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घर से करें बदलाव की शुुरुआत तभी बनेगी बात
Sun, 09 Jun 2019 10:57 PM IST
राकेश पांडेय
Santkabirnagar
Santkabirnagar
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 09 Jun 2019 10:57 PM IST
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अपराजिता के तहत अमर उजाला कार्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। महिलाओं को अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए समाज को दोष देने के बजाय बदलाव की शुरूआत अपने घर से करनी होगी। सबसे पहले हमें घर में बेटी के जन्म पर उत्सव मनाना होगा। यही नहीं, स्वच्छता और नशा उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
ये बातें अमर उजाला कार्यालय में महिला सशक्तिकरण पर हुई गोष्ठी में जिले की आदर्श प्राथमिक शिक्षक मीरा भारती ने कहीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में माताएं अपने बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि नहीं दिखा रहीं। बेटी का जन्म होने पर वे ही सबसे पहले दुखी हो जाती हैं। इस मानसिकता में बदलाव केवल कानून बनाने से नहीं हो सकता बल्कि हम सभी को तय करना होगा कि बेटी के जन्म पर भी वैसा ही उत्सव मने जैसे बेटे के जन्म पर मनाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता मोदनवाल ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति तभी बदलेगी जब वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी। इसके लिए स्वरोजगार पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर जोर दिया।
महिला महासभा की जिला प्रभारी कुसुम चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शराब पीने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते गरीब परिवारों की महिलाओं को तकलीफें झेलनी पड़ती हैं, लेकिन प्रशासन का सहयोग न मिलने से इस धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में महिलाओं को एकजुट होकर इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास करना होगा। गोष्ठी के अंत में सभी ने महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया। इस दौरान इंदुमती, राधिका देवी, इसरावती, किरन, गायत्री शर्मा, शशिकला, विमला देवी, कंचन, सुप्रीया राय, छाया शुक्ला आदि मौजूद रहीं।
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ये बातें अमर उजाला कार्यालय में महिला सशक्तिकरण पर हुई गोष्ठी में जिले की आदर्श प्राथमिक शिक्षक मीरा भारती ने कहीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में माताएं अपने बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि नहीं दिखा रहीं। बेटी का जन्म होने पर वे ही सबसे पहले दुखी हो जाती हैं। इस मानसिकता में बदलाव केवल कानून बनाने से नहीं हो सकता बल्कि हम सभी को तय करना होगा कि बेटी के जन्म पर भी वैसा ही उत्सव मने जैसे बेटे के जन्म पर मनाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता मोदनवाल ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति तभी बदलेगी जब वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी। इसके लिए स्वरोजगार पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर जोर दिया।
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महिला महासभा की जिला प्रभारी कुसुम चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शराब पीने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते गरीब परिवारों की महिलाओं को तकलीफें झेलनी पड़ती हैं, लेकिन प्रशासन का सहयोग न मिलने से इस धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में महिलाओं को एकजुट होकर इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास करना होगा। गोष्ठी के अंत में सभी ने महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया। इस दौरान इंदुमती, राधिका देवी, इसरावती, किरन, गायत्री शर्मा, शशिकला, विमला देवी, कंचन, सुप्रीया राय, छाया शुक्ला आदि मौजूद रहीं।
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