{"_id":"66cb730a5b2563d6a2061c35","slug":"mothers-observed-halshasti-fast-for-the-longevity-of-their-children-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-119727-2024-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत
Sun, 25 Aug 2024 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 25 Aug 2024 11:38 PM IST
विज्ञापन
- कुश के पौधे में गांठ लगाकर दही, महुआ और चंदन से पूजन किया
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महिलाओं ने सुबह से हलषष्ठी का व्रत रखकर संतानों की लंबी आयु की कामना करते हुए पूजन- अर्चन किया। इस दौरान महिलाओं ने कुश के पौधे में गांठ लगाकर दही महुआ चंदन आदि अर्पित किया। संतान की दीर्घायु एवं सुख समृद्धि की कामना की।
आचार्य पंडित बृजलाल तिवारी ने बताया कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि को हल षष्ठी व्रत किया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलरामजी का जन्म हुआ था। बलरामजी का मुख्य अस्त्र हल मुसल कि वजह से इस व्रत को हल षष्ठी व्रत के नाम से जाना जाता है। माताएं अपने अपने घरों में कुश का पौधा लगाकर पूजन अर्चन करती हैं। इसे ललही छठ व्रत भी कहते हैं।
व्रती महिलाएं सुबह नित्यकर्म के उपरांत महुआ का दातून कर स्नान करने के बाद दही, हल्दी, तिन्नी का चावल के साथ कुश में गांठ लगाया और धूप-दीप के साथ भगवान शिव विघ्नविनाशक गणेश, कार्तिकेय एवं माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना की। महिलाएं सामूहिक रूप से स्कंद पुराण में वर्णित हस्तिनापुर के राजा हस्ती की कथा सुनी। उसके बाद प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर क्षेत्र की कई महिलाएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महिलाओं ने सुबह से हलषष्ठी का व्रत रखकर संतानों की लंबी आयु की कामना करते हुए पूजन- अर्चन किया। इस दौरान महिलाओं ने कुश के पौधे में गांठ लगाकर दही महुआ चंदन आदि अर्पित किया। संतान की दीर्घायु एवं सुख समृद्धि की कामना की।
आचार्य पंडित बृजलाल तिवारी ने बताया कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि को हल षष्ठी व्रत किया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलरामजी का जन्म हुआ था। बलरामजी का मुख्य अस्त्र हल मुसल कि वजह से इस व्रत को हल षष्ठी व्रत के नाम से जाना जाता है। माताएं अपने अपने घरों में कुश का पौधा लगाकर पूजन अर्चन करती हैं। इसे ललही छठ व्रत भी कहते हैं।
विज्ञापन
व्रती महिलाएं सुबह नित्यकर्म के उपरांत महुआ का दातून कर स्नान करने के बाद दही, हल्दी, तिन्नी का चावल के साथ कुश में गांठ लगाया और धूप-दीप के साथ भगवान शिव विघ्नविनाशक गणेश, कार्तिकेय एवं माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना की। महिलाएं सामूहिक रूप से स्कंद पुराण में वर्णित हस्तिनापुर के राजा हस्ती की कथा सुनी। उसके बाद प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर क्षेत्र की कई महिलाएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन