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बेमौसम बारिश से घटी भरुआ मिर्च की पैदावार, कीमत में हुआ इजाफा
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बेमौसम बारिश से घटी भरुआ मिर्च की पैदावार, कीमत में हुआ इजाफा
नकदी फसल होने की वजह से भरुआ मिर्च की खेती पर किसानों का जोर
125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा मिर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तहसील क्षेत्र धनघटा में भरुआ मिर्च की खेती अधिक संख्या में किसान करते हैं। बेमौसम हुई बारिश से भरुआ मिर्च की पैदावार कम हो गई है। जबकि पिछले सालों की तुलना में मूल्य में दोगुना से अधिक का मुनाफा है। पैदावार कम होने से किसान परेशान हैं।
गन्ना और आलू की फसल से मोहभंग होने के बाद किसान भरुवा मिर्च की खेती करना शुरू कर दिए। इस वर्ष भरुवा मिर्च के दाम में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बेमौसम हुई बारिश ने भरुवा मिर्च की फसल को कमजोर कर दिया। जिससे पैदावार कम होने के कारण किसान पछता रहे हैं। क्षेत्र के औराडाड, रामपुर, तिलहा, खैरगाड, कटेया, हरेवा, दौलतपुर, बालमपुर, छपरा मगरबी, चपरा पूर्वी, कुरमौल आदि गांव के किसान पहले गन्ने की खेती बड़े पैमाने करते थे। खलीलाबाद शुगर मिल बंद होने और गन्ने के भुगतान में देरी होने के कारण किसानों ने गन्ने की खेती करना बंद कर दिया। इसके विकल्प के रूप में आलू की खेती शुरू किया, लेकिन जंगली सूअरों के जरिए आलू को पहुंचाए जा रहे नुकसान से किसान परेशान हो गए। किसानों ने आलू की खेती का रकबा घटाया और भरुवा मिर्च की खेती पर जोर दिया। छपरा मगर्वी गांव निवासी किसान देवेंद्र का कहना है कि इस बार पांच बीघा मिर्च की खेती किए थे, लेकिन बरसात होने से खेत में पानी भर गया और सारी फसल सूखकर नष्ट हो गई। खैरगाड गांव निवासी किसान कृष्ण चंद्र का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण भरुवा मिर्च की खेती पर दुष्प्रभाव पड़ा और मिर्च अधिक सूख गई। जिसके कारण पैदावार कम हो रही है। जबकि इस वर्ष मिर्च की कीमत 125 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। मदरा गांव निवासी किसान रामचंद्र का कहना है कि इस वर्ष क्षेत्र में बेमौसम बारिश अधिक हुई। जिसकी वजह से मिर्च की खेती पर बुरा असर पड़ा। इस साल मिर्च की बिक्री में मुनाफा अधिक है, लेकिन पैदावार घट गई है। हरेवा गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद मौर्य का कहना है कि बीते साल की अपेक्षा इस साल मिर्च का मूल्य दो गुना से भी अधिक है, लेकिन पैदावार आधे से भी कम हो गई। यहां के किसान धनघटा में लगने वाली साप्ताहिक बाजार में मिर्च लेकर जाते हैं, जहां आसानी से बाहर से आए व्यापारी खरीद लेते हैं। यहां की मिर्च व्यापारियों के माध्यम से उत्तरांचल के साथ कोलकाता मुंबई आदि महानगरों में निर्यात की जाती है। राजेंद्र प्रसाद मौर्य कहते हैं कि इस साल किसानों के लिए भरुवा मिर्च लाल सोना के समान है, लेकिन पैदावार कम होने से किसानों को नुकसान पहुंचा है।
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नकदी फसल होने की वजह से भरुआ मिर्च की खेती पर किसानों का जोर
125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा मिर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तहसील क्षेत्र धनघटा में भरुआ मिर्च की खेती अधिक संख्या में किसान करते हैं। बेमौसम हुई बारिश से भरुआ मिर्च की पैदावार कम हो गई है। जबकि पिछले सालों की तुलना में मूल्य में दोगुना से अधिक का मुनाफा है। पैदावार कम होने से किसान परेशान हैं।
गन्ना और आलू की फसल से मोहभंग होने के बाद किसान भरुवा मिर्च की खेती करना शुरू कर दिए। इस वर्ष भरुवा मिर्च के दाम में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बेमौसम हुई बारिश ने भरुवा मिर्च की फसल को कमजोर कर दिया। जिससे पैदावार कम होने के कारण किसान पछता रहे हैं। क्षेत्र के औराडाड, रामपुर, तिलहा, खैरगाड, कटेया, हरेवा, दौलतपुर, बालमपुर, छपरा मगरबी, चपरा पूर्वी, कुरमौल आदि गांव के किसान पहले गन्ने की खेती बड़े पैमाने करते थे। खलीलाबाद शुगर मिल बंद होने और गन्ने के भुगतान में देरी होने के कारण किसानों ने गन्ने की खेती करना बंद कर दिया। इसके विकल्प के रूप में आलू की खेती शुरू किया, लेकिन जंगली सूअरों के जरिए आलू को पहुंचाए जा रहे नुकसान से किसान परेशान हो गए। किसानों ने आलू की खेती का रकबा घटाया और भरुवा मिर्च की खेती पर जोर दिया। छपरा मगर्वी गांव निवासी किसान देवेंद्र का कहना है कि इस बार पांच बीघा मिर्च की खेती किए थे, लेकिन बरसात होने से खेत में पानी भर गया और सारी फसल सूखकर नष्ट हो गई। खैरगाड गांव निवासी किसान कृष्ण चंद्र का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण भरुवा मिर्च की खेती पर दुष्प्रभाव पड़ा और मिर्च अधिक सूख गई। जिसके कारण पैदावार कम हो रही है। जबकि इस वर्ष मिर्च की कीमत 125 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। मदरा गांव निवासी किसान रामचंद्र का कहना है कि इस वर्ष क्षेत्र में बेमौसम बारिश अधिक हुई। जिसकी वजह से मिर्च की खेती पर बुरा असर पड़ा। इस साल मिर्च की बिक्री में मुनाफा अधिक है, लेकिन पैदावार घट गई है। हरेवा गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद मौर्य का कहना है कि बीते साल की अपेक्षा इस साल मिर्च का मूल्य दो गुना से भी अधिक है, लेकिन पैदावार आधे से भी कम हो गई। यहां के किसान धनघटा में लगने वाली साप्ताहिक बाजार में मिर्च लेकर जाते हैं, जहां आसानी से बाहर से आए व्यापारी खरीद लेते हैं। यहां की मिर्च व्यापारियों के माध्यम से उत्तरांचल के साथ कोलकाता मुंबई आदि महानगरों में निर्यात की जाती है। राजेंद्र प्रसाद मौर्य कहते हैं कि इस साल किसानों के लिए भरुवा मिर्च लाल सोना के समान है, लेकिन पैदावार कम होने से किसानों को नुकसान पहुंचा है।
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