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Sant Kabir Nagar News: कहीं सामुदायिक शौचालय बदहाल तो कहीं लटक रहे ताले
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हर माह देखरेख पर खर्च हो रहे 51 लाख
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्वच्छता अभियान के तहत गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए जिले में कुल 567 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। इस मद में प्रतिमाह करीब 51 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी स्वच्छता व्यवस्था लचर बनी हुई हैं। स्थिति यह है कि कहीं शौचालय बदहाल हैं तो कहीं ताले ही नहीं खुल रहे हैं।
शासन ने सामुदायिक शौचालयों का निर्माण व उपयोगिता को प्राथमिक में शामिल किया है। जिले के 754 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनने हैं। जिले में 567 सामुदायिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। इन शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। इसके लिए हर माह मानदेय के रूप में छह हजार और सामग्री खरीद के नाम पर तीन हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। यानी कुल नौ हजार दिए जाते है। इसके बावजूद सार्वजनिक शौचालय का उपयोग ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। धनघटा क्षेत्र की बात करें तो कटया, नरायनपुर, कोहलवा, लहुरेगांव, उमरिया बाजार आदि स्थानों पर बने सामुदायिक शौचालयों पर अक्सर ताला बंद रहता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर शौचालयों में बिजली व पानी का अभाव बना हुआ हैं। जिसके कारण इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़ा हो रहा है। इसकी शिकायत भी लगातार मिल रही है। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता को ध्यान में रखकर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसके देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। यदि कहीं पर शौचालयों में ताला बंद रहता है या बदहाल है तो निरीक्षण कर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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संत प्रसाद, सीडीओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्वच्छता अभियान के तहत गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए जिले में कुल 567 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। इस मद में प्रतिमाह करीब 51 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी स्वच्छता व्यवस्था लचर बनी हुई हैं। स्थिति यह है कि कहीं शौचालय बदहाल हैं तो कहीं ताले ही नहीं खुल रहे हैं।
शासन ने सामुदायिक शौचालयों का निर्माण व उपयोगिता को प्राथमिक में शामिल किया है। जिले के 754 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनने हैं। जिले में 567 सामुदायिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। इन शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। इसके लिए हर माह मानदेय के रूप में छह हजार और सामग्री खरीद के नाम पर तीन हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। यानी कुल नौ हजार दिए जाते है। इसके बावजूद सार्वजनिक शौचालय का उपयोग ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। धनघटा क्षेत्र की बात करें तो कटया, नरायनपुर, कोहलवा, लहुरेगांव, उमरिया बाजार आदि स्थानों पर बने सामुदायिक शौचालयों पर अक्सर ताला बंद रहता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर शौचालयों में बिजली व पानी का अभाव बना हुआ हैं। जिसके कारण इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़ा हो रहा है। इसकी शिकायत भी लगातार मिल रही है। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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ग्राम पंचायतों में स्वच्छता को ध्यान में रखकर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसके देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। यदि कहीं पर शौचालयों में ताला बंद रहता है या बदहाल है तो निरीक्षण कर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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संत प्रसाद, सीडीओ