{"_id":"66c79cfd65a997a92b0236a4","slug":"no-guards-at-the-gate-of-opd-and-mch-wingsecurity-depends-on-god-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-119554-2024-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: ओपीडी और एमसीएच विंग के गेट पर गार्ड नहीं...सुरक्षा भगवान भरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: ओपीडी और एमसीएच विंग के गेट पर गार्ड नहीं...सुरक्षा भगवान भरोसे
Fri, 23 Aug 2024 01:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 23 Aug 2024 01:48 AM IST
विज्ञापन
- जिला अस्पताल का हाल, सुरक्षा में तैनात हैं 13 गार्ड
- स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के आवास की भी सुरक्षा नहीं
- अनजान लोगों की आवाजाही से खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर एमसीएच विंग और ऊपरी तल पर कोई भी व्यक्ति कभी भी आ-जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के आवास की भी कोई सुरक्षा नहीं है। आवासीय परिसरों में सन्नाटा पसरा रहता है। अमर उजाला ने जब जिला अस्पताल में सुरक्षा का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया। पड़ताल के दौरान गेट से लेकर अंदर तक बमुश्किल कोई सुरक्षाकर्मी नजर आया। कागजों में सुरक्षा के लिए कुल 13 गार्ड तैनात हैं।
कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल भवन के अंदर प्रवेश करने के लिए पांच चैनल गेट लगे हैं। ओपीडी, इमरजेंसी, हड्डी विभाग, सिटी स्कैन विभाग और एक अस्पताल के पीछे चैनल लगा गेट है। यहां से बिना रोकटोक आ-जा सकता है। इन गेट पर कोई भी गार्ड नहीं रहता है। यही हाल चिकित्सकों के आवासीय परिसर का है।
सुबह 11 बजे ओपीडी का मुख्य गेट
जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे ओपीडी के मुख्य गेट पर कोई गार्ड नजर नहीं आया। यहां लोग पर्चा बनवाकर ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने जा रहे थे। साथ ही पर्चा बनवाने के लिए सीधी लाइन कराने के लिए कोई गार्ड नहीं दिखा। लोग अपने हिसाब से लाइन लगा रहे थे, जिससे अन्य मरीजों को दिक्कत हो रही थी।
विज्ञापन
सुबह 11:12 बजे इमरजेंसी का मुख्य गेट
जिला अस्पताल में सुबह 11:12 बजे इमरजेंसी के मुख्य गेट पर लोग आ-जा रहे थे। उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। लोग गेट पर ही खड़े हो जा रहे थे। उन्हें वहां से हटाने के लिए गार्ड मौजूद नहीं था, अगर कोई गंभीर मरीज आ जाए तो तत्काल उसे स्ट्रेचर पर ले जाया जा सके।
सुबह 11:20 बजे आईसीयू का मुख्य गेट
आईसीयू कक्ष के मुख्य गेट सुबह 11:20 बजे कोई गार्ड नहीं था। यहां हर कोई बेरोकटोक आ-जा रहा था, जबकि यहां काफी संख्या में बच्चे भर्ती हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
सुबह 11:30 बजे एमसीएच विंग का मुख्य गेट
एमसीएच विंग के मुख्य गेट पर सुबह 11.30 बजे भी कोई गार्ड नहीं मौजूद नहीं था। यहां पर महिलाओं का इलाज होता है। साथ ही प्रसव संबंधी का कार्य होता है। गेट पर सिर्फ एक महिला कर्मी थी जो लोगों को वार्ड व अन्य जानकारी दे रही थी। यहां पर गेट पर गार्ड नहीं दिखा।
सुरक्षा पर हर माह खर्च होता है डेढ़ लाख रुपये
जिला अस्पताल की सुरक्षा के लिए कुल 13 गार्ड तैनात हैं। इनमें 10 गार्ड अवनी परिधि और तीन गार्ड मुबंई इंटेलिजेंस सिक्योरिटी सर्विस से हैं। इनके मानदेय पर हर माह डेढ़ लाख रुपये खर्च होते हैं लेकिन जिला अस्पताल में गेट पर गार्ड दिखाई नहीं देते हैं। भारी भरकम रकम खर्च होने के बाद भी गार्ड का न दिखाई देना अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़ा कर रहा है।
अस्पताल की सुरक्षा के लिए 13 गार्ड तैनात हैं। इनमें से कुछ गार्ड नहीं आ रहे हैं, इसे लेकर समीक्षा की जा रही है। अस्पताल के सीनियर चिकित्सकों के साथ बैठक की जाएगी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। हालांकि सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है।
- डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस
विज्ञापन
- स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के आवास की भी सुरक्षा नहीं
- अनजान लोगों की आवाजाही से खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर एमसीएच विंग और ऊपरी तल पर कोई भी व्यक्ति कभी भी आ-जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के आवास की भी कोई सुरक्षा नहीं है। आवासीय परिसरों में सन्नाटा पसरा रहता है। अमर उजाला ने जब जिला अस्पताल में सुरक्षा का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया। पड़ताल के दौरान गेट से लेकर अंदर तक बमुश्किल कोई सुरक्षाकर्मी नजर आया। कागजों में सुरक्षा के लिए कुल 13 गार्ड तैनात हैं।
कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल भवन के अंदर प्रवेश करने के लिए पांच चैनल गेट लगे हैं। ओपीडी, इमरजेंसी, हड्डी विभाग, सिटी स्कैन विभाग और एक अस्पताल के पीछे चैनल लगा गेट है। यहां से बिना रोकटोक आ-जा सकता है। इन गेट पर कोई भी गार्ड नहीं रहता है। यही हाल चिकित्सकों के आवासीय परिसर का है।
विज्ञापन
सुबह 11 बजे ओपीडी का मुख्य गेट
जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे ओपीडी के मुख्य गेट पर कोई गार्ड नजर नहीं आया। यहां लोग पर्चा बनवाकर ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने जा रहे थे। साथ ही पर्चा बनवाने के लिए सीधी लाइन कराने के लिए कोई गार्ड नहीं दिखा। लोग अपने हिसाब से लाइन लगा रहे थे, जिससे अन्य मरीजों को दिक्कत हो रही थी।
विज्ञापन
सुबह 11:12 बजे इमरजेंसी का मुख्य गेट
जिला अस्पताल में सुबह 11:12 बजे इमरजेंसी के मुख्य गेट पर लोग आ-जा रहे थे। उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। लोग गेट पर ही खड़े हो जा रहे थे। उन्हें वहां से हटाने के लिए गार्ड मौजूद नहीं था, अगर कोई गंभीर मरीज आ जाए तो तत्काल उसे स्ट्रेचर पर ले जाया जा सके।
सुबह 11:20 बजे आईसीयू का मुख्य गेट
आईसीयू कक्ष के मुख्य गेट सुबह 11:20 बजे कोई गार्ड नहीं था। यहां हर कोई बेरोकटोक आ-जा रहा था, जबकि यहां काफी संख्या में बच्चे भर्ती हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
सुबह 11:30 बजे एमसीएच विंग का मुख्य गेट
एमसीएच विंग के मुख्य गेट पर सुबह 11.30 बजे भी कोई गार्ड नहीं मौजूद नहीं था। यहां पर महिलाओं का इलाज होता है। साथ ही प्रसव संबंधी का कार्य होता है। गेट पर सिर्फ एक महिला कर्मी थी जो लोगों को वार्ड व अन्य जानकारी दे रही थी। यहां पर गेट पर गार्ड नहीं दिखा।
सुरक्षा पर हर माह खर्च होता है डेढ़ लाख रुपये
जिला अस्पताल की सुरक्षा के लिए कुल 13 गार्ड तैनात हैं। इनमें 10 गार्ड अवनी परिधि और तीन गार्ड मुबंई इंटेलिजेंस सिक्योरिटी सर्विस से हैं। इनके मानदेय पर हर माह डेढ़ लाख रुपये खर्च होते हैं लेकिन जिला अस्पताल में गेट पर गार्ड दिखाई नहीं देते हैं। भारी भरकम रकम खर्च होने के बाद भी गार्ड का न दिखाई देना अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़ा कर रहा है।
अस्पताल की सुरक्षा के लिए 13 गार्ड तैनात हैं। इनमें से कुछ गार्ड नहीं आ रहे हैं, इसे लेकर समीक्षा की जा रही है। अस्पताल के सीनियर चिकित्सकों के साथ बैठक की जाएगी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। हालांकि सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है।
- डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस