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संभलिए ! वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे

Sat, 12 Jan 2019 12:15 AM IST
राकेश पांडेय संतकबीरनगर
संतकबीरनगर Published by: राकेश पांडेय Updated Sat, 12 Jan 2019 12:15 AM IST
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Save! Varna will crave drop-water in summer
संभलिए ! वर्ना गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे - फोटो : अमर उजाला
 
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संतकबीरनगर। पंद्रहवीं शताब्दी में संत कबीर ने मगहर पहुंचकर इस क्षेत्र को सूखा से उबारा था। अब पांच सौ बरस बाद फिर वही हालात उत्पन्न होने लगे हैं। जिले का भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। चार महीने में ही जिले का भूगर्भ जलस्तर करीब 20 फीट नीचे चला गया है। सांथा व बेलहर ब्लॉक में कई इंडिया मार्का हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए अतिरिक्त पाइप लगाना पड़ा है। अगर यही हालात रहे तो गर्मी के दिनों में जिले को पानी का गंभीर संकट झेलना पड़ेगा।    
 एक तरफ राप्ती व दूसरी तरफ घाघरा नदी से घिरे संतकबीरनगर जिले के मध्य में आमी, कठिनइया व कुआनो नदियां बहती हैं। कम बारिश व अन्य कारणों से आमी, कठिनइया व कुआनो की हालत दयनीय हो चुकी है। करीब 17 लाख की आबादी वाले जनपद में पेयजल के अलावा खेतों की सिंचाई के लिए भी अत्यधिक मात्रा में भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है। इसके चलते जलस्तर नीचे जा रहा है। आमतौर पर 15 से 20 फीट पर मिलने वाला भूगर्भ जल अब 35 फीट पर मिल रहा है। शुद्घ पेयजल के लिए जिले की 794 ग्राम पंचायतों में करीब 27 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। आमतौर पर इनकी बोरिंग 125 से 150 फीट की गहराई पर होती है। करीब दो लाख घरों में छोटे हैंडपंप लगे हैं। जलस्तर का प्रथम तल नीचे जाने के बाद बोरिंग की गहराई बढ़ानी पड़ रही है। सबसे खराब स्थिति सांथा व बेलहर ब्लॉक में है, जहां के हैंडपंपों को करीब 220 फीट तक रिबोर करना पड़ रहा है। सांथा ब्लॉक के इंदरपुर गांव में कई इंडिया मार्का हैंडपंपों की रिबोरिंग 225 फीट की गहराई तक कराई गई है। भूगर्भ जल को रिचार्ज करने के लिए जलसंचय बेहद जरूरी है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने मनरेगा के तहत गांवों में पुराने तालाबों के जीर्णोद्घार के अलावा नए तालाब खुदवाने के लिए भी प्रयास किया था। करोड़ों रुपये खर्च करके तालाब खुदवाए भी गए, लेकिन इनकी गहराई कम होने व कम बारिश के चलते ये तालाब भी बहुत उपयोगी नहीं हुए। कुओं की घटती संख्या भी जल संचय की राह में बाधक बन गया। 
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 एएच एग्री इंटर कॉलेज दुधारा के भूगोल विभाग के अध्यापक डॉ. संजय द्विवेदी का कहना है कि प्राकृतिक जलस्रोतों के नष्ट होते स्वरूप से स्थिति ज्यादा भयावह हो रही है। सिंचाई के लिए भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन और उस अनुपात में जल संचयन की व्यवस्था नहीं होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। सीडीओ हाकिम सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाबों का जीर्णोद्घार कराया गया है। लोगों को खुद भी जल संचय के प्रति जागरूक होना होगा, तभी स्थिति संभलेगी। 
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