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Sant Kabir Nagar News: तेजी से बढ़ रहा नदियों का जलस्तर, बांधों पर पहुंचाई जाने लगीं बोरियां, ड्रम और पॉलिथीन
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मेंहदावल/लोहरैया। जिले में नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। मेंहदावल में राप्ती का जलस्तर 76.40 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं धनघटा में सरयू के जलस्तर में भी वृद्धि जारी है। हालांकि नदी यहां अभी काफी नीचे है। वहीं बांधों पर प्लास्टिक की बोरियां, एचडीपीई बैग, ड्रम, पॉलिथीन आदि आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है।
मेंहदावल क्षेत्र में राप्ती नदी के जलस्तर में रोजाना वृद्धि हो रही है। यहां बुधवार को राप्ती नदी का जलस्तर 75.95 मीटर था, वहीं बृहस्पतिवार को सुबह 8:00 बजे नदी का जलस्तर 76.5 मीटर पर पहुंच गया। शाम चार बजे नदी का जलस्तर 76.10 मीटर मापा गया। 24 घंटे में राप्ती नदी का जलस्तर लगभग 15 सेंटीमीटर बढ़ा। नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रही है। जबकि विभागीय अधिकारी लगातार तटबंध से लेकर जलस्तर तक की निगरानी कर रहे हैं। सहायक अभियंता मनीष राय के नेतृत्व में अवर अभियंताओं की टीम लगातार तटबंध पर जमी हुई है। बांध पर रेनकट भरे जा रहे हैं। 19 किलोमीटर लंबे तटबंध पर वर्तमान समय में रैटहोल और रेनकट भरने का काम चल रहा है। सहायक अभियंता मनीष राय का कहना है कि जल स्तर बढ़ने के बाद भी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। कहीं से कोई दिक्कत नहीं है। रेनकट भरने का काम अंतिम चरण में है। जल स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
दूसरी ओर लोहरैया इलाके में सरयू नदी में संभावित बाढ़ को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बाढ़ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए विभाग ने तुरकौलिया स्थित स्टोर रूम में आवश्यक बाढ़ राहत एवं बचाव सामग्री पहले से ही एकत्र कर ली है।
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स्टोर रूम में जनरेटर, प्लास्टिक की बोरियां, एचडीपीई बैग, ड्रम, प्लास्टिक पॉलिथीन, नायलॉन की रस्सियां और तटबंध की सुरक्षा और राहत कार्यों में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक सामग्री सुरक्षित रखी गई हैं। जरूरत पड़ने पर इनका तत्काल उपयोग किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरयू नदी हर वर्ष बरसात के मौसम में उफान पर आती है। ऐसे में एमबीडी तटबंध की सुरक्षा और बाढ़ से बचाव के लिए पहले से तैयार रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी जरूरी संसाधनों का भंडारण कर लिया गया है, ताकि आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।
विभाग की ओर से तटबंध की निगरानी भी लगातार की जा रही है। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है, ताकि नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने भी उम्मीद जताई है कि समय रहते की गई यह तैयारी संभावित संकट के दौरान काफी मददगार साबित होगी।
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मेंहदावल क्षेत्र में राप्ती नदी के जलस्तर में रोजाना वृद्धि हो रही है। यहां बुधवार को राप्ती नदी का जलस्तर 75.95 मीटर था, वहीं बृहस्पतिवार को सुबह 8:00 बजे नदी का जलस्तर 76.5 मीटर पर पहुंच गया। शाम चार बजे नदी का जलस्तर 76.10 मीटर मापा गया। 24 घंटे में राप्ती नदी का जलस्तर लगभग 15 सेंटीमीटर बढ़ा। नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रही है। जबकि विभागीय अधिकारी लगातार तटबंध से लेकर जलस्तर तक की निगरानी कर रहे हैं। सहायक अभियंता मनीष राय के नेतृत्व में अवर अभियंताओं की टीम लगातार तटबंध पर जमी हुई है। बांध पर रेनकट भरे जा रहे हैं। 19 किलोमीटर लंबे तटबंध पर वर्तमान समय में रैटहोल और रेनकट भरने का काम चल रहा है। सहायक अभियंता मनीष राय का कहना है कि जल स्तर बढ़ने के बाद भी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। कहीं से कोई दिक्कत नहीं है। रेनकट भरने का काम अंतिम चरण में है। जल स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
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दूसरी ओर लोहरैया इलाके में सरयू नदी में संभावित बाढ़ को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बाढ़ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए विभाग ने तुरकौलिया स्थित स्टोर रूम में आवश्यक बाढ़ राहत एवं बचाव सामग्री पहले से ही एकत्र कर ली है।
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स्टोर रूम में जनरेटर, प्लास्टिक की बोरियां, एचडीपीई बैग, ड्रम, प्लास्टिक पॉलिथीन, नायलॉन की रस्सियां और तटबंध की सुरक्षा और राहत कार्यों में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक सामग्री सुरक्षित रखी गई हैं। जरूरत पड़ने पर इनका तत्काल उपयोग किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरयू नदी हर वर्ष बरसात के मौसम में उफान पर आती है। ऐसे में एमबीडी तटबंध की सुरक्षा और बाढ़ से बचाव के लिए पहले से तैयार रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी जरूरी संसाधनों का भंडारण कर लिया गया है, ताकि आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।
विभाग की ओर से तटबंध की निगरानी भी लगातार की जा रही है। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है, ताकि नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने भी उम्मीद जताई है कि समय रहते की गई यह तैयारी संभावित संकट के दौरान काफी मददगार साबित होगी।