{"_id":"6a5a6eccc0cafc054904737c","slug":"man-convicted-of-abducting-and-sexually-exploiting-a-minor-sentenced-to-10-years-in-prison-khalilabad-news-c-209-1-skn1001-153974-2026-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: नाबालिग को भगाकर यौन शोषण करने के दोषी को 10 साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: नाबालिग को भगाकर यौन शोषण करने के दोषी को 10 साल की सजा
विज्ञापन
संतकबीरनगर। नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने और यौन शोषण करने के करीब आठ वर्ष पुराने मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपहरण के आरोप में भी अलग से सजा सुनाई, हालांकि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन के अनुसार, 17 जुलाई 2018 को बखिरा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में राकेश उर्फ ट्रॉली वर्मा निवासी ग्राम परतिया, थाना बखिरा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलित कर पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मामले की सुनवाई एएसजे/ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में हुई। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने धारा 376(2)(झ) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा 363 के तहत तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
विज्ञापन
अर्थदंड जमा न करने पर तीन माह अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण अवधि में न्यायिक अभिरक्षा में बिताए गए समय का समायोजन भी किया जाएगा। संवाद
विज्ञापन
अभियोजन के अनुसार, 17 जुलाई 2018 को बखिरा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में राकेश उर्फ ट्रॉली वर्मा निवासी ग्राम परतिया, थाना बखिरा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलित कर पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई एएसजे/ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में हुई। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने धारा 376(2)(झ) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा 363 के तहत तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
विज्ञापन
अर्थदंड जमा न करने पर तीन माह अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण अवधि में न्यायिक अभिरक्षा में बिताए गए समय का समायोजन भी किया जाएगा। संवाद