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President Visit Magahar: मगहर में बोले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, कमजोरों के प्रति संवेदना और असहायों की सेवा से ही बढ़ेगी समरसता

Sun, 05 Jun 2022 01:48 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 05 Jun 2022 01:48 PM IST
सार

संतकबीर की समाधि पर महामहिम ने मत्था टेका, उनके साथ राज्यपाल व मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। महामहिम के हाथों संतकबीर की धरा (धरती) को 49 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली।

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President Ramnath kovind Visit Magahar on Sant Kabir Samadhi
मगहर में राष्ट्रपति। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि समाज के कमजोर लोगों के प्रति संवेदना रखे बिना और और असहायों की सेवा किए बगैर समरसता नहीं आ सकती। संतकबीर ने सामाजिक समरसता को बढ़ाने के लिए कमजोरों के प्रति संवेदना और और असहायों की सेवा पर निरंतर जोर दिया। उनका समूचा जीवन सांप्रदायिक एकता का संदेश देता रहा। आज एक ही परिसर में उनकी समाधि व मजार का होना सांप्रदायिक एकता की दुर्लभ मिसाल है।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार सुबह मगहर के कबीर चौरा पहुंचे। वहां स्थित संतकबीर की समाधि पर मत्था टेकने, पौधरोपण करने के बाद यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किए। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उन्होंने संतकबीर अकादमी एवं शोध संस्थान तथा इंटरप्रेटेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया।
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अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि संतकबीर इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए काशी से मगहर आए थे कि काशी में मृत्यु से स्वर्ग प्राप्त होता है और मगहर में मृत्यु से नरक। ऐसा लगता है कि मानो वह अकाल से त्रस्त लोगों का जीवन संवारने के लिए ही मगहर आए थे। संत कबीर एक सच्चे पीर थे। 'कबीर सोई पीर है जो जाने पर पीर।'
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उन्होंने कहा कि संतकबीर ने अपनी वंचनाओं को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाया। वह कपड़ा बुनने का काम करते थे। अच्छा कपड़ा बुनने के लिए सूत की कताई, रंगाई से लेकर ताना-बाना तैयार करने तक बहुत सावधानी और सजगता की जरूरत होती है। संतकबीर ने उस समय विभाजित समाज में समरसता लाने के लिए सामाजिक मेलजोल की बारीक कताई की, ज्ञान के रंग से सुंदर रंगाई की, एकता व समन्वय का मजबूत ताना-बाना तैयार किया और समरस समाज के निर्माण की चादर बुनी। इस चादर को उन्होंने बहुत सावधानी से ओढ़ा और कभी मैला नहीं होने दिया। कहा जाता है, 'दास कबीर जतन ते ओढ़ी, ज्यूं की त्युं ज्यों धर दीनी चदरिया।'

 

राष्ट्रपति ने कहा कि संतकबीर ने समानता व समरसता का मार्ग दिखाया। गृहस्थ जीवन में भी व संतों की तरह जीवन जीते रहे। वह पुस्तकीय ज्ञान से वंचित रहे पर साधु संगति के ज्ञान व अनुभव से उनके द्वारा प्रतिपादित शिक्षाएं 600 वर्ष बाद भी आमजन व बुद्धिजीवियों में एक समान लोकप्रिय हैं। उनका समय आक्रांताओं के आक्रमण का समय था। ऐसे में प्रेम व मैत्री का संदेश देने के लिए उन्होंने लोगों के बीच सीधा संवाद किया। कभी-कभी ठेठ शब्दों का भी प्रयोग किया जो तब की परिस्थितियों के अनुसार बहुत जरूरी भी था। संतकबीर ने पहले समाज को जगाया और फिर चेताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी मान्यता रही है कि संतो के आगमन से धरती पवित्र होती है। एक समय तक ऊसर, बंजर और अभिशप्त रही मगहर की भूमि भी संत कबीर के आगमन से खिल उठी। कहा जाता है कि संतकबीर के आमंत्रण पर नाथपीठ के एक सिद्ध यहां आए थे। उनके प्रभाव से यहां का तालाब जल से भर गया। गोरखतलैया से आमी नदी प्रवाहमान हो गई।

हमेशा सुधार के लिए तत्पर रहा है देश

राष्ट्रपति ने कहा कि यह देश हमेशा ही अपने में सुधार के लिए तत्पर रहा है। इसी कारण जब दुनिया में बड़ी-बड़ी सभ्यताओं का नामोनिशान मिट गया, भारत हजारों वर्ष की अटूट विरासत को लेकर अपने पांव पर मजबूती से खड़ा है।

बहुत कठिन होता है सहज होना

संतकबीर को महान व सहज संत बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सहज होना वास्तव में बहुत कठिन होता है।आसक्ति आसानी से नहीं छोड़ती। संतकबीर ने बहुत सहजता से यह संदेश दिया किसी स्थान विशेष से स्वर्ग या नरक नहीं मिलता। बल्कि यह हमारे आचरण पर निर्भर करता है। वह मानते थे कि ईश्वर जब कण-कण में व्याप्त है तो हम उसे बाहर क्यों खोजें।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महान समाज सुधारक संतकबीर की साधना एवं निर्वाण स्थली मगहर में  31.49 करोड़ रुपये की लागत से बने संतकबीर अकादमी एवं शोध संस्थान, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 17.61 करोड़ रुपये की लागत वाले इंटरप्रेटेशन सेंटर और 37.66 लाख रुपये की लागत से कराए गए कबीर निर्वाण स्थली के सौंदर्यीकरण कार्यों का लोकार्पण किया।

कबीर की पुण्य भूमि पर आने की बेहद प्रसन्नता
साहेब बंदगी के उदबोधन से अपनी बात शुरू करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज कबीर साहेब की पुण्य भूमि पर आकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में उन्हें संतकबीर से जुड़े स्थलों के दर्शन तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में संतकबीर की स्मृति में आयोजित समारोहों में शामिल होने का अवसर प्राप्त होता रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने संतकबीर की समाधि के दर्शन किए थे। चार वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां दर्शन करने के साथ संतकबीर अकादमी समेत अनेक विकास कार्यो की आधारशिला रखी थी। आज उन कार्यों का लोकार्पण करते उन्हें बहुत प्रसन्नता हो रही है।

कबीर की समाधि के निकट राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया पौधरोपण
कबीर मठ, मगहर आगमन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतकबीर की समाधि का दर्शन व पूजन करने के उपरांत समाधि के ही निकट पौधरोपण भी किया। संयोग से रविवार को ही विश्व पर्यावरण दिवस भी मनाया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ वर्ष पहले उन्होंने बोधगया से बोधिवृक्ष मंगाकर राष्ट्रपति भवन परिसर में रोपित किया था। आज वह पौधा बड़ा हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि संतकबीर की धरा पर उनके, राज्यपाल व मुख्यमंत्री की तरफ से रोपित पौधे आगे चलकर यहां आने वाले लोगों को छाया व शीतलता प्रदान करेंगे।

 

सीएम योगी को जन्मदिन की बधाई देकर की मुक्तकंठ से सराहना
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके जन्मदिन की बधाई दी और उनके कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि योगी जी अंधविश्वास को दूर कर समरसता व जन कल्याण के कार्यों में जुटे रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह राज्य विकास और समरसता के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने संतकबीर के बताए मार्ग पर चलते हुए समानता व समरसता के अभियान में जुटी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की भी सराहना की।

संत कबीर अकादमी व इंटरप्रेटेशन सेंटर का महामहिम ने किया लोकार्पण
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मगहर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच से बटन दबाकर महान समाज सुधारक संतकबीर की साधना एवं निर्वाण स्थली मगहर में  31.49 करोड़ रुपये की लागत से बने संतकबीर अकादमी एवं शोध संस्थान, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 17.61 करोड़ रुपये की लागत वाले इंटरप्रेटेशन सेंटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर 37.66 लाख रुपये की लागत से कराए गए कबीर निर्वाण स्थली के सौंदर्यीकरण कार्यों का भी लोकार्पण हुआ।

राष्ट्रपति को दिए स्मृति चिह्न से मजबूत हुई ओडीओपी की ब्रांडिंग
राष्ट्रपति के मगहर आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका अभिनंदन करते हुए उन्हें हाथ से बुना अंगवस्त्र प्रदान किया। इस अंगवस्त्र पर संतकबीर के दोहों का अंकन किया गया है। इसके अलावा महामहिम को ओडीओपी के तहत शामिल बखिरा के पीतल बर्तन उद्योग से संबंधित स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। राष्ट्रपति को दिए गए इस भेंट से संतकबीरनगर के ओडीओपी की ब्रांडिंग और मजबूत हुई है।

 

मगहर में आगे भी होते रहेंगे पर्यटन विकास के कार्य: सीएम योगी आदित्यनाथ
कबीर धरा पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति व राज्यपाल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संतकबीर की परिनिर्वाण स्थली पर राष्ट्रपति के कर कमलों से आज कई कार्यों का लोकार्पण हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मगहर में बुनियादी सुविधाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा व रोजगार सृजन को लेकर पर्यटन विकास के कार्य आगे भी होते रहेंगे।

सीएम योगी ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि महामहिम राष्ट्रपति उत्तर प्रदेश के ही सपूत हैं। उनसे उत्तर प्रदेश के बारे में कुछ भी छुपा नहीं है। एक सामान्य गांव और एक सामान्य परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर देश का मार्गदर्शन करना भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मगहर में संतकबीर अकादमी की स्थापना से कबीर की साखी, बीजक आदि साहित्य पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। शोधार्थियों को छात्रवृत्ति के साथ ही आवासीय सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि देश के अनेक स्थलों की पहचान व सौंदर्यीकरण को लेकर पीएम मोदी के नेतृत्व में अनेक कार्य चल रहे हैं। इसी क्रम में स्वदेश दर्शन पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, आध्यात्मिक सर्किट के विकास से बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं तो साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि काशी, जहां संत कबीर ने जन्म लिया था, वहां 13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा विश्वनाथ के भव्य एवं दिव्य धाम का लोकार्पण किया।

आज वहां प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इससे रोजगार की अनेक संभावनाओं को बढ़ावा मिला है। अयोध्या व कुशीनगर का भी इसी तर्ज पर विकास हो रहा है। मंत्री ने कहा कि मगर में पर्यटन विकास के कार्य पहले भी हुए अभी भी हो रहे हैं और आगे भी होंगे।

 

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर कहा कि हमें अगले 25 वर्ष का लक्ष्य तय करना है और इन लक्ष्यों से हर एक नागरिक को जुड़ना होगा। 'काल करे सो आज कर, आज करे सो अब' के  उद्धरण से उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि टालमटोल से बचें और कर्मपथ पर आगे बढ़ते हुए समाज, प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।

सीएम ने की पौधरोपण व जल संरक्षण की अपील
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक पौधरोपण व जल संरक्षण की अपील की। उन्होंने कहा कि आज हम संतकबीर की धरती पर हैं। संतकबीर ने रूढ़िवादिता का विरोध करते हुए मगहर आए और जिसे नरक समझा जाता था, उसे अपने विचारों व शिक्षाओं से स्वर्ग बना दिया। हमारे ऋषि-मुनियों व संतों ने सदैव हमें प्रेरणा दी है।

उन्होंने कहा कि 5 वर्ष पहले मगहर में आमी नदी बहुत प्रदूषित थी। पानी से बदबू आती थी और उसका रंग काला हो गया था। आज सरकार के व्यवस्थित प्रयासों से आमी नदी प्रदूषण मुक्त हो गई है। इसका पानी साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले आमी नदी के दोनों और बसे गांवों में प्रदूषित पानी से पशुधन नष्ट होता था , खेती चौपट होती थी। पर आज यह स्थिति बदल गई है। पशुधन समुन्नत है तो किसान खुशहाल।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में अमृत सरोवर का संकल्प दिया है। हमें संकल्प लेना होगा कि आज जैसे आमी अविरल और निर्मल हो गई है। वैसे ही हमें अपने गांव के अमृत सरोवर को कब्जा व कूड़ा मुक्त कर तीर्थ स्थल समान विकसित करना है।हमें याद रखना होगा कि जल है तो कल है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि देवी-देवताओं के साथ वृक्षों को जोड़कर हमारे मनीषियों ने वृक्षों से आत्मीय संवाद स्थापित किया था। आज विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें एक बार पुनः इसी ओर उन्मुख होने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जय लवीर सिंह ने किया। इस अवसर पर कबीर मठ मगहर के महंत विचार दास, संतकबीर नगर के सांसद प्रवीण निषाद, खलीलाबाद के विधायक अंकुर राज तिवारी भी मौजूद रहे।

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