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Sant Kabir Nagar News: बढ़ रहा तापमान, गेहूं के लिए खतरे की घंटी
Fri, 24 Feb 2023 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 24 Feb 2023 11:31 PM IST
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त में लहलहाती गेहूं की फसल।संवाद
गेहूं की फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका, अन्य फसल पर भी दिख सकता है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। किसान सावधान हो जाएं, क्योंकि तापमान ने पिछले साल जैसी चाल पकड़ ली है। इससे गेहूं की फसल के लिए खतरे की घंटी बज गई है। अगले चार-पांच दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार जाने के आसार हैं। इससे गेहूं के साथ-साथ सरसों, चना व कुछ सब्जियों और फलों की फसल को नुकसान की आशंका उत्पन्न हो गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल को बचाने की सलाह दी है। कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। खेतों में हल्की नमी का बना रहना आवश्यक है। बढ़ते तापमान के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए हल्की सिंचाई करें। पानी का भराव न रहे, हल्की नमी लगातार बनी रहे। तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई न करें, अन्यथा गेहूं की फसल गिर सकती है।
दिन के बढ़ते तापमान के नुकसान से बचने के लिए खेत में पोटेशियम क्लोराइड का छिड़काव करें। यह शीघ्र परिपक्वता की स्थिति पर फसल को अनुकूल बनाने में मदद करेगा। आवश्यकत होने पर 200 ग्राम एमओपी को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यदि संभव हो तो किसान ड्रिप विधि से सिंचाई करेंं। पिछले साल गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था। यूं तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने के कई कारण थे, लेकिन इसमें एक मुख्य कारण फरवरी में अचानक तापमान का बढ़ना था। पिछले साल कहीं तापमान 35 से भी पार कर गया था। इसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बताया जा रहा है।
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कृषि वैज्ञानिक डाॅ. अरविंद सिंह ने बताया कि तापमान के बढ़ने से गेहूं की फसल को खतरे की आशंका है, लेकिन किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। गेहूं की फसल को बचाने के लिए खेतों की सिंचाई करना जरूरी है। इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेत में नमी बनी रहे। फरवरी में अचानक तापमान बढ़ा है, लेकिन गेहूं के उत्पादन के प्रभावित होने के लिए सिर्फ तापमान को जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता है।
...
फसल अवस्था
गेहूं प्रजनन चरण
सरसों शारीरिक परिपक्वता
चना शारीरिक परिपक्वता
बरसीम वनस्पति वृद्घि
सब्जियां एवं फल नमी की कमी
...
कोट
जनवरी और फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान बढ़ने लगा है, जो आगामी चार-पांच दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक या उससे पार जा सकता है। इसके बाद फसल पर नकारात्मक प्रभाव की स्थिति बन सकती है। दिन या रात का अधिक तापमान गेहूं के पौधे की स्वसन दर बढ़ा देता है। इससे फसल की अवधि कम हो जाती है। छोटी बाली में खाली दाना हो जाता है। उपज प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए खेत में हल्की नमी होना बेहद आवश्यक है।
-पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
...
तापमान बढ़ने से फ्लावरी तेज होगा। सब्जियों में फल तेजी के साथ निकलेगे। फलक में वृद्घि होगी। यदि इससे अधिक तापमान तो फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।
- संतोष दूबे, जिला उद्यान अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। किसान सावधान हो जाएं, क्योंकि तापमान ने पिछले साल जैसी चाल पकड़ ली है। इससे गेहूं की फसल के लिए खतरे की घंटी बज गई है। अगले चार-पांच दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार जाने के आसार हैं। इससे गेहूं के साथ-साथ सरसों, चना व कुछ सब्जियों और फलों की फसल को नुकसान की आशंका उत्पन्न हो गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल को बचाने की सलाह दी है। कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। खेतों में हल्की नमी का बना रहना आवश्यक है। बढ़ते तापमान के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए हल्की सिंचाई करें। पानी का भराव न रहे, हल्की नमी लगातार बनी रहे। तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई न करें, अन्यथा गेहूं की फसल गिर सकती है।
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दिन के बढ़ते तापमान के नुकसान से बचने के लिए खेत में पोटेशियम क्लोराइड का छिड़काव करें। यह शीघ्र परिपक्वता की स्थिति पर फसल को अनुकूल बनाने में मदद करेगा। आवश्यकत होने पर 200 ग्राम एमओपी को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यदि संभव हो तो किसान ड्रिप विधि से सिंचाई करेंं। पिछले साल गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था। यूं तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने के कई कारण थे, लेकिन इसमें एक मुख्य कारण फरवरी में अचानक तापमान का बढ़ना था। पिछले साल कहीं तापमान 35 से भी पार कर गया था। इसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बताया जा रहा है।
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कृषि वैज्ञानिक डाॅ. अरविंद सिंह ने बताया कि तापमान के बढ़ने से गेहूं की फसल को खतरे की आशंका है, लेकिन किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। गेहूं की फसल को बचाने के लिए खेतों की सिंचाई करना जरूरी है। इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेत में नमी बनी रहे। फरवरी में अचानक तापमान बढ़ा है, लेकिन गेहूं के उत्पादन के प्रभावित होने के लिए सिर्फ तापमान को जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता है।
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फसल अवस्था
गेहूं प्रजनन चरण
सरसों शारीरिक परिपक्वता
चना शारीरिक परिपक्वता
बरसीम वनस्पति वृद्घि
सब्जियां एवं फल नमी की कमी
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कोट
जनवरी और फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान बढ़ने लगा है, जो आगामी चार-पांच दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक या उससे पार जा सकता है। इसके बाद फसल पर नकारात्मक प्रभाव की स्थिति बन सकती है। दिन या रात का अधिक तापमान गेहूं के पौधे की स्वसन दर बढ़ा देता है। इससे फसल की अवधि कम हो जाती है। छोटी बाली में खाली दाना हो जाता है। उपज प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए खेत में हल्की नमी होना बेहद आवश्यक है।
-पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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तापमान बढ़ने से फ्लावरी तेज होगा। सब्जियों में फल तेजी के साथ निकलेगे। फलक में वृद्घि होगी। यदि इससे अधिक तापमान तो फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।
- संतोष दूबे, जिला उद्यान अधिकारी