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कुआनो नदी का किनारा बना युवाओं की जिंदगी का सहारा
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कुआनो नदी का किनारा बना युवाओं की जिंदगी का सहारा
- गांव में सार्वजनिक जमीन नहीं होने से युवाओं ने कुआनो नदी किनारे बनाया खेल का मैदान
- महेश्वरपुर और आसपास के गांवों के युवा हर रोज सुबह-शाम करते हैं दौड़ का अभ्यास
- पांच साल के भीतर 40 से अधिक युवा हासिल कर चुके हैं सफलता
परमात्मा यादव
रोसया बाजार। लक्ष्य हासिल करने के लिए ईमानदारी से मेहनत की जाए तो सफलता मिल ही जाती है। ऐसा ही कुछ महेश्वरपुर और आसपास के युवाओं ने करके दिखाया है। युवाओं ने कुआनो नदी के किनारे खेल का मैदान बनाया और नियमित दौड़ का अभ्यास किया। पिछले पांच सालों में महेश्वरपुर और आसपास के गांवों के 40 से अधिक युवा सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश और समाज का सेवा कर रहे हैं।
महेश्वरपुर गांव निवासी आर्मी के जवान महेंद्र यादव, प्रकाश चंद्र मिश्रा बताते हैं कि उनके गांव में युवाओं के खेलकूद के लिए कोई सार्वजनिक जमीन नहीं थी। इस कारण यहां के युवा चाहकर भी खेलकूद और दौड़ का अभ्यास नहीं कर पा रहे थे। वर्ष 2017 में युवाओं के मन में विचार आया कि कुआनो नदी के किनारे खेल का मैदान बनाया जाए। नदी के किनारे की उबड़-खाबड़ जमीन को युवाओं ने मेहनत करके समतल बनाया। उसके बाद रोजाना सुबह-शाम नदी किनारे दौड़ लगाने के साथ व्यायाम भी करने लगे। इस बात की जानकारी जब अगल-बगल के गांव के युवाओं को हुई तो रीठा, मडपौना, मठिया, परसहर, पचरा, दुल्हापार, शनिचरा बाजार आदि गांव के युवा भी वहां दौड़ लगाने लगे। वर्ष 2018 और 2019 में पुलिस और सेना की भर्ती शुरू हुई तो कई युवकों ने भाग लिया। जिसमें सुनील चौधरी, राजन चौहान, संजय यादव, नन्हे उपाध्याय, विजय सिंह, दीपक यादव, अवनीश मिश्रा, संतोष यादव, नीरज यादव समेत 40 युवक सफलता अर्जित किए। अब इस मैदान पर सुबह शाम महेश्वरपुर और आस-पास के गांवों के युवा दौड़ लगाते हैं। दौड़ लगाने वाले शिवम सिंह, गुड्डू यादव, शुभम, रवि शर्मा आदि बताते हैं कि दौड़ का अभ्यास करने के लिए कोई खेल का मैदान नहीं है। जिसकी वजह से कुआनो नदी किनारे बनाए गए खेल के मैदान में वे लोग दौड़ का अभ्यास करते हैं। उनकी सोच है कि वे सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश व समाज की सेवा करेंगे। इसी खेल के मैदान से दौड़ का अभ्यास करके काफी संख्या में युवा मंजिल हासिल कर चुके हैं। उन्हें भी भरोसा है कि संसाधन की कमी आड़े नहीं आएगी, उन लोगों की मेहनत जरूर रंग लाएंगी।
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- गांव में सार्वजनिक जमीन नहीं होने से युवाओं ने कुआनो नदी किनारे बनाया खेल का मैदान
- महेश्वरपुर और आसपास के गांवों के युवा हर रोज सुबह-शाम करते हैं दौड़ का अभ्यास
- पांच साल के भीतर 40 से अधिक युवा हासिल कर चुके हैं सफलता
परमात्मा यादव
रोसया बाजार। लक्ष्य हासिल करने के लिए ईमानदारी से मेहनत की जाए तो सफलता मिल ही जाती है। ऐसा ही कुछ महेश्वरपुर और आसपास के युवाओं ने करके दिखाया है। युवाओं ने कुआनो नदी के किनारे खेल का मैदान बनाया और नियमित दौड़ का अभ्यास किया। पिछले पांच सालों में महेश्वरपुर और आसपास के गांवों के 40 से अधिक युवा सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश और समाज का सेवा कर रहे हैं।
महेश्वरपुर गांव निवासी आर्मी के जवान महेंद्र यादव, प्रकाश चंद्र मिश्रा बताते हैं कि उनके गांव में युवाओं के खेलकूद के लिए कोई सार्वजनिक जमीन नहीं थी। इस कारण यहां के युवा चाहकर भी खेलकूद और दौड़ का अभ्यास नहीं कर पा रहे थे। वर्ष 2017 में युवाओं के मन में विचार आया कि कुआनो नदी के किनारे खेल का मैदान बनाया जाए। नदी के किनारे की उबड़-खाबड़ जमीन को युवाओं ने मेहनत करके समतल बनाया। उसके बाद रोजाना सुबह-शाम नदी किनारे दौड़ लगाने के साथ व्यायाम भी करने लगे। इस बात की जानकारी जब अगल-बगल के गांव के युवाओं को हुई तो रीठा, मडपौना, मठिया, परसहर, पचरा, दुल्हापार, शनिचरा बाजार आदि गांव के युवा भी वहां दौड़ लगाने लगे। वर्ष 2018 और 2019 में पुलिस और सेना की भर्ती शुरू हुई तो कई युवकों ने भाग लिया। जिसमें सुनील चौधरी, राजन चौहान, संजय यादव, नन्हे उपाध्याय, विजय सिंह, दीपक यादव, अवनीश मिश्रा, संतोष यादव, नीरज यादव समेत 40 युवक सफलता अर्जित किए। अब इस मैदान पर सुबह शाम महेश्वरपुर और आस-पास के गांवों के युवा दौड़ लगाते हैं। दौड़ लगाने वाले शिवम सिंह, गुड्डू यादव, शुभम, रवि शर्मा आदि बताते हैं कि दौड़ का अभ्यास करने के लिए कोई खेल का मैदान नहीं है। जिसकी वजह से कुआनो नदी किनारे बनाए गए खेल के मैदान में वे लोग दौड़ का अभ्यास करते हैं। उनकी सोच है कि वे सेना और पुलिस में भर्ती होकर देश व समाज की सेवा करेंगे। इसी खेल के मैदान से दौड़ का अभ्यास करके काफी संख्या में युवा मंजिल हासिल कर चुके हैं। उन्हें भी भरोसा है कि संसाधन की कमी आड़े नहीं आएगी, उन लोगों की मेहनत जरूर रंग लाएंगी।
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