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Sant Kabir Nagar News: निकाय चुनाव की हार से उबर नहीं पा रही सपा
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धनघटा। नगर पंचायत हैंसर बाजार में हुई हार से समाजवादी पार्टी उबर नहीं पा रही है। पार्टी के अंदर हुई भितरघात से आहत सपा समर्थित उम्मीदवार और उनके समर्थक लखनऊ में पहुंचकर शीर्ष नेतृत्व को हार के कारणों के जिम्मेदारों का नाम गिना रहे हैं। वहीं दूसरे लोग पार्टी प्रत्याशी का चयन गलत होना बताकर अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। इसका प्रमाण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
नवगठित नगर पंचायत हैंसर बाजार धनघटा में पार्टी चयन के दौरान ही समाजवादी पार्टी में खेल हो गया। सपा ने पहले मनीषा पासवान को प्रत्याशी घोषित किया। उन्होंने नामांकन पत्र भी समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में दाखिल कर दिया। उसके बाद मनीषा पासवान को दल के लिए समर्पित न होने की दलील पेश करते हुए दूसरा पक्ष ने सुभावती चौहान को पार्टी का सिंबल दिलाने में कामयाब हो गया। अंत में सुभावती चौहान ही पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी बनीं और साइकिल चुनाव निशान भी उनके खाते में गया।
उसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मनीषा पासवान को पार्टी का समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया। उसके बाद सपा के सभी कद्दावर नेता मनीषा पासवान को जिताने के लिए जी जान से जुट गए। उधर सुभावती चौहान का प्रचार-प्रसार तो नहीं हुआ, लेकिन लोगों को आशंका है कि पार्टी के अंदर भितरघात हो गया। इसका खामियाजा मनीषा चौहान को हार के रूप में भुगतना पड़ा। उसके बाद पार्टी ने जिला कार्यकारिणी का गठन कर दिया। फिर चार दिन बाद सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने नवगठित कार्यकारिणी को भंग कर दिया। तभी से पार्टी के नेताओं की लखनऊ भागदौड़ तेज हो गई है।
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सूत्रों का कहना है कि सपा में नेताओं के बीच चल रहे शह-मात के खेल से पार्टी के अंदर जबरदस्त गुटबाजी होने लगी है। इसका असर वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर इस समय तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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नवगठित नगर पंचायत हैंसर बाजार धनघटा में पार्टी चयन के दौरान ही समाजवादी पार्टी में खेल हो गया। सपा ने पहले मनीषा पासवान को प्रत्याशी घोषित किया। उन्होंने नामांकन पत्र भी समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में दाखिल कर दिया। उसके बाद मनीषा पासवान को दल के लिए समर्पित न होने की दलील पेश करते हुए दूसरा पक्ष ने सुभावती चौहान को पार्टी का सिंबल दिलाने में कामयाब हो गया। अंत में सुभावती चौहान ही पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी बनीं और साइकिल चुनाव निशान भी उनके खाते में गया।
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उसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मनीषा पासवान को पार्टी का समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया। उसके बाद सपा के सभी कद्दावर नेता मनीषा पासवान को जिताने के लिए जी जान से जुट गए। उधर सुभावती चौहान का प्रचार-प्रसार तो नहीं हुआ, लेकिन लोगों को आशंका है कि पार्टी के अंदर भितरघात हो गया। इसका खामियाजा मनीषा चौहान को हार के रूप में भुगतना पड़ा। उसके बाद पार्टी ने जिला कार्यकारिणी का गठन कर दिया। फिर चार दिन बाद सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने नवगठित कार्यकारिणी को भंग कर दिया। तभी से पार्टी के नेताओं की लखनऊ भागदौड़ तेज हो गई है।
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सूत्रों का कहना है कि सपा में नेताओं के बीच चल रहे शह-मात के खेल से पार्टी के अंदर जबरदस्त गुटबाजी होने लगी है। इसका असर वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर इस समय तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।