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Sant Kabir Nagar News: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से किराना सामानों की भी बढ़ी कीमत
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संतकबीरनगर/लोहरैया। पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों का असर अब रसोई घर तक पहुंच गया है। परिवहन खर्च बढ़ने से किराना बाजार में खाद्य सामग्री के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे घरेलू बजट भी प्रभावित हो गया है। दो सप्ताह में पेट्रोल-डीजल के दामों में चार बार वृद्धि होने के बाद अब रोजमर्रा के जरूरत की वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं।
बाजार में सरसों तेल, दाल, चावल और चीनी समेत कई आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि दर्ज की गई है। सरसों तेल का दाम 165 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 175 रुपये किलो पहुंच गया है। वहीं अरहर दाल 95 रुपये किलो से बढ़कर 110 रुपये किलो बिक रही है। चीनी की बोरी जो पिछले सप्ताह 2150 रुपये में मिल रही थी, अब 2220 रुपये में बिक रही है। दुकानदारों ने चीनी के दाम में करीब दो रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है।
खलीलाबाद में एक मार्ट के प्रोपराइटर राजीव चौरसिया ने कहा कि इन दिनों दाल, रिफाइंड, सरसों तेल सभी के दाम बढ़े हैं। दूध की कीमत में भी दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स के दाम 50 से 60 रुपये किलो तक बढ़ गए हैं, जबकि लहसुन करीब 30 रुपये किलो महंगा हो गया है।
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बढ़ती कीमतों के कारण परिवारों को अपने मासिक खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। गृहिणियों का कहना है कि सीमित आय में घर का खर्च चलाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। लोगों का मानना है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आम जनता को महंगाई से राहत मिल सके और उनका जनजीवन सामान्य बना रहे।
महंगाई बढ़ने से गृहिणियों की चिंता बढ़ रही है। पतजू निवासी अनीता देवी ने बताया कि रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। कम खर्च में पूरे महीने घर चलाना चुनौती है। वहीं संठी निवासी सुनीता देवी ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ने से हर सामान महंगा हो गया है और अब भोजन भी अतिरिक्त खर्च जैसा लगने लगा है।
व्यापारियों का कहना है कि बढ़े परिवहन खर्च का सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है। लोहरैया क्षेत्र के दवा व्यवसायी एवं व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री रामअजोर कसौधन ने कहा कि तेल के दाम में वृद्धि से सामान की ढुलाई में अधिक व्यय हो रहा है। इसलिए सामानों के दाम में वृद्धि अपने आप हो जा रही है।
किराना व्यापारी ध्रुव कसौधन के अनुसार माल ढुलाई महंगी होने से खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
कपड़ा व्यवसायी राहुल अग्रहरि ने बताया कि परिवहन खर्च बढ़ने से कपड़ों के दाम में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में ग्राहकों को समझाना मुश्किल हो रहा है और बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।
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बाजार में सरसों तेल, दाल, चावल और चीनी समेत कई आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि दर्ज की गई है। सरसों तेल का दाम 165 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 175 रुपये किलो पहुंच गया है। वहीं अरहर दाल 95 रुपये किलो से बढ़कर 110 रुपये किलो बिक रही है। चीनी की बोरी जो पिछले सप्ताह 2150 रुपये में मिल रही थी, अब 2220 रुपये में बिक रही है। दुकानदारों ने चीनी के दाम में करीब दो रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है।
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खलीलाबाद में एक मार्ट के प्रोपराइटर राजीव चौरसिया ने कहा कि इन दिनों दाल, रिफाइंड, सरसों तेल सभी के दाम बढ़े हैं। दूध की कीमत में भी दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स के दाम 50 से 60 रुपये किलो तक बढ़ गए हैं, जबकि लहसुन करीब 30 रुपये किलो महंगा हो गया है।
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बढ़ती कीमतों के कारण परिवारों को अपने मासिक खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। गृहिणियों का कहना है कि सीमित आय में घर का खर्च चलाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। लोगों का मानना है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आम जनता को महंगाई से राहत मिल सके और उनका जनजीवन सामान्य बना रहे।
महंगाई बढ़ने से गृहिणियों की चिंता बढ़ रही है। पतजू निवासी अनीता देवी ने बताया कि रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। कम खर्च में पूरे महीने घर चलाना चुनौती है। वहीं संठी निवासी सुनीता देवी ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ने से हर सामान महंगा हो गया है और अब भोजन भी अतिरिक्त खर्च जैसा लगने लगा है।
व्यापारियों का कहना है कि बढ़े परिवहन खर्च का सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है। लोहरैया क्षेत्र के दवा व्यवसायी एवं व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री रामअजोर कसौधन ने कहा कि तेल के दाम में वृद्धि से सामान की ढुलाई में अधिक व्यय हो रहा है। इसलिए सामानों के दाम में वृद्धि अपने आप हो जा रही है।
किराना व्यापारी ध्रुव कसौधन के अनुसार माल ढुलाई महंगी होने से खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
कपड़ा व्यवसायी राहुल अग्रहरि ने बताया कि परिवहन खर्च बढ़ने से कपड़ों के दाम में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में ग्राहकों को समझाना मुश्किल हो रहा है और बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।