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सती ने भगवान शिव के अपमान से किया था शरीर त्याग : रितिका नंद
Wed, 09 Oct 2024 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 09 Oct 2024 12:18 AM IST
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- श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
रोसयाबाजार। दुर्गा मंदिर धौरहरा परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। इसमें कथा वाचक रितिका नंद शास्त्री ने कहा कि सती ने भगवान शिव के अपमान पर शरीर त्याग किया था।
कथा व्यास ने कहा कि दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जब सती द्वारा शिव के अपमान से आहत होकर अपने शरीर का त्याग कर दिया गया तब हिमाचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। समयानुसार बड़ी होने पर पार्वती की मां मैना देवी ने पति हिमांचल से कहा कि बेटी के अनुरूप घर वर देख कर अब बेटी पार्वती का विवाह कर देना चाहिए
महर्षि नारद के कथानुसार पार्वती को तपस्या के लिए प्रेरित किया गया और मां पार्वती ने शिवजी की कठोर तपस्या की। सप्तऋषियों के परीक्षा लेने के बाद, शिव पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। कथा व्यास ने कहा कि इस प्रसंग से यही शिक्षा लेने की जरूरत है कि सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए कन्याओं के अनुरूप ही वर का चयन करना चाहिए और हमेशा अच्छा संस्कार देना चाहिए।
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सभी चाहते हैं कि हमारी बेटियां ससुराल में सुखी रहे, लेकिन यह तभी सम्भव जब हम भी अपने घर आई बहूओं को अपनी बेटी की तरह सम्मान देंगे। क्योंकि बेटियां ही समयानुसार कन्या ,बहू, सास की स्थान लेती है। इस मौके पर सत्यनारायण वर्मा, चंदु यादव, उदयराज अग्रहरि, महेश, दीनानाथ, सुभाष अग्रहरी, रामजग यादव, शैलेश कुमार, रामजी आदि मौजूद रहे।
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रोसयाबाजार। दुर्गा मंदिर धौरहरा परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। इसमें कथा वाचक रितिका नंद शास्त्री ने कहा कि सती ने भगवान शिव के अपमान पर शरीर त्याग किया था।
कथा व्यास ने कहा कि दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जब सती द्वारा शिव के अपमान से आहत होकर अपने शरीर का त्याग कर दिया गया तब हिमाचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। समयानुसार बड़ी होने पर पार्वती की मां मैना देवी ने पति हिमांचल से कहा कि बेटी के अनुरूप घर वर देख कर अब बेटी पार्वती का विवाह कर देना चाहिए
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महर्षि नारद के कथानुसार पार्वती को तपस्या के लिए प्रेरित किया गया और मां पार्वती ने शिवजी की कठोर तपस्या की। सप्तऋषियों के परीक्षा लेने के बाद, शिव पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। कथा व्यास ने कहा कि इस प्रसंग से यही शिक्षा लेने की जरूरत है कि सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए कन्याओं के अनुरूप ही वर का चयन करना चाहिए और हमेशा अच्छा संस्कार देना चाहिए।
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सभी चाहते हैं कि हमारी बेटियां ससुराल में सुखी रहे, लेकिन यह तभी सम्भव जब हम भी अपने घर आई बहूओं को अपनी बेटी की तरह सम्मान देंगे। क्योंकि बेटियां ही समयानुसार कन्या ,बहू, सास की स्थान लेती है। इस मौके पर सत्यनारायण वर्मा, चंदु यादव, उदयराज अग्रहरि, महेश, दीनानाथ, सुभाष अग्रहरी, रामजग यादव, शैलेश कुमार, रामजी आदि मौजूद रहे।