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Sant Kabir Nagar News: मदरसा भूमि केस फिर एसडीएम कोर्ट में चलने के आसार

Sat, 16 May 2026 11:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 11:54 PM IST
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Madrasa land case likely to be heard again in SDM court
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसा भूमि प्रकरण में अफसरों द्वारा जमीन को सरकारी बताने का कोई आधार नहीं निकला। हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त और डीएम के आदेश को रद्द कर दिया। डीएम कोर्ट ने मदरसा भूमि को राज्य सरकार के खाते में निहित करने का आदेश दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद अधिकारी आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि मदरसा भूमि प्रकरण फिर से एसडीएम कोर्ट में जा सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिक के नाम पर खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार में निहित करने संबंधी मामले में अधिकारियों के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने डीएम और बस्ती मंडल के आयुक्त द्वारा पारित आदेशों को निरस्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के मामले में निर्णय देने का अधिकार केवल उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को है, जिलाधिकारी को नहीं।
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मामला कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी से जुड़ा है, जो मदरसा संचालित करने वाली पंजीकृत संस्था है। संस्था ने वर्ष 2014 में जमीन खरीदी थी। इस संबंध में की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमीन खरीद के समय संस्था का मुखिया शमशुल हुदा खान ब्रिटेन का नागरिक बन चुका था इसलिए राज्य सरकार की अनुमति के बिना उनके नाम जमीन खरीदना अवैध है।
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इस शिकायत पर डीएम कोर्ट ने जमीन को राज्य सरकार में निहित घोषित कर दिया था। बाद में पुनरीक्षण के बाद भी जिलाधिकारी ने दोबारा वही आदेश पारित किया, जिसे आयुक्त बस्ती मंडल ने भी बरकरार रखा। याचिकाकर्ता संस्था ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली 2016 के नियम 103 के तहत इस प्रकार के मामलों का फैसला करने का अधिकार केवल एसडीएम को है।



न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकल पीठ ने पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था। अदालत ने कहा कि कलक्टर या अतिरिक्त कलक्टर एसडीएम को दिए गए वैधानिक अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकते। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने भी अदालत में स्वीकार किया कि जिलाधिकारी का आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना पारित हुआ था।


अदालत ने 14 नवंबर 2025 और 24 अप्रैल 2026 के आदेशों को रद्द करते हुए राज्य सरकार को कानून के अनुसार नई कार्यवाही करने की स्वतंत्रता दी। अब इसके बाद आगे के कदम के लिए प्रशासन मंथन में जुटा है। वहीं जानकारों के मुताबिक हाईकोर्ट द्वारा आदेश रद होने के बाद एसडीएम कोर्ट में मदरसा भूमि प्रकरण का मामला चलने की संभावना है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट में 18 मई की सुनवाई के बाद ही स्थिति साफ होगी।
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