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‘चुनाव सुधार पर राजनीतिक दल गंभीर नहीं’

Wed, 11 Jan 2017 11:40 PM IST
Sant Kabir Nagar
Sant Kabir Nagar Updated Wed, 11 Jan 2017 11:40 PM IST
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"No serious political parties on electoral reforms'
संगोष्ठी में मंचासीन अतिथि। - फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र में चुनाव महा अनुष्ठान की तरह है। लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। लोकतंत्र में जनभागीदारी जितनी ज्यादा होगी, लोकतंत्र उतना ही सशक्त होगा। आजादी के बाद से अब तक कोई भी राजनीतिक दल भारतीय लोकतंत्र में चुनाव सुधार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं है। ये बातें बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने कहीं। मौका था एचआरपीजी कालेज खलीलाबाद में यूजीसी और राजनीति विभाग द्वारा ‘भारतीय लोकतंत्र एवं चुनाव सुधार-चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का। 
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बतौर मुख्य अतिथि प्रो. मिश्र ने कहा कि चुनाव में जाति-धर्म की राजनीति ने लोकतंत्र को चोट पहुंचाई है। आज भारतीय लोकतंत्र के सामने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिये व  चुनाव सुधार के लिए देश के 125 करोड़ लोगों और राजनीतिक दलों को एक साथ आना होगा। इसके लिए चुनाव आयोग को और अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है। आज भी शत प्रतिशत मतदान नहीं हो पा रहा। मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए हमें मतदाता जागरूकता के लिए रैलियां निकालनी पड़ रही हैं। यह चिंता का विषय है। 2017 के चुनाव में अगर धनबल पर लगाम लगी तो यह चुनाव सुधार के दिशा में कारगर कदम होगा। 
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विशिष्ठ अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव शरण ने कहा कि लोकतंत्र केवल संख्या का खेल नहीं है, इसकी गुणवत्ता संख्या से ज्यादा मायने रखती है। लोकतंत्र की विश्वसनीयता और गुणवत्ता के लिये  जरूरी है कि राजनीति में स्वच्छ छवि के लोगों की भागीदारी हो। क्षेत्रीय दल ,जाति आधारित राजनीति और भाषाई राजनीति ने देश की राजनीति को प्रभावित किया है। इससे लोकतंत्र कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए व्यवस्था का पारदर्शी व उत्तरदायी होना जरूरी है। उन्होंने चुनाव सुधार के लिए दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की वकालत की। कहा कि एक प्रत्याशी का अनेक सीटों से लड़ने पर रोक होनी चाहिए।
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अध्यक्षता कर रहे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के कुलपति प्रोफेसर रजनीकांत पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र हमारी जीवन पद्धति है। इसकी जड़े और गहरी और मजबूत हों इसके लिए समाज और राजनीतिक दलों को सोचना होगा। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में तमाम विमर्शों को जन्म दिया है। अनेक बदलाव समाज और राजनीति में होते दिख रहे हैं। सूचना का अधिकार, न्यायिक सक्रियता और अब चुनाव आयोग का मजबूत होना यह बतलाता है कि देश बदलाव की ओर है। यह हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।


संचालन डॉक्टर ब्रजेश त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर प्रबंध सचिव विनोद रुंगटा, डॉ. वीके अग्रवाल, डॉ. डीडी सिंह, डॉ. विजय कृष्ण ओझा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अनुभव श्रीवास्तव भारती, डॉ.  प्रताप विजय, डॉ.  प्रत्यूष दुबे, डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह, डॉ. मंजू मिश्रा, डॉ. संध्या राय, डॉ. अमरनाथ पांडेय आदि मौजूद रहे।
 
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