने अपने हजारों रूप धारण कर वहां मौजूद सभी गोपियों के साथ महारास रचाया, लेकिन एक क्षण के लिए भी उनके मन में वासना का प्रवेश नहीं हुआ। वहीं रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सब राजाओं को जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया।
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उस समय द्वारकापुरी के घर-घर उत्सव मनाया जाने लगा। जहां-तहां रुक्मिणी हरण की गाथा गाई जाने लगी। उसे सुनकर राजा और राज कन्याएं अत्यंत विस्मित हो गई। महाराज भगवती लक्ष्मी को रुक्मिणी के रूप में साक्षात लक्ष्मी पति भगवान श्रीकृष्ण के साथ देखकर द्वारकावासी परम आनंदित हो उठे।
इस दौरान सुधीर मणि त्रिपाठी, दिवाकर, सुरेश के साथ ही अन्य लोग उपस्थित रहे।