{"_id":"58c43b024f1c1be618dc49a5","slug":"shriram-overthrown-after-24-years","type":"story","status":"publish","title_hn":" ‘श्रीराम’ ने 24 साल बाद खत्म कराया वनवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘श्रीराम’ ने 24 साल बाद खत्म कराया वनवास
Sant Kabir Nagar
Updated Sat, 11 Mar 2017 11:29 PM IST
विज्ञापन
धनघटा सीट के विजयी प्रत्याशी श्रीराम चौहान आरओ से जीत का प्रमाण पत्र लेते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव 2017 में धनघटा सुरक्षित सीट पर 24 साल बाद श्रीराम चौहान ने भाजपा का वनवास खत्म कराया। इससे पहले भी श्रीराम चौहान वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस सीट से जीत दिलायी थी। भाजपा के लिए श्रीराम चौहान एक बार फिर कारगर साबित हुए है।
वर्ष 1989 का विधानसभा चुनाव तत्कालीन जनता दल और भाजपा गठबंधन ने मिलकर लड़ा था। तब तर्तमान की धनघटा सीट को हैंसर बाजार के नाम से थी। यह सीट भाजपा के कोटे में गई पार्टी ने श्रीराम चौहान पर अपना भरोसा जताया था और उन्हें जीत भी मिली। 1991 का चुनाव हुआ जिसको राम लहर का नाम दिया गया और भाजपा ने अपने सीटिंग विधायक श्रीराम चौहान को फिर मैदान में उतारा और वह फिर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। 1993 में जब सपा- बसपा का गठबंधन हुआ तब श्रीराम चौहान हैट्रिक लगाने से चूक गए और बसपा के लालमणि प्रसाद विधायक बने।
उसके बाद 1996 के लोक सभा चुनाव में श्रीराम चौहान बस्ती का रुख कर लिए और वहां से सांसद भी बने। जब विधान सभा का चुनाव हुआ तो उन्होंने अपने भाई जगदीश चौहान को इस सीट से भाजपा का टिकट दिलवाया, लेकिन जगदीश चौहान चुनाव हार गए। 1993 से लेकर 2012 तक के विधान सभा चुनाव में भाजपा को इस सीट से जीत नसीब नही हुई। उधर, 2014 के लोक सभा चुनाव में जब भाजपा की आंधी चली तो पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह आया जिसका नजारा तब देखने को मिला जब 2017 के विधान सभा चुनाव में धनघटा विधान सभा सीट से भाजपा के कद्दावर नेता श्रीराम चौहान को मैदान में उतारा। भाजपा का यह दांव सटीक बैठा और चौहान इस चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में सफल रहे।
विज्ञापन
2012 के विधान सभा चुनाव में श्रीराम चौहान को पार्टी ने कपिलवस्तु विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया था, लेकिन वह हार गए थे। अब जब कि राम लहर में धनघटा में श्रीराम चौहान ने पार्टी का परचम फहराया तो मोदी लहर में भी पार्टी को जीत दिलाने का श्रेय उन्हीं को मिला।
विज्ञापन
वर्ष 1989 का विधानसभा चुनाव तत्कालीन जनता दल और भाजपा गठबंधन ने मिलकर लड़ा था। तब तर्तमान की धनघटा सीट को हैंसर बाजार के नाम से थी। यह सीट भाजपा के कोटे में गई पार्टी ने श्रीराम चौहान पर अपना भरोसा जताया था और उन्हें जीत भी मिली। 1991 का चुनाव हुआ जिसको राम लहर का नाम दिया गया और भाजपा ने अपने सीटिंग विधायक श्रीराम चौहान को फिर मैदान में उतारा और वह फिर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। 1993 में जब सपा- बसपा का गठबंधन हुआ तब श्रीराम चौहान हैट्रिक लगाने से चूक गए और बसपा के लालमणि प्रसाद विधायक बने।
विज्ञापन
उसके बाद 1996 के लोक सभा चुनाव में श्रीराम चौहान बस्ती का रुख कर लिए और वहां से सांसद भी बने। जब विधान सभा का चुनाव हुआ तो उन्होंने अपने भाई जगदीश चौहान को इस सीट से भाजपा का टिकट दिलवाया, लेकिन जगदीश चौहान चुनाव हार गए। 1993 से लेकर 2012 तक के विधान सभा चुनाव में भाजपा को इस सीट से जीत नसीब नही हुई। उधर, 2014 के लोक सभा चुनाव में जब भाजपा की आंधी चली तो पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह आया जिसका नजारा तब देखने को मिला जब 2017 के विधान सभा चुनाव में धनघटा विधान सभा सीट से भाजपा के कद्दावर नेता श्रीराम चौहान को मैदान में उतारा। भाजपा का यह दांव सटीक बैठा और चौहान इस चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में सफल रहे।
विज्ञापन
2012 के विधान सभा चुनाव में श्रीराम चौहान को पार्टी ने कपिलवस्तु विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया था, लेकिन वह हार गए थे। अब जब कि राम लहर में धनघटा में श्रीराम चौहान ने पार्टी का परचम फहराया तो मोदी लहर में भी पार्टी को जीत दिलाने का श्रेय उन्हीं को मिला।