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Sant Kabir Nagar News: सरयू स्थिर... फसल जलमग्न, मुश्किलें कायम
Mon, 26 Aug 2024 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 26 Aug 2024 11:55 PM IST
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- एमबीडी बांध के बीच बसे 14 गांवों की 1000 आबादी प्रभावित
- गहराता जा रहा पशुओं के लिए चारे का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू नदी का जल स्तर बढ़ने से नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे 14 गांव के करीब 1000 आबादी बाढ़ के संकट का सामना कर रही है। नदी का जलस्तर तीन दिनों से 79.150 मीटर पर स्थिर है, लेकिन लोगों की दुश्वारियां विकराल होती जा रही है। जिस स्थान पर बाढ़ का पानी पहुंच चुका था उसी स्थान पर जस का तस है। जलमग्न हो चुकी फसलें नष्ट होने लगी हैं। पशुओं के लिए चारा का संकट गहराता जा रहा है।
बाढ़ से घिरे अगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा, केवटाही, पटौवा टोला, तीरथ पुरवा, सियर कला, दौलतपुर, चकदहा, कंचनपुर, गायघाट दक्षिणी, कंचनपुर, सियाराम, गुनवतियां, सुअरहा गांव के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। गायघाट दक्षिणी के ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि बाढ़ के कारण फसले डूब गई हैं। गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी आ जाने के कारण पशुपालकों के लिए चारा का संकट विकराल रूप धारण कर लिया है।
मवेशी को खिलाने के लिए भूसा ,दाना की उपलब्धता सभी के पास नहीं है। लोग गांव से नाव के जरिए बंधे पर आ रहे हैं और कार्य निपटाने के बाद अपने घर को लौट जा रहे हैं। प्रधान का कहना है कि लोग मजबूरी में घर से पलायन इस कारण नहीं कर रहे हैं कि कितना सामान लेकर बाढ़ शरणालय या बंधे पर जाकर रहे। सामान को अगर घर छोड़ कर जाते हैं तो चोरी का भय है। इस कारण जब तक घर पर रहने लायक है तब तक रह रहे हैं।
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बाढ़ से पीड़ित राधेश्याम, गंगा दीन, रामदयाल, सुभावती, किसमती, मुनक्का, पार्वती आदि का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता यहां के लोगों को नहीं मिला है। अधिकारी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। क्षेत्र का कोई भी जनप्रतिनिधि बाढ़ पीड़ितों का सुधि लेने नहीं आ रहा है। बंधे के उत्तर तरफ जाकर लकड़ी खोजबीन कर लाते हैं तब जाकर चूल्हा जलता है। कहने के लिए बाढ़ शरणालय तिघरा इंटर कॉलेज में बनाया गया है लेकिन वहां पर किस तरह का इंतजाम किया गया है। गांव वालों का कहना है की जब नसीब में हर वर्ष उजाड़ना बसना लिखा है तो उसे झेलना ही पड़ेगा।
बाढ़ प्रभावित गांव में नाव लगाई जा चुकी है। लोगों के रहने और खाने का इंतजाम बाढ़ शरणालय में किया गया है। लेखपाल और कानूनगो मौके पर रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
- योगेंद्र पांडेय, तहसीलदार
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- गहराता जा रहा पशुओं के लिए चारे का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू नदी का जल स्तर बढ़ने से नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे 14 गांव के करीब 1000 आबादी बाढ़ के संकट का सामना कर रही है। नदी का जलस्तर तीन दिनों से 79.150 मीटर पर स्थिर है, लेकिन लोगों की दुश्वारियां विकराल होती जा रही है। जिस स्थान पर बाढ़ का पानी पहुंच चुका था उसी स्थान पर जस का तस है। जलमग्न हो चुकी फसलें नष्ट होने लगी हैं। पशुओं के लिए चारा का संकट गहराता जा रहा है।
बाढ़ से घिरे अगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा, केवटाही, पटौवा टोला, तीरथ पुरवा, सियर कला, दौलतपुर, चकदहा, कंचनपुर, गायघाट दक्षिणी, कंचनपुर, सियाराम, गुनवतियां, सुअरहा गांव के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। गायघाट दक्षिणी के ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि बाढ़ के कारण फसले डूब गई हैं। गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी आ जाने के कारण पशुपालकों के लिए चारा का संकट विकराल रूप धारण कर लिया है।
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मवेशी को खिलाने के लिए भूसा ,दाना की उपलब्धता सभी के पास नहीं है। लोग गांव से नाव के जरिए बंधे पर आ रहे हैं और कार्य निपटाने के बाद अपने घर को लौट जा रहे हैं। प्रधान का कहना है कि लोग मजबूरी में घर से पलायन इस कारण नहीं कर रहे हैं कि कितना सामान लेकर बाढ़ शरणालय या बंधे पर जाकर रहे। सामान को अगर घर छोड़ कर जाते हैं तो चोरी का भय है। इस कारण जब तक घर पर रहने लायक है तब तक रह रहे हैं।
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बाढ़ से पीड़ित राधेश्याम, गंगा दीन, रामदयाल, सुभावती, किसमती, मुनक्का, पार्वती आदि का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता यहां के लोगों को नहीं मिला है। अधिकारी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। क्षेत्र का कोई भी जनप्रतिनिधि बाढ़ पीड़ितों का सुधि लेने नहीं आ रहा है। बंधे के उत्तर तरफ जाकर लकड़ी खोजबीन कर लाते हैं तब जाकर चूल्हा जलता है। कहने के लिए बाढ़ शरणालय तिघरा इंटर कॉलेज में बनाया गया है लेकिन वहां पर किस तरह का इंतजाम किया गया है। गांव वालों का कहना है की जब नसीब में हर वर्ष उजाड़ना बसना लिखा है तो उसे झेलना ही पड़ेगा।
बाढ़ प्रभावित गांव में नाव लगाई जा चुकी है। लोगों के रहने और खाने का इंतजाम बाढ़ शरणालय में किया गया है। लेखपाल और कानूनगो मौके पर रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
- योगेंद्र पांडेय, तहसीलदार