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राप्ती और घाघरा ने खतरे के निशान काे पार किया
sant kabir nagar
Updated Fri, 29 Jul 2016 12:16 AM IST
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राप्ती का जलस्तर बढ़ने से कई एकड़ फसल डूब गई है।
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर जिले में राप्ती और घाघरा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। इससे अब तक करीब 325 एकड़ पानी में डूब चुकी है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से दोनों नदियों और बंधों के किनारे बसे लोग सहमे हुए हैं। कई स्थानों पर लोग रतजगा कर रहे हैं। राप्ती का जलस्तर बढ़ने से नदी तिवारीपुर गांव के समीप तटबंध पर कटान कर रही है। वहीं करमैनी से लेकर बेलौली तक नदी का जलस्तर तटबंध से सट चुका है।
करमैनी-बेलौली बांध का कई सालों से समुचित रखरखाव नहीं हुआ है। इससे कारण बंधे के किनारे बसे लोग सहमे हैं कि जर्जर तटबंध पानी का कितना दबाव झेल पाएगा। नौगा से डुमरियां तक आठ किलोमीटर पिच मार्ग के निर्माण में तटबंध व नदी के बीच से मिट्टी की खुदाई किया जाना तटबंध की सुरक्षा की दृष्टि से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों ने उपजिलाधिकारी मेंहदावल को इस संदर्भ में पत्र मे लिखा था पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। तिवारीपुर में राप्ती के कटान को रोकने के लिए विभागीय कर्मचारी पेड़ों की टहनियां डालकर नदी की धारा को दूसरी तरफ मोड़ने में जुटे हैं। सहायक अभियंता वीके मोहन ने बताया कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। यदि जलस्तर बढ़ने की गति ऐसी ही रही तो तटबंध पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। सुरक्षा की दृष्टि से लगातार पेट्रोलिंग कराई जा रही।
वहीं हैंसर क्षेत्र में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। तेेजी से हो रही कटान की वजह से शवदाह स्थल पर भी खतरा बढ़ रहा है। किसानों का दर्द है कि नदी की कटान से रोजाना उपजाऊ भूमि कट रही है, यही हाल रहा तो जल्द ही नदी रामपुर, मकदूमपुर बांध को भी अपना निशाना बनाना शुरु कर देगी। नदी खडकपुर गांव के सामने रामपुर, मकदूमपुर बांध से महज 200 मीटर के फासले पर कटान करती हुई बांध की तरफ बढ़ रही है। नदी के कटान से अब तक करीब ढाई सौ एकड़ उपजाऊ जमीन फसल समेत नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
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इस समय कटान करते हुए नदी उस स्थान को काट रही है, जहां दो वर्ष पूर्व लाखो रुपये की लागत से शव दाह केंद्र बना है। ग्रामीण भगवान दास, सरयू, परमेश्वर, दीनदयाल आदि का कहना है कि जिस गति से नदी कटान कर रही है, उससे मालूम हो रहा है कि जल्द ही बांध तक पहुंच कर नदी कटान करेगी। गांव वालो का कहना है कि विधायक और अन्य नेता यहां आकर कटान देखने के बाद रोक थाम कराने का आश्वासन दिए था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एसडीएम इंद्रभान तिवारी ने बताया कि खडकपुर में कटान होने की जानकारी उन्हें नहीं है। कटान का पता कराकर इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को देगे। ड्रेेनेज खंड के एक्सईएन दिनेश कुमार तिवारी ने बताया कि घाघरा से बांध को कोई खतरा नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
लगातार बढ़ रहा नदियों का जलस्तर ः संतकबीरनगर। घाघरा की डेंजर लाइन 92.730 मीटर है। मंगलवार सुबह आठ बजे नदी का बहाव 92.840 मीटर और शाम चार बजे 92.905 मीटर था। वहीं राप्ती की डेंजर लाइन 79.50 मीटर है। यहां सुबह आठ बजे बहाव 79.42 और शाम चार बजे 79.53 मीटर था। जबकि कुआनो की डेंजर लाइन 78.65 मीटर है। यहां सुबह नदी का जलस्तर सुबह आठ बजे 75.830 और शाम चार बजे 75.850 मीटर था।
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करमैनी-बेलौली बांध का कई सालों से समुचित रखरखाव नहीं हुआ है। इससे कारण बंधे के किनारे बसे लोग सहमे हैं कि जर्जर तटबंध पानी का कितना दबाव झेल पाएगा। नौगा से डुमरियां तक आठ किलोमीटर पिच मार्ग के निर्माण में तटबंध व नदी के बीच से मिट्टी की खुदाई किया जाना तटबंध की सुरक्षा की दृष्टि से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों ने उपजिलाधिकारी मेंहदावल को इस संदर्भ में पत्र मे लिखा था पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। तिवारीपुर में राप्ती के कटान को रोकने के लिए विभागीय कर्मचारी पेड़ों की टहनियां डालकर नदी की धारा को दूसरी तरफ मोड़ने में जुटे हैं। सहायक अभियंता वीके मोहन ने बताया कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। यदि जलस्तर बढ़ने की गति ऐसी ही रही तो तटबंध पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। सुरक्षा की दृष्टि से लगातार पेट्रोलिंग कराई जा रही।
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वहीं हैंसर क्षेत्र में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। तेेजी से हो रही कटान की वजह से शवदाह स्थल पर भी खतरा बढ़ रहा है। किसानों का दर्द है कि नदी की कटान से रोजाना उपजाऊ भूमि कट रही है, यही हाल रहा तो जल्द ही नदी रामपुर, मकदूमपुर बांध को भी अपना निशाना बनाना शुरु कर देगी। नदी खडकपुर गांव के सामने रामपुर, मकदूमपुर बांध से महज 200 मीटर के फासले पर कटान करती हुई बांध की तरफ बढ़ रही है। नदी के कटान से अब तक करीब ढाई सौ एकड़ उपजाऊ जमीन फसल समेत नदी की धारा में समाहित हो चुकी है।
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इस समय कटान करते हुए नदी उस स्थान को काट रही है, जहां दो वर्ष पूर्व लाखो रुपये की लागत से शव दाह केंद्र बना है। ग्रामीण भगवान दास, सरयू, परमेश्वर, दीनदयाल आदि का कहना है कि जिस गति से नदी कटान कर रही है, उससे मालूम हो रहा है कि जल्द ही बांध तक पहुंच कर नदी कटान करेगी। गांव वालो का कहना है कि विधायक और अन्य नेता यहां आकर कटान देखने के बाद रोक थाम कराने का आश्वासन दिए था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एसडीएम इंद्रभान तिवारी ने बताया कि खडकपुर में कटान होने की जानकारी उन्हें नहीं है। कटान का पता कराकर इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को देगे। ड्रेेनेज खंड के एक्सईएन दिनेश कुमार तिवारी ने बताया कि घाघरा से बांध को कोई खतरा नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
लगातार बढ़ रहा नदियों का जलस्तर ः संतकबीरनगर। घाघरा की डेंजर लाइन 92.730 मीटर है। मंगलवार सुबह आठ बजे नदी का बहाव 92.840 मीटर और शाम चार बजे 92.905 मीटर था। वहीं राप्ती की डेंजर लाइन 79.50 मीटर है। यहां सुबह आठ बजे बहाव 79.42 और शाम चार बजे 79.53 मीटर था। जबकि कुआनो की डेंजर लाइन 78.65 मीटर है। यहां सुबह नदी का जलस्तर सुबह आठ बजे 75.830 और शाम चार बजे 75.850 मीटर था।