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कच्ची शराब बनी चुनौती, ओवर रेटिंग ने बढ़ाया सिरदर्द
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कच्ची शराब बनी चुनौती, ओवर रेटिंग ने बढ़ाया सिरदर्द
संतकबीरनगर। जिले में अवैध कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने की चुनौती तो बनी ही है, इसके साथ लाइसेंसी दुकानों पर हो रही ओवर रेटिंग को रोकना आबकारी विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। नवागत जिला आबकारी अधिकारी ने इससे निपटने की रणनीति बनाई है। उनकी रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन कच्ची शराब के फैले संजाल और लाइसेंसी दुकानों से हो रही ओवर रेटिंग की शिकायतें लोगों की जुबान पर तैर रही हैं।
जिले में लाइसेंसी देशी शराब की 106, अंग्रेजी की 47 और बीयर की 42 दुकानें हैं। एक मॉडल शॉप भी है। तीन सर्किल खलीलाबाद, धनघटा और मेंहदावल में जिला बंटा है। तीनों सर्किल में एक-एक आबकारी निरीक्षकों की तैनाती है। कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री की बात करें तो आबकारी विभाग की सूची में ही दो दर्जन से अधिक जगह संवेदनशील हैं। इनमें डिहुलिया, अशरफपुर, चिरैयाडाड़, घोरांग, तुर्कवलिया, बेलदारीपुर जैसी जगह कच्ची शराब के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। कई ईंट भट्ठों पर भी कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री होती है। लाइसेंस दुकानों से ओवर रेटिंग की बात करें तो सिर्फ आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में ही अप्रैल-2019 से अब तक देशी की सात दुकानों, अंग्रेजी की तीन दुकानों पर और बीयर की तीन दुकानों पर मामला पकड़ा जा चुका है। लाइसेंसी दुकानों पर अन्य कई गड़बड़िया जैसे साइन बोर्ड न लगा होना, चेतावनी सूचना पट्ट, रेट बोर्ड, स्टॉक रजिस्टर दुरुस्त न होने जैसे मामले पकड़े जा चुके हैं। आबकारी विभाग की ओर से 13, 13,500 रुपये जुर्माने की रकम भी वसूली जा चुकी है। अब सवाल यह है कि आखिर अवैध कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने के साथ लाइसेंसी दुकानों पर ओवर रेटिंग को रोकने में आबकारी विभाग क्यों कमजोर पड़ रहा है। इसको लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला आबकारी अधिकारी राम प्रकाश तिवारी बताते हैं कि कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री वाले संवेदनशील स्थानों की सूची तैयार कराई गई है। सर्किल वार ऐसी जगहों पर अलग-अलग टीमों से छापा डलवा जाएगा। इसमें पुलिस की भी मदद ली जाएगी। जहां तक रहा सवाल ओवर रेटिंग का तो सभी आबकारी निरीक्षकों को निर्देश दिए गए है कि अपने-अपने क्षेत्रों की लाइसेंसी दुकानों पर नियमित चेकिंग करें। रेंडम चेकिंग कर ऐसे मामले पकड़े और फिर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके साथ सूचना तंत्र को बढ़ाने की ओर प्रयास है। उनकी ओर से भी औचक निरीक्षण किया जाएगा। जिले में ओवर रेटिंग नहीं होने दी जाएगी। इसमें संलिप्त पाए जाने वाले लाइसेंसधारियों की दुकानों पर जुर्माने लगाने के साथ निरस्त्री करण तक की जाएगी।
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संतकबीरनगर। जिले में अवैध कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने की चुनौती तो बनी ही है, इसके साथ लाइसेंसी दुकानों पर हो रही ओवर रेटिंग को रोकना आबकारी विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। नवागत जिला आबकारी अधिकारी ने इससे निपटने की रणनीति बनाई है। उनकी रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन कच्ची शराब के फैले संजाल और लाइसेंसी दुकानों से हो रही ओवर रेटिंग की शिकायतें लोगों की जुबान पर तैर रही हैं।
जिले में लाइसेंसी देशी शराब की 106, अंग्रेजी की 47 और बीयर की 42 दुकानें हैं। एक मॉडल शॉप भी है। तीन सर्किल खलीलाबाद, धनघटा और मेंहदावल में जिला बंटा है। तीनों सर्किल में एक-एक आबकारी निरीक्षकों की तैनाती है। कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री की बात करें तो आबकारी विभाग की सूची में ही दो दर्जन से अधिक जगह संवेदनशील हैं। इनमें डिहुलिया, अशरफपुर, चिरैयाडाड़, घोरांग, तुर्कवलिया, बेलदारीपुर जैसी जगह कच्ची शराब के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। कई ईंट भट्ठों पर भी कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री होती है। लाइसेंस दुकानों से ओवर रेटिंग की बात करें तो सिर्फ आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में ही अप्रैल-2019 से अब तक देशी की सात दुकानों, अंग्रेजी की तीन दुकानों पर और बीयर की तीन दुकानों पर मामला पकड़ा जा चुका है। लाइसेंसी दुकानों पर अन्य कई गड़बड़िया जैसे साइन बोर्ड न लगा होना, चेतावनी सूचना पट्ट, रेट बोर्ड, स्टॉक रजिस्टर दुरुस्त न होने जैसे मामले पकड़े जा चुके हैं। आबकारी विभाग की ओर से 13, 13,500 रुपये जुर्माने की रकम भी वसूली जा चुकी है। अब सवाल यह है कि आखिर अवैध कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने के साथ लाइसेंसी दुकानों पर ओवर रेटिंग को रोकने में आबकारी विभाग क्यों कमजोर पड़ रहा है। इसको लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला आबकारी अधिकारी राम प्रकाश तिवारी बताते हैं कि कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री वाले संवेदनशील स्थानों की सूची तैयार कराई गई है। सर्किल वार ऐसी जगहों पर अलग-अलग टीमों से छापा डलवा जाएगा। इसमें पुलिस की भी मदद ली जाएगी। जहां तक रहा सवाल ओवर रेटिंग का तो सभी आबकारी निरीक्षकों को निर्देश दिए गए है कि अपने-अपने क्षेत्रों की लाइसेंसी दुकानों पर नियमित चेकिंग करें। रेंडम चेकिंग कर ऐसे मामले पकड़े और फिर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके साथ सूचना तंत्र को बढ़ाने की ओर प्रयास है। उनकी ओर से भी औचक निरीक्षण किया जाएगा। जिले में ओवर रेटिंग नहीं होने दी जाएगी। इसमें संलिप्त पाए जाने वाले लाइसेंसधारियों की दुकानों पर जुर्माने लगाने के साथ निरस्त्री करण तक की जाएगी।
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