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लाल निशान के ऊपर पहुंची राप्ती
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 30 Jul 2016 11:11 PM IST
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पानी बढ़ा।
- फोटो : अमर उजाला
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राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। खतरे के निशान 79.50 से 20 सेंटी मीटर ऊपर जलस्तर पहुंचते ही तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जहां एक तरफ नदी और तटबंध के बीच में मक्का और धान की फसलें अब पूरी तरह डूब चुकी है। वही तटबंध से सटे गांवों में लोग नदी के जलस्तर को देखकर दहशत में है।
मेंहदावल विकास खंड में स्थित राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जहां शुक्रवार को नदी के जलस्तर मे 79.60 की माप की गई थी वही नदी का जल स्थिर होने पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी, पर शनिवार की सुबह नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जो सुबह आठ बजे 79.65 मापा गया और दोपहर बाद 79.70 सेंटीमीटर पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर के कारण नदी पहले से ही तटबंध से सट चुकी थी, पर 20 सेंटीमीटर जलस्तर पहुंचते ही तटबंधों पर खतरा मंडराने लगा। खतरे के निशान से 20 सेमी जलस्तर उपर पहुंचते ही तटबंध पर पानी का जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है। तिवारीपुर और बेलौली स्टोर के बगल में हो रहे कटान पर जहां विभाग ने झांवा भरकर बोरियों की पिचिंग कराते हुए कटान को रोकने का प्रयास किया है। वही कई जगहों पर बैक रोलिंग के कारण तटबंध पर दबाव बना हुआ है। 1998 की बाढ़ विभिषिका में धन जन की हानि उठाने वाले कछार के ग्रामीण नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंतित नजर आ रहे है। हालात यह है कि तटबंध से सटे गांव बेलौली, डुमरियां बाबू, थरौली, तिवारीपुर, बान्डूमर, बढय़ा समेत एक दर्जन गांव जो राप्ती के मुहाने पर है। इन गांवों के लोगों में नदी के भयावह जलस्तर को देखकर दहशत है। इस संबंध में जूनियर इंजीनियर मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढने के कारण तटबंध पर दबाव है। हालात नियंत्रण में है। कहीं से कटान की स्थिति नही है। तटबंध की लगातार निगरानी की जा रही है। कही-कही बैकरोलिंग के कारण बंधे पर ज्यादे दबाव है। जिस पर पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है।
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मेंहदावल विकास खंड में स्थित राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जहां शुक्रवार को नदी के जलस्तर मे 79.60 की माप की गई थी वही नदी का जल स्थिर होने पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी, पर शनिवार की सुबह नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जो सुबह आठ बजे 79.65 मापा गया और दोपहर बाद 79.70 सेंटीमीटर पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर के कारण नदी पहले से ही तटबंध से सट चुकी थी, पर 20 सेंटीमीटर जलस्तर पहुंचते ही तटबंधों पर खतरा मंडराने लगा। खतरे के निशान से 20 सेमी जलस्तर उपर पहुंचते ही तटबंध पर पानी का जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है। तिवारीपुर और बेलौली स्टोर के बगल में हो रहे कटान पर जहां विभाग ने झांवा भरकर बोरियों की पिचिंग कराते हुए कटान को रोकने का प्रयास किया है। वही कई जगहों पर बैक रोलिंग के कारण तटबंध पर दबाव बना हुआ है। 1998 की बाढ़ विभिषिका में धन जन की हानि उठाने वाले कछार के ग्रामीण नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंतित नजर आ रहे है। हालात यह है कि तटबंध से सटे गांव बेलौली, डुमरियां बाबू, थरौली, तिवारीपुर, बान्डूमर, बढय़ा समेत एक दर्जन गांव जो राप्ती के मुहाने पर है। इन गांवों के लोगों में नदी के भयावह जलस्तर को देखकर दहशत है। इस संबंध में जूनियर इंजीनियर मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढने के कारण तटबंध पर दबाव है। हालात नियंत्रण में है। कहीं से कटान की स्थिति नही है। तटबंध की लगातार निगरानी की जा रही है। कही-कही बैकरोलिंग के कारण बंधे पर ज्यादे दबाव है। जिस पर पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है।
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