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जिले में पटरी से उतरी मनरेगा योजना, मजदूर बेहाल

Wed, 20 Oct 2021 11:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 11:30 PM IST
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not work in manrega
जिले में पटरी से उतरी मनरेगा योजना, मजदूर बेहाल
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मांगने पर भी मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है, संयुक्त आयुक्त मनरेगा के निर्देश भी बेअसर
संतकबीरनगर। जिले में मनरेगा योजना पटरी से उतर गई है। मांगने पर भी मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। आठ ब्लॉकों की 86 ग्राम पंचायतों में अब भी मनरेगा के तहत कार्य शुरू नहीं हो पाया है। महिला मेट को भी नियोजित नहीं किया गया है। 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान करने का शासन के निर्देश भी बेअसर साबित हो रहे हैं। ट्रांजक्शन फेल का खेल तो पुुराना है। आठ सितंबर को यहां आए संयुक्त आयुक्त मनरेगा धर्मेंद्र प्रताप सिंह के जरिए दिए गए निर्देश भी बेअसर साबित हो रहे हैं।
जिले में 2,04,861 जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें 1,13,205 जॉबकार्ड धारक सक्रिय हैं। अप्रैल से अब तक 1,35,412 मजदूर ऑनलाइन रोजगार की मांग कर चुके हैं। इसमें से सिर्फ 78.03 प्रतिशत मजदूरों को ही रोजगार दिया गया। जिले में 754 ग्राम पंचायतें हैं, जिसमें से 84 ग्राम पंचायतों में अब भी मनरेगा का कार्य नहीं शुरू हुआ है। हैंसर बाजार सिर्फ इकलौता ब्लॉक है, जहां सभी 86 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। जबकि मेंहदावल के 11, बेलहर के पांच, सांथा के तीन, नाथनगर के पांच, पौली के 17, बघौली के सात, सेमरियावां के 23 और खलीलाबाद की 13 ग्राम पंचायतों में काम नहीं हो रहा है। प्रदेश में मिशन-20 के तहत 20 लाख लोगों को 100 दिन का रोजगार दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें संतकबीरनगर को 54,238 लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया जाना है, लेकिन अभी तक सिर्फ 364 लोगों को ही 100 दिन का रोजगार दिया जा सका है। वर्ष 2013-14 से अब तक 2263 ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हुआ है, जो अनियमितता की ओर इशारा है। समय से मजदूरों को भुगतान करने की स्थिति प्रदेश में 89 प्रतिशत है। जबकि संतकबीरनगर में 69 प्रतिशत है। मोबाइल मानीटरिंग सिस्टम में 84,605 मस्टर रोल मनरेगा में भरे गए है। इसमें 9308 मस्टर रोल की मानीटरिंग मोबाइल सिस्टम से की गई है। चार ब्लॉकों में 157 महिला मेट बनाई गई हैं। इनमें से सिर्फ दो महिला मेट को ही काम दिया गया है। खराब प्रगति वाले ब्लॉकों में बघौली, पौली,सेमरियावां और खलीलाबाद हैं। डीसी मनरेगा उमाशंकर तिवारी ने बताया कि यह सच है कि मनरेगा में मजदूूूरों को मांग के सापेक्ष काम नहीं दिया जा सका है। ससमय भुगतान में भी जिला पिछड़ गया है। फेल ट्रांजक्शन का मामला भी है। सभी बीडीओ और एपीओ को शोकॉज नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं होने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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कोट
मनरेगा योजना की समीक्षा में स्थिति संतोषजनक नहीं मिली है। सभी बीडीओ और एपीओ के साथ पूर्व में बैठक की गई थी। जो कमियां सामने आई हैं, उनमें एक सप्ताह के भीतर सुधार करने का मौका दिया गया है। जिन 84 ग्राम पंचायतों में काम नहीं चल रहा है, वहां दो दिन के अंाद काम शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुधार नहीं होने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- सुरेंद्रनाथ श्रीवास्तव, सीडीओ
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