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यंत्र बनाने की दिशा में बढ़ाया कदम
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Mon, 09 May 2016 11:56 PM IST
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तबाही से आधे घंटे पहले अलार्म दे भूकंप।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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धरती के डोलने से पहले ही भूकंप के संकेत को भांप लेने के जानवरों के कौशल से प्रेरित होकर दसवीं पास विकास ने ऐसे यंत्र की ईजाद की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे उसे भूकंप का पूर्व अनुमान लगा लेने का भरोसा है। विकास का दावा है कि यह यंत्र लगभग आधे घंटे पहले भूकंप आने का संकेत देकर सचेत कर सकता है।
गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने इस यंत्र को वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की पहल की है। अगर वैज्ञानिक पड़ताल में यंत्र कामयाब साबित होता है तो यह कोशिश निश्चित तौर पर भूकंप से तबाही थामने की दिशा में बड़ा कदम होगी।
अपने सपनों को यंत्र की शक्ल देने की करामात की है तिलौरा गांव (सहजनवां) के फूलचंद प्रसाद के बेटे विकास कुमार ने। साल 2014 में फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल पास करने के बाद घर की तंगहाली के कारण पढ़ाई छोड़कर बिजली मैकेनिक के रूप में काम कर रहे विकास का कहना है कि कक्षा चार की पढ़ाई के दौरान भूकंप से होने वाले नुकसान की खबरें सुनकर मन में पूर्वानुमान बता सकने वाले यंत्र की खोज की ललक जगी थी। बुजुर्गों की कहानी से पता चला कि बिल्ली और कुत्तों के शरीर में इस तरह की संवेदनशीलता होती है कि वे कंपन के खतरे को पहले ही भांप लेते हैं। इसके बाद 2008 से इसके लिए कोशिश शुरू की और शिक्षक की मदद से बिल्लियों के मस्तिष्क पर अध्ययन करने का अवसर मिला तो स्पष्ट हुआ कि बिल्ली के मस्तिष्क में 30 बाल जैसी बारीक शिराओं और धमनियों का तंत्र होता है, जो भूगर्भीय कंपन को पहले ही पकड़ने में मददगार हो जाता है।
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इसी को आधार बनाकर तांबे के तारों को बाल जैसा महीन करके 30 तारों का ऐसा गोलाकार सर्किट तैयार किया जो आपस में सटे नहीं लेकिन तरंग या आसपास की हलचल से उनके बीच चुंबकीय क्षेत्र विकसित होकर इनके बीच में मौजूद सुई को हिलाता है और उससे (सुई से) जुड़ी लाइट जलने लगती है। विकास का दावा है कि भूकंप के पिछले दो मौकों पर उसने इस यंत्र को बखूबी परखा और आधे घंटे पहले आसपास के लोगों को सचेत किया था। दावा यह भी है कि 30 तारों के इस तंत्र में ऐसी हलचल के संकेत पर उस दिशा का तार ठीक वैसे ही टूट जाता है, जिस दिशा में भूकंप संभावित है और इससे कनेक्ट लाइट जलने लगती है।
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कोट::::
भूकंप के पूर्वानुमान वाले यंत्र की चर्चा सुनकर बड़गों गांव (संतकबीरनगर) जाकर वहां अपनी ननिहाल में मौजूद विकास कुमार से मुलाकात की। पहली नजर में उसकी थ्योरी और यंत्र में संकेतांक की गुंजाइश दिखी लेकिन अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञ जांच के लिए विकास को यंत्र के साथ एमएमएमयूटी के डिजाइन इनोवेशन एंड इन्क्यूवेशन सेेंटर में आने के लिए कहा है। वहां परखने के साथ सुधार की गुंजाइश देखी जाएगी। कामयाबी होने पर इसे विकास के नाम से पेटेंट कराया जाएगा।
- ओंकार सिंह, वीसी, एमएमएमयूटी
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प्रेरक की भूमिका में रहे शिक्षक बृजराज
सहजनवां। भूकंप का पूर्वानुमान बताने वाले यंत्र की ईजाद का दावा कर रहे विकास कुमार के यंत्र तक पहुंचने के सफर में बड़ी प्रेरणा भरोहिया निवासी एवं सजहनवां के नवीन बाल शिक्षा निकेतन के प्रबंधक स्वर्गीय बृजराज मिश्र की है। प्रबंधक से पहले लंबे समय शिक्षक की भूमिका में रहे बृजराज मिश्र ने विकास के मन में आए इस ख्याल को न सिर्फ प्रोत्साहित किया बल्कि स्कूल परिसर में जगह संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिल्ली के मस्तिष्क के अध्ययन के लिए उसे दूसरे शहरों तक लेकर भी गए थे। विकास अपने अब तक के काम का सारा श्रेय उन्हीं को देता है।
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गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने इस यंत्र को वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की पहल की है। अगर वैज्ञानिक पड़ताल में यंत्र कामयाब साबित होता है तो यह कोशिश निश्चित तौर पर भूकंप से तबाही थामने की दिशा में बड़ा कदम होगी।
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अपने सपनों को यंत्र की शक्ल देने की करामात की है तिलौरा गांव (सहजनवां) के फूलचंद प्रसाद के बेटे विकास कुमार ने। साल 2014 में फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल पास करने के बाद घर की तंगहाली के कारण पढ़ाई छोड़कर बिजली मैकेनिक के रूप में काम कर रहे विकास का कहना है कि कक्षा चार की पढ़ाई के दौरान भूकंप से होने वाले नुकसान की खबरें सुनकर मन में पूर्वानुमान बता सकने वाले यंत्र की खोज की ललक जगी थी। बुजुर्गों की कहानी से पता चला कि बिल्ली और कुत्तों के शरीर में इस तरह की संवेदनशीलता होती है कि वे कंपन के खतरे को पहले ही भांप लेते हैं। इसके बाद 2008 से इसके लिए कोशिश शुरू की और शिक्षक की मदद से बिल्लियों के मस्तिष्क पर अध्ययन करने का अवसर मिला तो स्पष्ट हुआ कि बिल्ली के मस्तिष्क में 30 बाल जैसी बारीक शिराओं और धमनियों का तंत्र होता है, जो भूगर्भीय कंपन को पहले ही पकड़ने में मददगार हो जाता है।
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इसी को आधार बनाकर तांबे के तारों को बाल जैसा महीन करके 30 तारों का ऐसा गोलाकार सर्किट तैयार किया जो आपस में सटे नहीं लेकिन तरंग या आसपास की हलचल से उनके बीच चुंबकीय क्षेत्र विकसित होकर इनके बीच में मौजूद सुई को हिलाता है और उससे (सुई से) जुड़ी लाइट जलने लगती है। विकास का दावा है कि भूकंप के पिछले दो मौकों पर उसने इस यंत्र को बखूबी परखा और आधे घंटे पहले आसपास के लोगों को सचेत किया था। दावा यह भी है कि 30 तारों के इस तंत्र में ऐसी हलचल के संकेत पर उस दिशा का तार ठीक वैसे ही टूट जाता है, जिस दिशा में भूकंप संभावित है और इससे कनेक्ट लाइट जलने लगती है।
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कोट::::
भूकंप के पूर्वानुमान वाले यंत्र की चर्चा सुनकर बड़गों गांव (संतकबीरनगर) जाकर वहां अपनी ननिहाल में मौजूद विकास कुमार से मुलाकात की। पहली नजर में उसकी थ्योरी और यंत्र में संकेतांक की गुंजाइश दिखी लेकिन अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञ जांच के लिए विकास को यंत्र के साथ एमएमएमयूटी के डिजाइन इनोवेशन एंड इन्क्यूवेशन सेेंटर में आने के लिए कहा है। वहां परखने के साथ सुधार की गुंजाइश देखी जाएगी। कामयाबी होने पर इसे विकास के नाम से पेटेंट कराया जाएगा।
- ओंकार सिंह, वीसी, एमएमएमयूटी
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प्रेरक की भूमिका में रहे शिक्षक बृजराज
सहजनवां। भूकंप का पूर्वानुमान बताने वाले यंत्र की ईजाद का दावा कर रहे विकास कुमार के यंत्र तक पहुंचने के सफर में बड़ी प्रेरणा भरोहिया निवासी एवं सजहनवां के नवीन बाल शिक्षा निकेतन के प्रबंधक स्वर्गीय बृजराज मिश्र की है। प्रबंधक से पहले लंबे समय शिक्षक की भूमिका में रहे बृजराज मिश्र ने विकास के मन में आए इस ख्याल को न सिर्फ प्रोत्साहित किया बल्कि स्कूल परिसर में जगह संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिल्ली के मस्तिष्क के अध्ययन के लिए उसे दूसरे शहरों तक लेकर भी गए थे। विकास अपने अब तक के काम का सारा श्रेय उन्हीं को देता है।
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