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Sant Kabir Nagar News: सरयू उफान पर... 32 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ा
Tue, 05 Aug 2025 10:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 05 Aug 2025 10:47 PM IST
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अशरफपुर के पास बंधे के दूसरी तफ पहुंचा हुआ नदी का पानी
महुली/पौली। जिले में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा है। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सरयू नदी खतरे के निशान से सिर्फ 75 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। वहीं बंधे और नदी की धारा के बीच स्थित 32 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं प्रशासन अपनी आवश्यक तैयारियों में जुटा हुआ है। पूर्व के कटान स्थलों पर बालू की बोरियां, बोल्डर रखा जा रहा है।
पिछले तीन दिनों में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति यह है कि नदी मंगलवार को इस वर्ष के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। नदी का खतरे का निशान 79.400 मीटर है। जबकि नदी इस समय 78.650 मीटर पर बह रही है। नदी के बढ़ने की रफ्तार आधा सेंटीमीटर प्रति मिनट है। वहीं पौली क्षेत्र के नकहा, पड़रिया, कटहा-भिटहा समेत अन्य गांवों के लोगों की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं और वह नाव के जरिए चारा ला रहे हैं।
पानी बंधे के करीब पहुंच गया है। वहीं बाढ़ नियंत्रण विभाग के ठेकेदार और अफसर अशरफपुर, तुरकौलिया नायक में कटान स्थल के पास बालू की बोरियों को सिलवाकर रखवा रहे हैं। गायघाट दक्षिणी गांव जहां पर नदी ने पिछले साल पांच घरों को काट दिया था, उस गांव को छूती हुई चल रही है। लेकिन विभाग ने यहां पर बोल्डर पिचिंग कराने के साथ ही परक्यूपाइन भी लगाया है।वहीं विभाग ने बड़े-बड़े ठोकरों को बनाया है, जिसके चलते नदी का प्रवाह थम गया है।
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बंधों में जहां पर पुल बनाए गए हैं, उन बंधों के जरिए पानी अब मैदानी क्षेत्रों में भी भरने लगा है। सबसे बड़ा संकट पशुओं के चारे को लेकर है। कारण यह है कि पशुओं का चारा डूब गया है।
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पिछले तीन दिनों में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति यह है कि नदी मंगलवार को इस वर्ष के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। नदी का खतरे का निशान 79.400 मीटर है। जबकि नदी इस समय 78.650 मीटर पर बह रही है। नदी के बढ़ने की रफ्तार आधा सेंटीमीटर प्रति मिनट है। वहीं पौली क्षेत्र के नकहा, पड़रिया, कटहा-भिटहा समेत अन्य गांवों के लोगों की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं और वह नाव के जरिए चारा ला रहे हैं।
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पानी बंधे के करीब पहुंच गया है। वहीं बाढ़ नियंत्रण विभाग के ठेकेदार और अफसर अशरफपुर, तुरकौलिया नायक में कटान स्थल के पास बालू की बोरियों को सिलवाकर रखवा रहे हैं। गायघाट दक्षिणी गांव जहां पर नदी ने पिछले साल पांच घरों को काट दिया था, उस गांव को छूती हुई चल रही है। लेकिन विभाग ने यहां पर बोल्डर पिचिंग कराने के साथ ही परक्यूपाइन भी लगाया है।वहीं विभाग ने बड़े-बड़े ठोकरों को बनाया है, जिसके चलते नदी का प्रवाह थम गया है।
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बंधों में जहां पर पुल बनाए गए हैं, उन बंधों के जरिए पानी अब मैदानी क्षेत्रों में भी भरने लगा है। सबसे बड़ा संकट पशुओं के चारे को लेकर है। कारण यह है कि पशुओं का चारा डूब गया है।