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Sant Kabir Nagar News: अफसरों की अनदेखी, जनता झेल रही दुश्वारियां
Thu, 08 Jun 2023 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 08 Jun 2023 11:21 PM IST
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मेंहदावल बाईपास के समीप स्थित सिचाई कालोनी इसी में बनना था रोडवेज का कार्यालय।संवाद
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संतकबीरनगर। जिले के विकास की तमाम योजनाओं को जमीन की दरकार है, लेकिन अफसरों की अनदेखी के कारण जमीन की तलाश पूरी नहीं हो पा रही है। सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। इससे आम जनता दुश्वारियां झेल रही है। कोई योजना दो साल से, तो कोई छह माह से जमीन न मिलने की वजह से आकार नहीं ले पा रही है। इसमें रोडवेज बस स्टेशन, मेडिकल कॉलेज, डंपिंग ग्राउंड, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि शामिल हैं।
जिले का सृजन 1997 में हुआ था। करीब 26 साल हो गए, लेकिन रोडवेज बस स्टेशन की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। अब तक प्रशासन व परिवहन निगम की कवायद सिर्फ जमीन खोजने तक ही सिमटी रही है। कई जगह जमीन की तलाश हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब मेंहदावल बाईपास के निकट ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को रोडवेज बस स्टेशन बनाने के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन इसमें भी कई पेच हैं। जमीन की तलाश पूूरी न होने के कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
खलीलाबाद के मेंहदावल बाईपास पर खुले आसमान तले लोगों को बस का इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, ऐसे में यात्री दुश्वारियां झेल रहे हैं। यहां यात्रियों के न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही शेड लगा है।
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डंपिंग ग्राउंड न होने से खुले में गिराया जा रहा कूड़ा
नगर पालिका परिषद खलीलाबाद में दो वर्षों से डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रही है। ताकि कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जा सके। जमीन की कमी इसमें रोड़ा बनी हुई है। हालांकि पालिका प्रशासन का दावा है कि जमीन की तलाश की जा रही है। इस हाल में शहर से प्रतिदिन निकलने वाला करीब 300 क्विंटल कूड़ा औद्योगिक क्षेत्र में पार्क की जमीन पर गिराया जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे भी कूड़ा गिरा दिया जा रहा है। यदि डंपिंग ग्राउंड बन जाता तो लोगों को प्रदूषित वातावरण से राहत मिलती।
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मेडिकल कॉलेज व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भी जमीन की हो रही तलाश
शासन ने मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए दो साल से जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन बनकटिया और मदराडीह के बीच देखी गई है, लेकिन वह भी अब तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसी तरह जल निगम शहरी विभाग को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए जमीन की जरूरत है। पिछले छह माह से जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। इसकी वजह से काम शुुरू नहीं हो पा रहा है।
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जिला सृजन के बाद भी अब तक रोडवेज बस अड्डा नहीं बन सका है। मौसम की मार झेलते हुए यात्रियों को खुले आसमान तले मेंहदावल बाईपास पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यदि बस अड्डा होता तो इस समस्या से राहत मिलती।
-चंद्रभान, शहरवासी
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दो साल पहले जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा हुई थी, उम्मीद थी कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल से मरीजों को रेफर किए जाने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है। यदि मेडिकल कॉलेज खुल जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।
-राहुल कुमार, शहरवासी
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नालों का पानी आमी नदी में गिरता है, इससे आमी नदी प्रदूूषित हो गई है। यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की योजना बनी, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर सकी है। यदि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बन जाता तो पानी को शुद्ध करके छोड़ा जाता तो शायद आमी नदी प्रदूषित नहीं होती।
-सरवर अली, शहरवासी
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शहर में घर-घर कूूड़ा उठाने की व्यवस्था बंद है। समय से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। डंपिंग ग्राउंड न होने से औद्योगिक क्षेत्र सहित कई स्थानों पर कूड़ा गिरा दिया जा रहा है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-डॉ. मदन कुमार, शहरवासी
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रोडवेज बस अड्डा के लिए ड्रेनेज खंड कार्यालय और उसके परिसर की जमीन को चिह्नित कराकर रिपोर्ट प्रमुख सचिव परिवहन को भेजी गई है। वहीं से इसका निर्णय होगा। वैसे जमीन की अन्यत्र भी तलाश कराई जा रही है। डंपिंग ग्राउंड, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, मेडिकल कॉलेज की तलाश के लिए एसडीएम को लगाया गया है।
-संदीप कुमार, डीएम
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जिले का सृजन 1997 में हुआ था। करीब 26 साल हो गए, लेकिन रोडवेज बस स्टेशन की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। अब तक प्रशासन व परिवहन निगम की कवायद सिर्फ जमीन खोजने तक ही सिमटी रही है। कई जगह जमीन की तलाश हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब मेंहदावल बाईपास के निकट ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को रोडवेज बस स्टेशन बनाने के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन इसमें भी कई पेच हैं। जमीन की तलाश पूूरी न होने के कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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खलीलाबाद के मेंहदावल बाईपास पर खुले आसमान तले लोगों को बस का इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, ऐसे में यात्री दुश्वारियां झेल रहे हैं। यहां यात्रियों के न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही शेड लगा है।
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डंपिंग ग्राउंड न होने से खुले में गिराया जा रहा कूड़ा
नगर पालिका परिषद खलीलाबाद में दो वर्षों से डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रही है। ताकि कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जा सके। जमीन की कमी इसमें रोड़ा बनी हुई है। हालांकि पालिका प्रशासन का दावा है कि जमीन की तलाश की जा रही है। इस हाल में शहर से प्रतिदिन निकलने वाला करीब 300 क्विंटल कूड़ा औद्योगिक क्षेत्र में पार्क की जमीन पर गिराया जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे भी कूड़ा गिरा दिया जा रहा है। यदि डंपिंग ग्राउंड बन जाता तो लोगों को प्रदूषित वातावरण से राहत मिलती।
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मेडिकल कॉलेज व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भी जमीन की हो रही तलाश
शासन ने मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए दो साल से जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन बनकटिया और मदराडीह के बीच देखी गई है, लेकिन वह भी अब तक फाइनल नहीं हो पाई है। इसी तरह जल निगम शहरी विभाग को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए जमीन की जरूरत है। पिछले छह माह से जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। इसकी वजह से काम शुुरू नहीं हो पा रहा है।
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जिला सृजन के बाद भी अब तक रोडवेज बस अड्डा नहीं बन सका है। मौसम की मार झेलते हुए यात्रियों को खुले आसमान तले मेंहदावल बाईपास पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यदि बस अड्डा होता तो इस समस्या से राहत मिलती।
-चंद्रभान, शहरवासी
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दो साल पहले जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा हुई थी, उम्मीद थी कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल से मरीजों को रेफर किए जाने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है। यदि मेडिकल कॉलेज खुल जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।
-राहुल कुमार, शहरवासी
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नालों का पानी आमी नदी में गिरता है, इससे आमी नदी प्रदूूषित हो गई है। यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की योजना बनी, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर सकी है। यदि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बन जाता तो पानी को शुद्ध करके छोड़ा जाता तो शायद आमी नदी प्रदूषित नहीं होती।
-सरवर अली, शहरवासी
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शहर में घर-घर कूूड़ा उठाने की व्यवस्था बंद है। समय से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। डंपिंग ग्राउंड न होने से औद्योगिक क्षेत्र सहित कई स्थानों पर कूड़ा गिरा दिया जा रहा है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-डॉ. मदन कुमार, शहरवासी
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रोडवेज बस अड्डा के लिए ड्रेनेज खंड कार्यालय और उसके परिसर की जमीन को चिह्नित कराकर रिपोर्ट प्रमुख सचिव परिवहन को भेजी गई है। वहीं से इसका निर्णय होगा। वैसे जमीन की अन्यत्र भी तलाश कराई जा रही है। डंपिंग ग्राउंड, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, मेडिकल कॉलेज की तलाश के लिए एसडीएम को लगाया गया है।
-संदीप कुमार, डीएम