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Sant Kabir Nagar News: कैरियर बनकर खराब कर रहे कॅरिअर
Tue, 24 Feb 2026 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:21 AM IST
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सिद्धार्थनगर। इंडो-नेपाल से तस्करी के मामलों में एक खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। बड़े तस्कर खुद सामने नहीं आ रहे बल्कि युवाओं को ‘कैरियर’ बनाकर अवैध सामान की ढुलाई करवा रहे हैं। हालिया गिरफ्तारियों में 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या अधिक है।
पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए अधिकांश आरोपी थोड़ी सी रकम पाने की लालच में नेटवर्क से जुड़ गए और कॅरिअर दांव पर लगा दिया।
कोडीनयुक्त कफ सिरप हो चरस या फिर स्मैक, यूरिया और हेरोइन आदि की तस्करी में भी ज्यादातर युवा ही पकड़े गए। इसकी जांच में सामने आया है कि नेटवर्क की संरचना ऐसी बनाई जाती है, जिसमें सरगना सीधे संपर्क में नहीं आता।
लोकल एजेंट युवाओं से संपर्क करते हैं, पहले छोटे पैकेट देकर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़ी खेप बॉर्डर के पार कराते हैं। पकड़े जाने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का सामना युवा करते हैं, जबकि असली तस्कर बच निकलते हैं।
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नेटवर्क की कई परतें...मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल : पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को मोहरा बनाना तस्करों की सोची-समझी रणनीति है।
एक अधिकारी ने बताया कि नेटवर्क में कई परतें होती हैं। कूरियर को सिर्फ ऊपर के संपर्क का पता होता है, मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी, जल्दी पैसा कमाने की चाह और जोखिम के प्रति लापरवाही युवाओं को इस जाल में धकेल रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्क के जरिए भर्ती आसान हो गई है।
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पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए अधिकांश आरोपी थोड़ी सी रकम पाने की लालच में नेटवर्क से जुड़ गए और कॅरिअर दांव पर लगा दिया।
कोडीनयुक्त कफ सिरप हो चरस या फिर स्मैक, यूरिया और हेरोइन आदि की तस्करी में भी ज्यादातर युवा ही पकड़े गए। इसकी जांच में सामने आया है कि नेटवर्क की संरचना ऐसी बनाई जाती है, जिसमें सरगना सीधे संपर्क में नहीं आता।
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लोकल एजेंट युवाओं से संपर्क करते हैं, पहले छोटे पैकेट देकर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़ी खेप बॉर्डर के पार कराते हैं। पकड़े जाने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का सामना युवा करते हैं, जबकि असली तस्कर बच निकलते हैं।
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नेटवर्क की कई परतें...मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल : पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को मोहरा बनाना तस्करों की सोची-समझी रणनीति है।
एक अधिकारी ने बताया कि नेटवर्क में कई परतें होती हैं। कूरियर को सिर्फ ऊपर के संपर्क का पता होता है, मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी, जल्दी पैसा कमाने की चाह और जोखिम के प्रति लापरवाही युवाओं को इस जाल में धकेल रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्क के जरिए भर्ती आसान हो गई है।