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आईसीयू में पहुंचकर टूटी इलाज की आस

Fri, 15 Jul 2016 11:44 PM IST
शोभित कुमार पांडेय/ sant kabir nagar 
शोभित कुमार पांडेय/ sant kabir nagar  Updated Fri, 15 Jul 2016 11:44 PM IST
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reached ICU hope of  treatment broken
 सेमरियावां ब्लॉक के टेमारहमत गांव की रंजना (22) के दोनों गुर्दे खराब हैं। गरीबी से बेजार परिवार इलाज कराने में कमजोर पड़ा तो शहर के व्यवसायी सुनील छापड़िया ने मदद को हाथ बढ़ाया। जानकारी जुटाई और रंजना को लेकर पीजीआई पहुंचे। उम्मीद थी कि अंत्योदय कार्ड से इलाज में मदद मिल जाएगी। लेकिन पीजीआई स्थित बीपीएल सेल में सत्यापन कराने पर पता चला कि उनका नाम काट कर किसी और को कार्ड जारी किया जा चुका है।
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शुक्रवार को रंजना के पति ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर दुबारा अंत्योदय कार्ड बनवाने की मांग की। ताकी बीमार पत्नी का उपचार हो सके। पति प्रेमचंद ने बताया कि उनके पास सिर्फ दस विस्वा जमीन है। गरीबी के चलते वह रंजना का उपचार नहीं करा पा रहा है। पहले तो जेवर बेच कर दवा कराई। फिर कर्ज लेकर दवा पर खर्च किया। महंगे उपचार से हिम्मत टूटी तो मदद में शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी सुनील छापड़िया आगे आए। रंजना को उपचार के लिए पीजीआई लखनऊ ले गए। बताया कि अंत्योदय राशन कार्ड के सहारे पीजीआई में पत्नी का उपचार हो जाएगा।
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पत्नी को आईसीयू में भर्ती कराकर पीजीआई में बने बीपीएल सेल में जब कार्ड को जांच के लिए दिया तो पता चला कि कार्ड निरस्त कर दूसरे के नाम से जारी कर दिया गया है। डॉक्टर कह रहे हैं कि ऑपरेशन जरूरी है, लेकिन गरीबी इसमें बाधा बनी हुई है।  वहीं डीएम डॉ. सरोज कुमार ने बताया कि प्रेमचंद का अंत्योदय कार्ड फिर से जारी करवाएंगे। यह जांच भी कराएंगे कि ऐसा आखिर कैसे हुआ और इसका जिम्मेदार कौन है। इसके अलावा गरीब बीमार महिला का ठीक से उपचार हो सके, इसके लिए उसे डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दिलाएंगे। पूूरी कोशिश होगी कि गुर्दे की बीमारी से जूझ रही महिला का ठीक से उपचार हो सके।
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नियति दे रही झटके पर झटके ः रंजना को गुर्दे की बीमारी ने एक साल पहले अपनी गिरफ्त में लिया, लेकिन इससे पहले ही इस परिवार के साथ नियति ने क्रूर खेल खेलना शुरू कर दिया था। कुछ साल पहले प्रेमचंद एक दुर्घटना में अपना हाथ गंवा बैठा। वहीं ढाई माह पहले बेटा पैदा हुआ तो उसकी दोनों आंखें खराब हो गईं। यह बताते हुए प्रेमचंद फफक पड़ता है। रोते हुए कहता है कि इस गरीबी में पत्नी की जिंदगी बचाए या बेटे की जीवन में वापस रोशनी ले आए।
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