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कबीर की अमिया को भगीरथ का इंतजार

Sat, 09 Oct 2021 11:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 11:06 PM IST
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problem of aami river
मगहर कबीर चौरा परिसर में स्थित आमी नदी।संवाद - फोटो : KHALILABAD
कबीर की अमिया को भगीरथ का इंतजार
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एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने मांगी थी रिपोर्ट, बना था डीपीआर
खलीलाबाद व मगहर सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का है प्रस्ताव पर अब तक नहीं लगी मुहर
नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्र में होना है पौधरोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कबीर की अमिया को प्रदूषण मुक्त बनाने एवं उसमें पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अब भी भगीरथ का इंतजार है। इतना जरूर है कि नेेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पहल पर जिला प्रशासन ने डीपीआर बनाकर शासन को भेजा है, लेकिन अब तक इस पर शासन की मुहर नहीं लग सकी है।

सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित हो चुका है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व सिवरेज के प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से आंदोलन चल रहा है। अब पूरा मामला एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी के पास है। करीब दो साल पहले हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायामूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम क्षोर तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान खलीलाबाद डाक बंगले पर डीएम की मौजूदगी में कमेटी ने नदी के प्रदूषण के मामले पर चर्चा की थी। टीम ने गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खुदाई आदि के भी निर्देश दिए थे। जल निगम के प्रभारी एक्सईएन अजय कुमार उपाध्याय का कहना है कि आमी नदी को निर्मल बनाने के लिए एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने जो निर्देश दिए हैं, उनके अनुरूप प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जैसे ही इसकी मंजूरी मिलेगी, काम शुरू करा दिया जाएगा।
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