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सीबीआई टीम ने चार को तलब किया
अमर उजाला ब्यूरो/ संतकबीरनगर
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:27 PM IST
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सूत्रों की मानें तो सीबीआई टीम ने 27 जनवरी को डीआरडीए के असिस्टेंट इंजीनियर सुशील और सांथा ब्लॉक के जूनियर इंजीनियर रामअचल को तथा 29 जनवरी को पीडब्लूडी के जूनियर इंजीनियर पारसनाथ और सांथा ब्लॉक के हेड क्लर्क उदय शंकर पांडेय को देहरादून कार्यालय पूछताछ के लिए बुलाया है।
बगैर अनुमोदन के लगभग छह करोड़ की लागत से मनरेगा कार्य कार्य कराके उसका भुगतान करने के मामले की जांच सीबीआई टीम फरवरी 2014 से कर रही है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई टीम दिसंबर 2015 में जब जांच करने आई थी तो जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से यह सूचना मांगी थी कि वित्तीय वर्ष 2007 से 2011 के बीच मनरेगा की कितनी कार्य योजनाएं जिला पंचायत से अनुुमोदित हुई थी।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने सीबीआई को भेजी सूचना में यह स्पष्ट किया है कि उस दौरान मनरेेगा की कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित नहीं हुई है। सीबीआई ने बीडीओ सांथा से भी उस बीच में मनरेगा से हुए कार्यों की कार्य योजना मांगी थी। बीडीओ सांथा ने ब्लॉक मुख्यालय पर कार्य योजना उपलब्ध नहीं होने की सूचना दी है। मनरेगा से कार्य कराने की जो गाइड लाइन है, उसके मुताबिक ग्राम पंचायतें खुली बैठक में कार्य योजना तैयार करके अनुमोदित करती है और फिर क्षेत्र पंचायत को भेजती है। क्षेत्र पंचायतें अपनी बैठकों में ग्राम पंचायत की कार्य योजना को सम्मिलित करते हुए अनुमोदित करती है।ं
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जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली बैठकों में उस कार्य योजना पर विचार विमर्श होता है फिर जिला पंचायत से अनुमोदित होती है। अब सवाल यह है कि यदि कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित नहीं हुई तो आखिर कार्य और भुगतान कैसे हो गया। उस दौरान भुगतान के लिए पत्रावली परियोजना निदेशक स्तर से चलती थी और फिर सीडीओ के माध्यम से डीएम तक पहुंचती थी।
सीडीओ और डीएम के संयुक्त हस्ताक्षर के बाद धन ब्लॉकों को भेजा जाता था, फिर बीडीओ के हस्ताक्षर से चेक के जरिए भुगतान होता था। वैसे मौजूदा समय में एफटीओ यानि फंड ट्रांसफर ऑर्डर के माध्यम से भुगतान होने की व्यवस्था कर दी गई है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि अभिलेख में वर्ष 2007 से 2011 के बीच सांथा ब्लॉक की कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित अंकित नहीं है। जबकि बीडीओ राजाराम यादव ने बताया कि उस बीच की कोई कार्य योजना ब्लॉक मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं है। वैसे सीबीआई ने जो सूचना मांगी थी उसे भेज दी गई है।
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बगैर अनुमोदन के लगभग छह करोड़ की लागत से मनरेगा कार्य कार्य कराके उसका भुगतान करने के मामले की जांच सीबीआई टीम फरवरी 2014 से कर रही है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई टीम दिसंबर 2015 में जब जांच करने आई थी तो जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से यह सूचना मांगी थी कि वित्तीय वर्ष 2007 से 2011 के बीच मनरेगा की कितनी कार्य योजनाएं जिला पंचायत से अनुुमोदित हुई थी।
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जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने सीबीआई को भेजी सूचना में यह स्पष्ट किया है कि उस दौरान मनरेेगा की कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित नहीं हुई है। सीबीआई ने बीडीओ सांथा से भी उस बीच में मनरेगा से हुए कार्यों की कार्य योजना मांगी थी। बीडीओ सांथा ने ब्लॉक मुख्यालय पर कार्य योजना उपलब्ध नहीं होने की सूचना दी है। मनरेगा से कार्य कराने की जो गाइड लाइन है, उसके मुताबिक ग्राम पंचायतें खुली बैठक में कार्य योजना तैयार करके अनुमोदित करती है और फिर क्षेत्र पंचायत को भेजती है। क्षेत्र पंचायतें अपनी बैठकों में ग्राम पंचायत की कार्य योजना को सम्मिलित करते हुए अनुमोदित करती है।ं
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जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली बैठकों में उस कार्य योजना पर विचार विमर्श होता है फिर जिला पंचायत से अनुमोदित होती है। अब सवाल यह है कि यदि कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित नहीं हुई तो आखिर कार्य और भुगतान कैसे हो गया। उस दौरान भुगतान के लिए पत्रावली परियोजना निदेशक स्तर से चलती थी और फिर सीडीओ के माध्यम से डीएम तक पहुंचती थी।
सीडीओ और डीएम के संयुक्त हस्ताक्षर के बाद धन ब्लॉकों को भेजा जाता था, फिर बीडीओ के हस्ताक्षर से चेक के जरिए भुगतान होता था। वैसे मौजूदा समय में एफटीओ यानि फंड ट्रांसफर ऑर्डर के माध्यम से भुगतान होने की व्यवस्था कर दी गई है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि अभिलेख में वर्ष 2007 से 2011 के बीच सांथा ब्लॉक की कोई कार्य योजना जिला पंचायत से अनुमोदित अंकित नहीं है। जबकि बीडीओ राजाराम यादव ने बताया कि उस बीच की कोई कार्य योजना ब्लॉक मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं है। वैसे सीबीआई ने जो सूचना मांगी थी उसे भेज दी गई है।